प्रारंभिक जीवन में पोषण, वृद्धि एवं विकास पर राज्य स्तरीय परामर्श बैठक संपन्न
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From Lt to Right Dr Menon, Raji Nair, Dr Phadke, Dr Saple,Dr Neelam Mohan, Dr Irani, Dr Uday Bodhankar and Dr Patil
वैज्ञानिक एवं कार्यक्रमात्मक दृष्टिकोण
नागपुर/मुंबई। महाराष्ट्र घोषणा पत्र में प्रारंभिक जीवन में पोषण, वृद्धि एवं विकास विषय पर राज्य स्तरीय परामर्श बैठक सफलतापूर्वक आयोजित की गई। यह कार्यक्रम महाराष्ट्र शासन के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, DMER, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP), COMHAD तथा UNICEF के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. नीलम मोहन, राष्ट्रीय अध्यक्ष, IAP द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. सिमिन ईरानी, प्रो. मृदुला फडके, डॉ. पल्लवी सापले (संयुक्त DMER), डॉ. उदय बोधनकर (कार्यकारी निदेशक, COMHAD), डॉ. यशवंत पाटिल (MMC पर्यवेक्षक) तथा सुश्री राजलक्ष्मी नायर (UNICEF) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस बैठक में विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने बाल पोषण, वृद्धि और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया, जिसके परिणामस्वरूप 'महाराष्ट्र घोषणा पत्र' एवं 10 बिंदुओं का कार्य-एजेंडा प्रस्तुत किया गया।
10 बिंदुओं का कार्य-एजेंडा -
1. पहले और अगले 1000 दिनों का समावेश : बाल स्वास्थ्य नीतियों में 'पहले 1000 दिन' तथा 'अगले 1000 दिन' को शामिल करते हुए 2 - 5 वर्ष की आयु को प्राथमिकता दी जाए।
2. प्री- स्कूल पोषण कार्यक्रमों को सुदृढ़ करना : कुपोषण, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी तथा बाल मोटापे को रोकने हेतु संतुलित आहार एवं आहार विविधता को बढ़ावा देना।
3. प्रारंभिक बाल विकास एवं स्कूल तैयारी सुनिश्चित करना : खेल- आधारित शिक्षण, प्रारंभिक प्रोत्साहन, भाषा विकास एवं प्री-स्कूल शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
4. स्वस्थ जीवनशैली एवं शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देना : 2 - 5 वर्ष के बच्चों में दैनिक शारीरिक गतिविधि, बाहरी खेल, पर्याप्त नींद एवं कम निष्क्रियता को प्रोत्साहित करना।
5. अत्यधिक स्क्रीन उपयोग पर नियंत्रण : छोटे बच्चों में स्क्रीन उपयोग के लिए दिशा-निर्देश विकसित कर अभिभावकों में डिजिटल जागरूकता बढ़ाना।
6. वृद्धि एवं विकास निगरानी को मजबूत करना : आंगनवाड़ी केंद्रों, बाल रोग विशेषज्ञों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से नियमित निगरानी सुनिश्चित करना।
7. शीघ्र पहचान एवं हस्तक्षेप : विकास में विलंब, ऑटिज़्म, भाषण विकार एवं व्यवहार संबंधी समस्याओं की प्रारंभिक पहचान एवं उपचार व्यवस्था सुदृढ़ करना।
8. अभिभावकों एवं देखभालकर्ताओं को सशक्त बनाना : पोषण, संवेदनशील देखभाल, प्रारंभिक शिक्षा एवं स्वस्थ जीवनशैली पर मार्गदर्शन प्रदान करना।
9. किशोरियों के पोषण में सुधार : एनीमिया नियंत्रण, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा को प्राथमिकता देकर स्वस्थ मातृत्व सुनिश्चित करना।
10. बहु-क्षेत्रीय समन्वय को सुदृढ़ करना : स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास विभागों तथा सामाजिक संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाना।
समापन वक्तव्य : अगले 1000 दिनों में निवेश” समाज के भविष्य - बुद्धिमत्ता, उत्पादकता एवं समग्र कल्याण में निवेश है। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि प्रत्येक बालक न केवल जीवित रहे, बल्कि समुचित विकास करते हुए अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुंचे।
