प्रकाश हेडाऊ को विद्यावाचस्पती - मानद उपाधी से किया सम्मानित
https://www.zeromilepress.com/2026/02/blog-post_55.html
नागपुर : अस्तित्व फॉउंडेशन के संस्थापक प्रकाश सुमित्रा मोतीराम हेडाऊ जी को उनके सामाजिक और शैक्षणिक कार्य एवं उनमे संशोधन कार्यो के अतुलनीय योगदान के लिये विद्यावाचस्पती (मानद पीएचडी) उपाधी प्रदान की गई। यह उपाधी प्रकाश जी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ मथुरा उत्तर प्रदेश की ओरसे नई दिल्ली स्थित होटल रेडिसन ब्लू के स्वागत सभागार मे आयोजित एक भव्य कार्यक्रम राष्ट्रीय हिंदी संगोष्टी और उपाधी वितरण सम्मान समारोह के दौरान दि गई।
गीता मे भगवान श्री कृष्ण ने कहा हैं ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ (अध्याय 2, 47) मनुष्य को फल की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देते हैं। अर्थात बिना किसी स्वार्थ के आप अपना कार्य पुरे मन से निरंतर करते रहे उसका परिणाम हमेशा अच्छा ही होगा, यह उपाधी किसी एक दिन की नहीं उनके सालो की निःस्वार्थ सेवा एवं मेहनत का परिणाम हैं। विद्यापीठ के प्रबंधन कार्य समिती द्वारा उनके कार्य को देखते हुये पूर्व में प्रकाश हेडाऊ का चयन किया जा चुका था| मुख्य अतिथी के रूप मे अपनी गरिमामय उपस्थिती से समारोह के कार्यक्रम में चार चांद लगाने का काम राष्ट्रीय आंतरराष्ट्रीय ख्याती प्राप्त पद्मश्री डॉ अरविंद कुमार पूर्व कुलपती राणी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषी विद्यालय झाँसी ने किया।
समारोह के मुख्य वक्ता के रूप में डॉ ऋतू दुबे तिवारी शिक्षाविध एवं वरिष्ठ साहित्यकार की उपस्थिती भी उपाधी वितरण कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया। समारोह की अध्यक्षता जानेमाने विद्वान डॉ इंदुभूषण मिश्रा कुलपती पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ ने किया।
इस कार्यक्रम में डॉ एस प्रकाश, डॉ शिवाजी शिंदे, डॉ कुलवंत सिंग सलूजा, प्रबल प्रताप के अतिरिक्त पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ के पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किये गये आग्रह के अनुसार समस्त संस्थाओको पूर्व में प्रचलित पाशच्यात्य संस्कृती के गाउन एवं कॅप के स्थान पर भारतीय संस्कृती को अपनाने के लिये भारतीय परिधान में अभ्यार्थियोको मानद उपाधी प्रदान की गई।
प्रकाश हेडाऊ पिछले पच्चीस तीस वर्ष से किसी ना किसी प्रकार से लोगो की सेवा करते आ रहे है, पंधर:ह वर्ष पुर्व उन्होने अपने कार्य से और लोगो को जोडने के उद्देश्य से अस्तित्व फाऊंडेशन नामक संस्था की स्थापना की। जिसके माध्यम से निरंतर समाज हित के कार्य आज भी शुरू है। शेकडो बच्चों को संस्कारक्षम एवं उनके व्यक्तीमत्व विकास के लिये कार्य जारी है। हर वर्ष शेकडो गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा सामुग्री की मदत करना, इसके अलावा अंधश्रद्धा एवं कुप्रथाओंके बारे मे जागृत करना, अग्नि सुरक्षा, रस्ता सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, प्रेरणा दायक उद्देश्य आदी विषयोंपर स्कुली बच्चों को शिक्षित करणे का कार्य स्वयं कर रहे है। अपने प्रयास से बच्चों को शिक्षा के लिये प्रेरीत कर उन्हे आवश्यक मदत भी दे रहे है। साथ हि साथ समाज को रोगमुक्त बनाने हेतू निरंतर चिकीत्सा जांच एवं रक्तदान शिबीर का आयोजन करते है, स्वयं आज तक 35 से ज्यादा बार रक्तदान कर चुके है। कोरोना काल मे उनका समाज के प्रती योगदान सराहणीय रहा, उन्हे कई संगठनो द्वारा सन्मानित भी किया गया।
उनके सेवा कार्य को ध्यान मे रखते हुये पहले भी महाराष्ट्र शासन द्वारा विश्वकर्मा पुरस्कार से महामहीम राज्यपाल के करकमलो द्वारा सन्मानित किया गया हैं, साथ ही देश की विविध संघटनाओ ने उन्हे छत्रपती शिवाजी महाराज राष्ट्रीय गौरव, समाजसेवा रत्न, समाजरत्न, भारतभूषण सन्मान, सुपर हिरो, विवेकानंद राष्ट्रीय पुरस्कार, सहकार रत्न आदी विविध पुरस्कारोसे अलंक्रित कर सन्मानित किया हैं।
यह पुरस्कार भारत के शिक्षा, चिकीत्सा, क्रिडा, साहित्य, समाजसेवा जैसी अलग अलग क्षेत्र मे अपना उत्कृष्ट योगदान एवं संशोधन देनेवाले चुनिंदा विभुतीयो को सन्मानचिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस मानद उपाधी के लिये उन्होने पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ की आयोजन समिती एवं अपने परिवार के सदस्य और सभी मित्रो का धन्यवाद व्यक्त किया।
