परंपरागत संस्कारों का पालन करना बहुत ज़रूरी है : कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर
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नागपुर। 'युवा पीढ़ी और विशेषत: विद्यार्थियों ने परंपरागत संस्कारों का बहुत ध्यान रखना चाहिए क्योंकि संस्कारों का पालन ही एक ऐसा माध्यम है जिससे समाज में संबंधों की गरिमा और सौहार्द को बनाए रखने में मदद मिल सकती है'। ये विचार थे रातुम नागपुर विश्वविद्यालय की कुलगुरु डॉ. मनाली क्षीरसागर के जो उन्होंने विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के लोकप्रिय कार्यक्रम 'संवाद' में साहित्यकार डॉ. सागर खादीवाला से खुलकर बातचीत करते हुए व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय गलाकाट प्रतिस्पर्धा, भाग- दौड़ और स्वयं को सुस्थापित करने के प्रयासों की पराकाष्ठा का युग है। एक समय था जब परीक्षा में 50- 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना भी गौरव और संतुष्टि की बात समझी जाती थी पर आज 95% अंक भी पर्याप्त नहीं माने जाते। शिक्षा प्रणाली में आए नए परिवर्तन ने कई प्रश्न चिन्ह खड़े कर दिए हैं। ट्यूशन और कोचिंग लगभग अनिवार्य सी हो गई है। मां- बाप हर कीमत पर अपने बच्चों को दूसरे की तुलना में ज़्यादा योग्य साबित करना चाहते हैं और इसके लिए वे बच्चों की क्षमता को ध्यान में न रखते हुए हर संभव प्रयास करते हैं।
विद्यार्थियों की पढ़ाई में शिक्षा संस्थानों व शिक्षकों की भूमिका, पालकों का सहभाग व शिक्षा प्रणाली की स्थिति का गहराई से विश्लेषण करते हुए उन्होंने सार्थक सुझाव भी प्रस्तुत किये। श्रोताओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों और जिज्ञासाओं का उन्होंने विस्तार से समाधान किया। कार्यक्रम में शिक्षा जगत के साथ-साथ विभिन्न वर्गों के श्रोतागण भी काफी संख्या में उपस्थित थे।

