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जनसेवा का दीपस्तंभ : दत्ता मेघे को कृतज्ञ अभिवादन



महाराष्ट्र की धरती पर अनेक महान व्यक्तित्वों ने अपने कार्य की अमिट छाप छोड़ी है; उनमें दत्ता मेघे का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। 11 नवंबर 1936 को वर्धा जिले के पवनार में जन्मे दत्ता राघोजी मेघे ने साधारण पृष्ठभूमि से आगे बढ़ते हुए राजनीति, शिक्षा और समाजसेवा- इन तीनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। चार बार सांसद के रूप में उन्होंने नागपुर, रामटेक और वर्धा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया, साथ ही राज्यसभा सदस्य और महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियाँ निभाईं। कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी जैसे विभिन्न दलों में कार्य करते हुए उन्होंने जनता से गहरा संबंध बनाए रखा और विकासोन्मुख राजनीति का आदर्श प्रस्तुत किया।

राजनीति के साथ- साथ शिक्षा क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत प्रभावशाली रहा। ‘नागर युवक शिक्षण संस्था’ और Datta Meghe Institute of Medical Sciences के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के द्वार खोले। चिकित्सा, अभियांत्रिकी तथा अन्य उच्च शिक्षा के अनेक संस्थानों की स्थापना कर उन्होंने विदर्भ क्षेत्र में ज्ञान का दीप प्रज्वलित किया। उनके प्रयासों से हजारों विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला और अनेक परिवारों का भविष्य उज्ज्वल हुआ। “शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम है' - इस विश्वास को उन्होंने अपने जीवनकार्य से सिद्ध किया।

‘दाता भाऊ’ के नाम से विख्यात दत्ता मेघे वास्तव में दानशीलता और जनसेवा के प्रतीक थे। जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता, गरीब परिवारों को संबल और विविध सामाजिक कार्यों के माध्यम से उन्होंने समाज में मानवता की एक अलग पहचान स्थापित की। उनके द्वार पर आने वाला कोई भी व्यक्ति कभी निराश होकर नहीं लौटा। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें ‘जीवन साधना’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

आज वे हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनके कार्यों का प्रकाश समय की सीमाओं को पार कर सदैव आलोकित करता रहेगा। उनके द्वारा स्थापित संस्थाएँ, उनकी मानवीय संवेदनाएँ और शिक्षा के प्रति उनकी निष्ठा ही उनका सच्चा स्मारक हैं। समाज के लिए निरंतर समर्पित इस महान व्यक्तित्व को शब्दों में व्यक्त करना कठिन है- उनकी स्मृति ही प्रेरणा है और उनका कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए पथप्रदर्शक बना रहेगा।


- दिवाकर मोहोड

   शिवाजी कॉलोनी, हुडकेश्वर रोड, नागपुर

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