स्वर साधना ग्रुप का आयोजन भक्ति गीतों पर झूमे संगीतप्रेमी
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नागपुर। स्वर साधना ग्रुप की ओर से भक्ती संगीत और मधुर फिल्मी गीतो के कार्यक्रम का आयोजन अमृत भवन में किया गया। इसकी संकल्पना भोजराज तायडे की थी। काव्य संध्या के लिये प्रसिद्ध कवी हृदय चक्रधर, विकास गजापुरे एवं नवोदित कवी प्रमुखता से उपस्थित थे। संचालन हृदय चक्रधर ने किया। विकास गजापुरे ने रिटायर्ड लोग कितने महत्वपूर्ण होते है, इसके बारे मे काव्य व्यंग के माध्यम से महत्व समझाते हुये अपनी एक कविता मराठी मे प्रस्तुत की ।
" मावळतीच्या क्षितिजावरती इंद्रधनुचे रंग भरू वार्धक्याच्या उरल्या सुरल्या दिवसांनाही धुंद करू"। हृदय चक्रधर ने एक मराठी गजल महंगाई पर सुनाई।
"कांदे महाग झाले म्हणून वांदे करू नये, इसका रसिको ने अच्छा आस्वाद लिया । संगीत रजनी की शुरुआत ‘अच्चुतम केशवम कृष्ण नारायणम’ इस धार्मिक प्रार्थना गीत से हुई। इसमे दर्शक झूम उठे । सूत्र संचालन परेश भेले ने किया। " हम तुम्हे चाहते है एसे,भोले ओ.. भोले, हमे इश्क है तुमसे, सजणी ग भुललो मी, क्या हुआ तेरा वादा, जब छाये मेरा जादू, दिन सारा गुजारा तोरे अंगणा, जन्मावर या जगण्यावर शतदा प्रेम करावे जैसे गीतो ने महफ़िल में समा बांध दिया।
नंदिनी शिंदे, माया कांबळे, सरिता चांदवल , अरुणा कुंडे, मधुकर गुंडलवार, अश्वजीत भगत, तेअंकुश मानकर, दिपक कडू, वैशाली तळवेकर, गजानन भोयर, बाबुराव पवार, श्रीधर मानकर, नीलिमा बागडे, करुणा राऊत, स्वाती बाकडे, मदनसिंग, जया माटे, प्रमोद माटे, करुणा धनविजय ने हिंदी और मराठी फिल्मी गीत प्रस्तुत कर उपस्थित रसिकों को मंत्रमुग्ध किया । वरिष्ठ श्रोता 80 वर्षीय शारदा जाधव इनका स्वर साधना ग्रुप की ओर से सत्कार किया गया
उन्होने अपने सत्कार मे ‘रुक जा रात तू ठहर जारे चंदा’ यह गाना गाकर सबको आश्चर्य मे डाल दिया। उन्होंने मस्ती जिंदा है , तो हस्ती है नही तो सब व्यर्थ है यह संदेश दिया। अंत मे सब कलाकारो ने मिलकर "हे माझ्या भोळ्या शंकरा, आवड तुला बेलाची बेलाचे पानाची " यह शिवजी का प्रार्थना गीत गाकर कार्यक्रम को विराम दिया। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक मधुकर गुंडलवार ने यह जानकारी दी।