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परीक्षा


सुष्मिता अपने कार्यालय पर मानव संसाधन की प्रमुख थी, उसे नये अभ्यर्थियों की चयन परीक्ष्ज्ञा लेनी थी, उसे काम के लिये शिक्षित व्यवहार कुशल और मेहनती युवक - युवतियों की जरूरत थी। 
उसने सोचा पढ़े लिखे तो मिल जायेगें, व्यवहार कुशल कैसे ढूंढूंगी, बस यही सोचकर व गरीब लाचार बनकर कार्यालय जाने वाली राह में बैठ गई। अपने हाथो में अपनी फाइल लिये लोगों को जाते देखती रही, कभी मदद की गुहार लगाती, कमी किसी से पीने को पानी मांगती लगभग सभी लोग उसे दुत्कार कर आगे बढ़ते रहे।

उसे लगा ऐसे में चयन कैसे होगा ? एक लड़की ने तो हद कर दी, उसे धक्का देकर आगे बढ़ गई, वह झल्ला गई। इतने में ही एक सामान्य सा दिखने वाला लड़का उन्हे उठा रहा था, तो उसके हाथ से फाइल छुट गई, सभी पन्ने यहां वहां बिखर गयें, तब भी उस लड़के ने सुस्मिता को उठाकर एक जगह बैठाया फिर अपने फाइल के पन्नों को व्यवस्थित किया, दोपहर से चयन प्रक्रिया शुरू हुई, एक के बाद एक सभी को निराशा हाथ लगी। उस लड़के का चयन हो गया, जिसकी पूरी फाइल बिखर गई थी फिर भी उसने अपना कर्त्तव्य नहीं छोड़ा।

- डॉ. श्रीमती मंजु लंगोटे
   बैतूल, मध्य प्रदेश
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