संत गाडगे बाबा : स्वच्छता, विज्ञान और मानवता का अखंड दीप
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23 फरवरी - 150वीं जयंती के अवसर पर :
डेबूजी जिंगराजी जानोरकर का जन्म 23 फरवरी 1876 को अमरावती जिले के दरियापुर तालुका के एक साधारण से गांव शेंगाव (शेंडागोन) में हुआ था और बाद में वे संत गाडगे बाबा के नाम से समाज के मन में अमर हो गए। उनकी 150वीं जयंती के मौके पर उनके कामों को देखते हुए लगता है कि यह शख्सियत सिर्फ एक संत ही नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने वाली चलती-फिरती यूनिवर्सिटी थी। उनकी ज़िंदगी का हर पल वैज्ञानिक सोच, तेज़ ज़मीर और आम लोगों की सेवा के जज़्बे से रोशन था।
बचपन के संघर्ष और संवेदनशीलता का बनना :
कम उम्र में ही पिता की मौत के बाद, डेबूजी का बचपन अपने मामा के गांव में बीता। जंगल में घूमते हुए, मवेशी चराते हुए, वे सुरीली आवाज़ में भजन गाते थे। गरीबी की वजह से स्कूल के दरवाज़े उन तक नहीं पहुँचे; लेकिन उन्होंने अनुभवों की पाठशाला में जीवन के रहस्यों को सुलझाया।
साहूकारों के धोखे से उनके चाचा का खेत हड़प लेने की घटना ने उनके अंदर की भावना को झकझोर दिया। उन्हें पक्का एहसास हुआ कि अन्याय, अज्ञानता और अंधविश्वास ही गरीबी की जड़ हैं। इसी एहसास ने बाद में उनके जीवन की दिशा तय की।
सादा जीवन, उच्च विचार :
गाडगे बाबा ने जीवन भर फटे कपड़े पहने। वे एक बर्तन में खाना और पानी लेते थे और उसे अपने सिर पर रखते थे। उनके अनोखे व्यवहार के कारण, शुरू में लोग उन्हें 'पागल' समझते थे। लेकिन जब वे गाँवों में गए और हाथ में झाड़ू लेकर सड़कों, खेतों और मंदिर परिसर की सफाई करने लगे, तो लोग उनके कामों में छिपे संदेश को समझने लगे। उन्होंने अपने कामों से दिखाया कि सफाई ही भगवान के प्रति सच्ची भक्ति है।
कीर्तन से जागृति :
वे दो पत्थरों से बचने के बाद 'गोपाला गोपाला, देवकीनंदन गोपाला' कहकर अपना कीर्तन शुरू करते थे। उनकी कीर्तन शैली बातचीत वाली थी- सीधे सुनने वालों के दिलों से बात करने वाली। उनके कीर्तन पर संत तुकाराम के अभंग और संत कबीर के दोहों का प्रभाव था। उन्होंने अंधविश्वास, जाति-भेद, नशाखोरी और कर्मकांडों पर कड़ा प्रहार किया। उनका मूल मंत्र, “भगवान मंदिर में नहीं है; वह मानव की सेवा में है,” आज भी समाज को जागृत करता है। छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए, उन्होंने एक कुत्ते का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “छात्रों को कुत्ते की तरह सोना चाहिए; उन्हें कम खाना चाहिए और कम व सोच-समझकर बोलना चाहिए।” उनका संदेश था कि ज्ञान केवल धैर्य, जागरूकता और विवेक के तीन सिद्धांतों से प्राप्त होता है।
दस सूत्री कार्यक्रम - कार्य में मानव सेवा :
गाडगे बाबा ने सिर्फ उपदेश नहीं दिए; उन्होंने समाज सेवा का दस- सूत्री प्रोग्राम लागू किया।
1) भूखों को खाना, 2) प्यासों को पानी, 3) गरीब बच्चों की शिक्षा, 4) बेघरों को घर, 5) विकलांगों और बीमारों को दवा, 6) जानवरों, पक्षियों और बेजुबान जानवरों की सुरक्षा, 7) गरीब नौजवानों की शादी, 8) दुखी और निराश लोगों को सब्र, 9) नंगे लोगों को कपड़े, 10) बेरोज़गारों को रोज़गार।
इन दस सिद्धांतों में उनके दिल की दया और चाहत साफ़ दिखती है। उन्होंने धर्मशालाएँ, हॉस्टल, अनाथालय और अस्पताल बनवाकर शिक्षा और समाज कल्याण की नींव मज़बूत की।
शिक्षा से प्यार और समाज सेवा का वादा :
उन्होंने कहा कि गरीबों को खुद एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन बनाने चाहिए। उन्होंने कई हॉस्टल चलाए; स्टूडेंट्स की मदद की। महात्मा गांधी की हत्या के बाद, जब बालासाहेब खेर और मोरारजी देसाई ने कर्मवीर भाऊराव पाटिल के एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन को मिलने वाली ग्रांट रोक दी, तो गाडगे बाबा ने दखल देकर ग्रांट फिर से शुरू करवाई। यह घटना उनके समाज सेवा के वादे और असरदार लीडरशिप का सबूत है।
खुद को शुद्ध करने का सफ़र :
घर छोड़कर उन्होंने आलस, ज़बान का लालच और वासना जैसी अपनी बुराइयों को दूर करने की कोशिश की। 'पहले खुद को डेवलप करो ताकि इंसान में सच्चा इंसान ढूंढ सको', यही उनका नैतिक कोड था। उन्होंने साइंटिफिक नज़रिया रखकर समाज को सोच की दिशा दी।
आज की प्रेरणा :
आज उनकी 150वीं जयंती के मौके पर पूरे राज्य में उनकी याद में जश्न मनाया जा रहा है। लेकिन सिर्फ़ जश्न मनाना नहीं, बल्कि उनके विचारों पर अमल करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। गाडगे बाबा ने दिखाया कि समाज इन चार पिलर - सफ़ाई, शिक्षा, बराबरी और सेवा पर खड़ा होकर ही तरक्की कर सकता है।
उनका जीवन त्याग की मिसाल है; उनके कीर्तन जागरूकता का नारा हैं; और उनके काम इंसानियत की सच्ची खोज हैं। 150 साल बाद भी, उनकी झाड़ू की आवाज़, उनके बालों की आवाज़ और उनकी करुणा का स्पर्श समाज के मन में गूंजता रहेगा- क्योंकि गाडगे बाबा एक नाम नहीं बल्कि एक विचार, एक आंदोलन और एक प्रेरणा हैं जो आज भी हर उस हाथ में ज़िंदा है जो इंसानियत की सेवा करने की कोशिश करता है।
- दिवाकर मोहोड़
शिवाजी कॉलोनी, हुडकेश्वर रोड, नागपुर
