ज्ञानेंद्रियाँ को होने वाली अनुभूति के स्पर्श से कविता स्फुरित और खिलती है : आशा पांडे
स्मिता जोशी जोहरे लिखित ‘स्पर्श कवितेचा’ काव्य संग्रह का भव्य प्रकाशन
नागपुर। प्रत्येक ज्ञानेंद्रिय का कार्य स्पष्ट करते हुए, जब ज्ञानेंद्रियों को होने वाली अनुभूति हमें स्पर्श कर जाती है, तब तन- मन जीवंत हो उठते हैं और कविता संचारित होती है, स्वयमेव स्फुरित-फूलती है, तब वह कृत्रिम नहीं होती। कविता ज्ञानेंद्रियाँ और कर्मेंद्रियाँ को अधिक परिपक्व बनाती है, ऐसा वरिष्ठ कवयित्री, ग़ज़लकार एवं साहित्य विहार अध्यक्ष आशा पांडे ने कहा।
शनिवार, 21 मार्च 2026 की शाम नवदृष्टि सभागृह में स्मिता जोशी जोहरे लिखित और ‘स्वयं प्रकाशन’ द्वारा प्रकाशित वृत्तबद्ध काव्यसंग्रह ‘स्पर्श कवितेचा’ के प्रकाशन के अवसर पर वह अध्यक्ष पद से बोल रही थीं। वृत्त एक वृत्ति होती है और प्रत्येक वृत्त की अलग वृत्ति का अध्ययन करने से वृत्त अधिक समृद्ध और प्रभावी होते हैं। स्मिता जोशी की वृत्तबद्ध रचनाएँ अनुभव और अनुभूति पर आधारित सुदृढ़, सरस और प्रवाही हैं, ऐसा उन्होंने संग्रह पर गहन टिप्पणी करते हुए कहा।
जयश्री अंबासकर ने संग्रह के कई वृत्तों का उल्लेख कर कविताएँ सुनाईं और रसग्रहण किया।
कवयित्री स्मिता जोशी जोहरे ने अपना मनोगत प्रस्तुत किया।
युवाओं के बीच लोकप्रिय अस्मी बैंड के रचनात्मक संगीतकार व मधुर गायक सुबोध साठे ने संग्रह की एक ग़ज़ल को अपनी धुन में गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम के आरंभ में राधा जोशी ने सुरमय मंगल स्तवन गाया। कार्यक्रम का संचालन तुषार जोशी ने किया, आभार प्रदर्शन सीमा जोशी ने किया।
कार्यक्रम में मनीषा अतुल, धर्मेश पराते, वर्षा थोटे, गौरी शास्त्री देशपांडे, काव्य-रसिक और परिजन उपस्थित थे, जिनमें देवयानी संदीप जोशी, राजेन्द्र हाईस्कूल की शिक्षिकाएँ और लेखक- लेखिकाएँ शामिल थीं।