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मांइड और बॉडी के कॉन्बिनेशन से बच्चे रियल इंसान बनते है : डॉ. तक्षशिला ताकसांडे


उभरते सितारे मे 'नव चैतन्य'

नागपुर। आज हिंदी नव वर्ष का पहला दिन है। पहले दिन में ही नव चैतन्य की ऊर्जा को बच्चों में बढ़ाने में बड़ों का ज्यादा सहभाग होता है। बच्चों का डेवलपमेंट सोशली, मेंटली, फिजिकली, बिहेवियर ओर इमोशनली होना चाहिए। आज बच्चे बड़े तो हो रहे हैं पर उनमें फिजिकल डिफिशिएंसी देखने में आ रही है। घर के खाने से ही उनमें कैल्शियम और आयरन की कमी पूरी होना चाहिए। उसके लिए पैरंट्स ने ध्यान देना जरूरी है। सोशली बात करें तो अभी न्यूक्लियर फैमिली का पैटर्न आ गया है। घर क्यों होना चाहिए, कोई भी घर सजावट की वस्तु नहीं है। उसमें मन को सुकून मिले। 


आप अपनी संस्कृति मर्यादा के साथ रह सकें, जहां आप खुले तौर पर बात कर पाए, अपनी भावनाओं को एक्सप्रेस कर पाए वह घर होता है। जहां सबके साथ हम खुश रह सके। बच्चे जब छोटे होते हैं तो उसे समय उन्हें अपना कल्चर सिखाएं। बनावटी पन से नहीं जीना है, जैसे हैं वैसे ही बने रहे‌। सामने वाले इंसान से इंसान की तरह व्यवहार होना चाहिए। कल्चरल बैरियर नहीं होना चाहिए। बच्चों में मांइड और बॉडी का कॉन्बिनेशन आता है तो वह रियल इंसान बन जाता है। यह विचार डॉ. तक्षशिला ताकसांडे ने बच्चों और उनके अभिभावकों को के बीच रखा।


विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन का नवोदित प्रतिभाओं को समर्पित उपक्रम 'उभरते सितारे' का आयोजन हिंदी मोर भवन के उत्कर्ष हॉल में किया गया। कार्यक्रम का विषय 'नव चैतन्य' पर आधारित शिक्षाप्रद, ज्ञानवर्धक और संगीतमय प्रस्तुतियों से भरा रहा। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप मे यूनिसेफ और डब्ल्यू एच ओ से संलग्न सुप्रसिद्ध एमडी डॉक्टर तक्षशिला ताकसांडे उपस्थित थीं। इनका सम्मान संयोजक युवराज चौधरी और सहसंयोजिका वैशाली मदारे ने स्वागत वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर किया।


तत्पश्चात, सभी बच्चों ने नव चैतन्य विषय पर अपने सुंदर विचार रखते हुए शानदार नृत्य और गीतों की प्रस्तुति दी। जिसमें, आदित मिंज, मृणाल तेलराधे, निर्भय लाकुड़कर, सागर नंदपुरकर, स्वरा भूतड़ा, आराध्या पुरी और दोर्फी जनबंधु ने बढ़िया गीत सुनाए। वाद्यौयंत्र के अंतर्गत मृणाल तेलरांधे ने सुंदर हारमोनियम वादन किया। संपूर्णा रेमंडल के नृत्य ने सबको सम्मोहित किया।

बच्चों की प्रस्तुतियों को उनके अभिभावकों के साथ-साथ  मोनिका रेमंडल, प्रो. डाॅ. शालिनी तेलराधे, डॉ रोमन जनबंधु, डॉ. प्रकाश ऊके, अरुण खोब्रागड़े, माधुरी जनबंधु, सरिता लाकुड़कर, धनंजय नंदपुरकर, मीनाक्षी केसरवानी, सुदेश मेंढे, संध्या नंदपुरकर, मयंक भूतड़ा, रीना मनोज पुरी, ज्योति खोब्रागड़े, जयंत जोशी, गीता सुरेश मिंज आदि ने बहुत सराहा। कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रशांत शंभरकर ने सहयोग दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन सहसंयोजिका वैशाली मदारे ने किया। तथा, उपस्थित सभी दर्शकों, कलाकारों और बच्चों का आभार संयोजक युवराज चौधरी ने अपने शब्दों में व्यक्त किया ।
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