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वामा अन्तरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव नागपुर का स्त्री सशक्तिकरण की मिसाल : पद्मश्री जनक एवं शमशाद


नागपुर। साहित्यिक संस्था वामा विमर्श मंच ने अपने एक अभिनव आयोजन में देश विदेश से सशक्त महिलाओं एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकारों को आमंत्रित किया और रचा महिला महोत्सव का नया इतिहास। महोत्सव में कविता कहानी के साथ हमने बात की स्त्री विमर्श की , स्त्री सशक्तिकरण की । देश की दो सशक्त स्त्रियाँ जब मंच पर सादगी और उत्साह से अपने कार्य बताती रहीं तो हाॅल करतल ध्वनियों से गूंज उठा। ये थीं पर्यावरण हित में बरसों की साधना करने वाली पद्मश्री  डाॅ.जनक पलटा मगिलिगन और महिला कमांडों को प्रशिक्षित कर गांव सुधार करने वाली शमशाद बेगम। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री  डाॅ. कीर्ति काले ने जब सुर छेड़े तो ताल पर ताल मिलाते लोग गुनगुनाने लगे - ये है कांफिडेंट लड़कियाँ, ये है कांफिडेंट, नज़रों में चिंगारी इनके, बातों में हैं सैंट।


सभागार में उपस्थित स्त्रियाँ सचमुच आत्मविश्वास से भर उठीं। ये थी कविता की ताकत और कीर्ति की आवाज़ का जादू। इस उत्साह में मिठास भरी नीतू गुजराल की पंजाबी कविता ने। सिंगापुर से हमारे निवेदन पर नागपुर पधारी नीतू गुजराल की कविता ने सबका बचपन लौटा दिया।
याद औंदिया बहोत ने मेरियाँ बचपण दीयां सहेलियाँ, गलवखरियाँ पौंदियाँ गीटे खेडदियाँ, स्टापू दियाँ लिकां वौंदियां, झिड़काँ मेरे मापियाँ तो आपने मापियाँ वाँगर खाँदियाँ, याद औंदियाँ बहूत ने मेरियाँ बचपन दीयाँ सहेलियाँ।


पंजाब की मिठास ने मानो कान में मिश्री घोल दी हो, ऐसी दो मीठी कवयित्रियों को पाकर सभा मंत्रमुग्ध थी। 
कार्यक्रम अध्यक्ष सीए श्वेताली ठाकरे ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी और बैकिंग व सिप प्लान समझाये। हमारे संरक्षक और मार्गदर्शक किशन शर्मा मंच पर विराजित थे। बरगद सी छांव मिली और मिला अपने बड़ों का आशीर्वाद। संचालन की बागडोर को बेहद कुशलता से साध रहीं थीं वी.एम.वी. महाविद्यालय की हिंदी विभागाध्यक्ष डाॅ. आभा सिंह। 


आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और आभा आसुदानी के सुरीले कंठ से निकली देवी माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। वामा विमर्श मंच की अध्यक्ष रीमा दीवान चड्ढा ने आयोजन की संकल्पना और अपनी संस्था का संक्षिप्त परिचय दिया। उन्होंने बताया कि वे सौन्दर्य से शक्ति की ओर बढ़ती महिलाओं को  कलम की साधना के साथ और सशक्त करना चाहतीं हैं इस हेतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को एकजुट करने का प्रयास संस्था के माध्यम से कर रही हैं।


अगले चरण में अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली वामा सखियों को वामा सम्मान से विभूषित किया गया। जिनमें अश्वनी बेंडे, डाॅ.अल्पना त्रिवेदी गिरि , ख़ुदेजा खान, डाॅ.रीभा चावला, आत्मिका कपूर ठक्कर , किरण कैलासवार  अर्चना सिंह सोनी , प्रभा ललित सिंह , निधि नितिन तेलगोटे, डाॅ.मीनल नागपुरे, डाॅ. सायली संजीव सारडे तथा रीमा दीवान चड्ढा को स्मृति चिन्ह, शाल व 2100 ₹ की धनराशि दी गयी।  अलग अलग क्षेत्रों में सभी का उत्कृष्ट योगदान है। 
25 वर्षों तक महिला क्लब द्वारा उल्लेखनीय सामाजिक कार्य करने वाली संस्था अध्यक्ष श्रीमती विलासिनी नायर तथा समाज सेवी श्रीमती वृंदा ठाकरे को भी सम्मानित किया गया।  

