Loading...

कुंडली और वास्तु


प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली अलग होती है और वास्तु भी, उस व्यक्ति के जीवन ऊर्जा से जुड़ा होता है, इसलिए वास्तु देखने से पहले कुंडली जांचना उचित है। वास्तु सामूहिक ऊर्जा (समष्टि) देता है, लेकिन व्यक्ति की कुंडली के चतुर्थ भाव, ग्रह दशा और दिशा संबंधी दोषों के अनुसार उसका प्रभाव अलग होता है। उदाहरण : चतुर्थ भाव में शनि हो तो दक्षिण- पश्चिम दिशा मजबूत करना आवश्यक है। 

एकत्रित दृष्टिकोन का आवश्यक? वास्तु स्थान (स्थल) से जुड़ा है और ज्योतिष काल (समय) से। 
कुंडली न देखकर वास्तु सुधारने पर भी ग्रह दशा अनुसार फल सीमित रहता है। दोनों को एकत्र उपयोग कर वैयक्तिक उपाय (रत्न, यंत्र) करने से सुख- समृद्धि बढ़ती है। व्यावहारिक सल्ला प्रथम उदाहरण : कुंडली के चतुर्थ- द्वादश भाव और चालू दशा देखें, फिर प्लॉट की दिशा मिलाएं। वास्तु दोष हो तो कुंडली ग्रह अनुसार उपाय करें।

- डॉ. विशाखा व्यास 
   पंचतत्व एस्ट्रोलॉजी और वास्तु
   नागपुर महाराष्ट्र
समाचार 5464265376182521629
मुख्यपृष्ठ item

ADS

Popular Posts

Random Posts

3/random/post-list

Flickr Photo

3/Sports/post-list