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महिला दिवस : शिक्षा, संस्कार और समृद्ध पीढ़ी का संकल्प


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते समय 'स्त्री' शक्ति और उसके सामर्थ्य का गौरव करना समय की मांग है। एक महिला होने के नाते मुझे यह दृढ़ता से महसूस होता है कि शिक्षा हमारे पास सबसे बड़ी ताकत है। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं देती, बल्कि यह आत्मविश्वास जगाती है, सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है और अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़े होने का बल देती है। आज भी समाज में कई जगहों पर लड़कियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता है या सपने पूरे होने से पहले ही उनकी राहें रोक दी जाती हैं; इस स्थिति को बदलना अत्यंत आवश्यक है। 

जब एक स्त्री शिक्षित होती है, तो वह न केवल अपना जीवन संवारती है, बल्कि वह पूरे परिवार और परिणामस्वरुप समाज के भविष्य को उज्ज्वल बनाती है। शिक्षा से महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं और वर्षों से चली आ रही दकियानूसी रूढ़ियों और परंपराओं की बेड़ियों को तोड़ने की हिम्मत उनमें पैदा होती है। महिला सशक्तिकरण की सच्ची शुरुआत लड़कियों को समान अवसर और सम्मान देने से होती है। हर लड़की को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अधिकार है, और परिवार व समाज को इस यात्रा में उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।

सशक्तिकरण की इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान देना आज बहुत जरूरी हो गया है, वह है—हमारे बच्चों का पालन-पोषण और उनकी शिक्षा। एक बच्चे के जीवन में माँ पहली गुरु होती है। जिस तरह हम बच्चों के खान-पान की पसंद-नापसंद का ख्याल रखते हैं, ठीक उसी तरह उनकी पढ़ाई में उन्हें क्या समझ आ रहा है, उनका झुकाव किस विषय की ओर है और वे किस क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं, इसका माँ के रूप में गहन अध्ययन करना आवश्यक है। 

यह जिम्मेदारी माँ के अलावा कोई दूसरा व्यक्ति इतनी प्रभावशीलता से नहीं निभा सकता। आज का युग मोबाइल और इंटरनेट का है, लेकिन इस आभासी दुनिया में खो जाने के बजाय माता-पिता, विशेषकर माताओं को मोबाइल थोड़ा अलग रखकर बच्चों पर सीधा ध्यान देना चाहिए। बच्चों को मैदानी खेलों के प्रति जागरूक करना, उन्हें मैदान पर भेजना और उनका रोज़ का होमवर्क नियमित रूप से करवाना एक समृद्ध पीढ़ी तैयार करने की पूर्व तैयारी है। स्कूल में आज क्या पढ़ाया गया, बच्चे को उसमें रुचि आई या नहीं, इन छोटी-छोटी बातों की रोज़ाना पूछताछ करने से बच्चों की नींव मजबूत होती है।

आज के आधुनिक दौर में महिला स्वतंत्रता पर बड़े पैमाने पर विचार होता है, लेकिन इस स्वतंत्रता का आनंद लेते समय घर और परिवार की अनदेखी न हो, इसका ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पारिवारिक जिम्मेदारियां और बच्चों के संस्कार हमारी सामाजिक पूंजी (Investment) हैं। यदि हर महिला अपने बच्चों के विकास और शिक्षा में पहल करे, तो कल के समृद्ध भारत के निर्माण में महिलाओं की वास्तव में मुख्य भूमिका होगी। एक सक्षम स्त्री न केवल खुद को सिद्ध करती है, बल्कि वह एक जागरूक और सुसंस्कृत पीढ़ी को जन्म देकर समाज को नई दिशा देती है। इस महिला दिवस पर हम केवल शुभकामनाएं न देकर, महिलाओं को उचित शिक्षा, सम्मान और अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए समय देने का संकल्प लें।

- सौ. अरुणा महेश बंग
   उपाध्यक्षा : श्री संत गमाजी महाराज शिक्षण संस्था, हिंगणा, नागपुर
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