इस अवसर पर सृजन बिंब प्रकाशन से प्रकाशित एक दर्जन पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ। इस सत्र के अध्यक्ष थे CA तेजिंदर सिंह रावल जो विभिन्न भाषाओं के ज्ञाता, कई महत्वपूर्ण पुस्तकों के लेखक व नागपुर बुक क्लब के अध्यक्ष हैं। सारस्वत अतिथियों में CA हेमंत लोढ़ा जी जिनकी अध्यात्म, संस्कृति, संस्कार के साथ देश की महत्वपूर्ण कृतियों एवं  विषयों यथा भगवद् गीता व अष्टावक्र गीता के दोहे रूप में किताब आ चुकी है। विशिष्ट अतिथि थे नागपुर के हास्य व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर नीरज व्यास जिनकी ख्याति देश भर में है। इन वरिष्ठ साहित्यकारों ने पुस्तकें लोकार्पित की जिनमें नीलिमा करैया की अंतत:, राजेश नामदेव की राम नाम की लूट, डाॅ.ज्योति गजभिए की सबसे कीमती फ्री है, श्याम सुंदर चौहान की स्मृतियों के नील गगन, कुंवर इन्द्रजीत सिंह की पुष्पांजलि, 

रीमा दीवान चड्ढा की सृजन के शिखर, माॅली कार की Memories and Quotes, मधु सिंघी की मधु बिंब, शगुफ़्ता यास्मीन की परिचय से अपरिचय तक, चर्चित कवि त्रिलोक महावर की नदी के लिए सोचो काव्य संग्रह के दो अनुवाद लोकार्पित हुये। पंजाबी अनुवाद ਨਦੀ ਲਈ ਸੋਚੋ (नदी लई सोचो) सिंगापुर की कवयित्री नीतू गुजराल ने गुरुमुखी में किया तो अंग्रेज़ी अनुवाद Think about the river दिल्ली के लेखक गिरीश मेहता ने किया। CA श्वेताली ठाकरे की किताब How India Will  surpass $30 trillion Economy भी यहाँ लोकार्पित की गयी। 

'स्त्री विमर्श कितना किताबी कितना ज़मीनी' इस विषय पर वक्ताओं ने अपने उत्कृष्ट विचार मंच पर प्रस्तुत किये। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. गोविंद प्रसाद उपाध्याय ने की जो पावन परंपरा पत्रिका के संपादक हैं। वक्ताओं में साहित्यकार प्रभा ललित सिंह, मालवा इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस व मैनेजमेंट इंदौर की प्राचार्या डाॅ. संगीता सिंघानिया भारूका भोपाल के कला पत्रकार और साहित्यकार दीपक पगारे, इवनिंग टाइम्स, बिलासपुर के संपादक नथमल शर्मा तथा लखनऊ से पधारीं विदुषी रिंकु मणिकर्णिका मंचासीन थे। इस सत्र का सफलतापूर्वक संचालन प्रो. डॉ. शुचिस्मिता मिश्रा ने किया जो वी.एम.वी महाविद्यालय नागपुर की इतिहास विभाग प्रमुख हैं। 

गद्य साहित्य के सत्र की अध्यक्षता जहाँ पी. डब्लयू. एस. के पूर्व विभागाध्यक्ष डाॅ. मिथिलेश अवस्थी ने संभाली और सत्र को समेटते हुये अपना आत्मीय वक्तव्य दिया। वहीं सारस्वत अतिथि थे वरिष्ठ साहित्यकार जयशंकर जी जिन्होंने एक कहानी के माध्यम से बहुत गहरी सीख दी। नीलिमा करैया ने गद्य विधा पर बात की। अनीता दुबे ने प्रस्तर शिल्प पर प्रकाश डाला तो डाॅ. मीनाक्षी देब ने स्त्री स्वास्थ्य पर बात की, दीपाली देवकर ने अपनी लेखन यात्रा के बारे में बताया, वास्तुकला पर आर्किटेक्ट रौशनी अड़सोड़ ने बात की। संचालन आरती सिंह एकता ने किया। लघुकथा सत्र में वंदना सहाय, डाॅ.अल्पना आर्य, करमजीत कौर, शगुफ़्ता यास्मीन, तनवीर खान, वैशाली चरथल और पूर्णिमा विश्वकर्मा ने लघुकथा पढ़ी। संचालन कविता बिजौलिया ने किया।  

कविता सत्र के अध्यक्ष थे वरिष्ठ कवि व प्रशासनिक अधिकारी त्रिलोक महावर, मुख्य अतिथि रहीं डाॅ. कीर्ति काले। सारस्वत अतिथि पद्मश्री डाॅ. जनक पलटा मगिलिगन एवं विशिष्ट अतिथि नीतू गुजराल। काव्य पाठ किया ऋचा मांजरेकर, अर्चना अर्चन, मधु गुप्ता, डाॅ. ज्योतिमणि राॅक, चित्रा पुरी, अर्चना राज चौबे, प्रीति कटकवार, विद्या चौहान, डाॅ. मधुलता व्यास, सुधा राठौर, सुमति बिसेन, डाॅ. अल्पना आर्य, मीरा रायकवार, डाॅ. शीला भार्गव, सीमा राय मधुरिमा, सुनीता केसरवानी, सुमन अनेजा, मेघा ठाकुर, रामकुमारी करनाहके, पूर्णिमा सरोज आशा इलवाद्धी, रूपा चांडक और आशु मनदीप रात्रा। संचालन डाॅ. वसुंधरा राय और तनवीर खान ने किया। 

अंतिम सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुये। जिसमें नृत्य किया छवि चक्रवर्ती ने, गीत गाया आभा आसुदानी ने और पंजाबी टप्पे गाये नीलम पुन्यानी ने। स्वप्नपूर्ति कला केन्द्र की डाॅ. संगीता देशपांडे की छात्राओं आवृत्ति पांडे और पलक बोके ने कत्थक नृत्य प्रस्तुत किया। वामा सचिव नीलम शुक्ला की लिखी लघु नाटिका देश की महान विभूतियों को नमन में सखियों अलका पाटनकर, अवंती इंदुलकर, जिगिशा शाह, शारदा परांजपे, रेशम मदान, निरंजना गांधी, अनिता गायकवाड़, सरिता त्रिवेदी और सुषमा शर्मा ने अभिनय किया। संचालन और आभार माधुरी मिश्रा मधु ने किया। सुषमा अग्रवाल, ममता विश्वकर्मा और विशाखा खंडेलवाल ने मराठी वेशभूषा में स्वागत कर महाराष्ट्र की परंपरा को बनाये रखा। 

योगेश अनेजा, महेश तिवारी, अनिल त्रिपाठी, संदीप अग्रवाल, सूरज तेलंग, टीकाराम साहू, डाॅ. प्रेमलता तिवारी, मधु पटौदिया, डाॅ. मीनाक्षी सोनवणे, कविता सिंघल, शालिनी अरोरा, नीलिमा गुप्ता, स्मिता देशमुख, नमन अनेजा और छाया श्रीवास्तव प्रमुखता से उपस्थित थे। एक और आकर्षण रहा रिंकू घोष का बनाया वामा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव नागपुर 2026 का नाम लिए बना खूबसूरत केक जिसके स्वाद ने हर एक के मुँह में मिठास भर दी। 

प्रो. रेणुबाली, डाॅ. ज्योति गजभिए हमारी वामा विमर्श मंच की दो सशक्त महिलायें अपरिहार्य कारणों से सम्मिलित नहीं हो पायीं। स्वास्थ्य कारणों से प्रीति अज्ञात, अलका अग्रवाल सिग्तिया, विजया डालमिया तथा ख़ुदेजा खान पारिवारिक दुख के कारण व ज़ीनत एहसान कुरैशी, निवेदिता जेना व रेवा राॅय अपने प्रोफेशनल कारणों से नहीं आ पायीं। एक उजली सुबह नागपुर के इतिहास में एक पूरा दिन लिख गयी। साहित्य और शक्ति को समर्पित इस एक दिवसीय आयोजन को प्राणप्रण से आकार देने वाली वामा टीम साधुवाद की पात्र है
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