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आयुर्वेद पर नागपुर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न


संभोदित करते हुए डॉ. मनीषा कोठेकर, मधुसूदन गुप्ता, दृष्टी शर्मा मुळक, मायाताई इंगळे, ज्योतिष, जयंत देवपुजारी, डॉ. मुकुंद दिवे, डॉ. रामाधर यादव, डॉ. मिलिंद सूर्यवंशी, युवराज काळेरमण बेलगे

कांफ्रेंस में छात्रों ने 600 रिसर्च पेपर जमा किए 

आयुर्वेद में 400 लोगों ने पेटेंट कराया 

नागपुर कविवर्य सुरेश भट सभागृह में आयोजित आयुर्वेद पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और एक्सपो भाऊसाहेब मुलक आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अनुसंधान अस्पताल, बुटीबोरी, आयुष मंत्रालय, नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन, महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज व नेशनल आयुर्वेद स्टूडेंट्स एंड यूथ एसोसिएशन और सहसंयोजक के. आर. पांडव आयुर्वेदिक कॉलेज के माध्यम से आयोजित किया गया था।प्रास्ताविक में भाऊसाहेब मुलक आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अनुसंधान अस्पताल, बुटीबोरी के प्राचार्य मधुसूदन गुप्ता ने सभी अतिथियों के सामने अपना मनोगत व्यक्त किया। सह आयोजक  नस्या के डॉ अभिजीत मुन्शी ने  नस्या का कार्य  साझा किया।

सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. मनीषा कोठेकर (अध्यक्ष -NCISM ,नई दिल्ली) के हातो  किया। अपने संबोधन मेें बताया कि कुंभ ज्ञान के जैसा ही आयुर्वेद में भी कुंभ ज्ञान है। यह एक वैचारिक कुंभ जैसा ही है। इसलिए लिए इस तरह की कांफ्रेंस वर्तमान में अधिक पैमाने में हो रही है। इस कांफ्रेंस के माध्यम से नया कुछ सीखने को मिलता है। यह सुनना,बारीकी से ध्यान देकर उसे आत्मसात करना जरूरी है। जिससे उसका जीवन में उपयोग होता है।उन्होंने छात्रों और प्रतिनिधियों को ऐसे आयोजनों में सक्रिय भागीदारी की प्रेरणा दी। सम्मानित अतिथियों में वैद्य प्रवीण जोशी ने विद्यार्थियों को आयुर्वेद में पंचकर्म के महत्व को समझाया। 

आयुर्वेद यह देश व दुनिया में स्वीकार्यता की राह पर है। जिसे दुनिया में आज लोहा मान लिया है।  
डॉ. उपेंद्र दीक्षित (पोंडा, गोवा) - ने आयुर्वेद में अतिक्षा उपचार के बारे में मार्गदर्शन िकया। आयुर्वेद में इलाज करते समय मरीजों को इसका लाभ तुरंत नहीं मिलना है, ऐसी धारणा बनी है। लेकिन डॉक्टरों ने भी जो मिला उसी के आधार इलाज शुरू कर देना चाहिए, जिससे कि मरीजों को लाभ तो मिलता ही है साथ ही इलाज के देरी की शिकायत भी दूर होने में मदद मिलती है।

वैद्य चंद्रकुमार देशमुख ने प्रात्यशिक की मदद से बताया कि विद्ध कर्म व अग्नि कर्म को  उपयोग में लाने के अधिकतर इमरजेंसी  पेशेंट को लेकर इस उपचार पद्धति का उपयोग किया जाता है। लेकिन इसके लिए इस विद्या की प्रैक्टिस करना बहुत ही जरूरी है! डॉ. रामाधर यादव - 'प्राचीन ज्ञान, आधुनिक परिवर्तन: नेपाल में क्षार सूत्र का उदय'। मुख्य बिंदु: नेपाल में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं का संगठन, क्षार सूत्र निर्माण-अभिनय-द्रव्यों का विवरण, गुदा-मलाशय रोगों में महत्व ब्यानर किया। 

वैद्य राज सतपुते - 'सीमाओं से परे आयुर्वेद'। मुख्य बिंदु: विदेशों में अभ्यास के कारण, विदेशी देशों में आयुर्वेद की संभावनाएं, विभिन्न प्रोटोकॉल एवं नियम। सभी सत्रों के बाद पॉडकास्ट सत्र भी लिए गए थे। जिसमे प्रख्यात वक्ताओं ने आयुर्वेद के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। उद्घाटन सत्र के अंत में डा़ वृंदा कडू ने आभार प्रदर्शन किया। 

इस अवसर पर उपस्थितों में वैद्य जयंत देवपुजारी ने छात्रो को उदबोधित किया तथा मिसेज दृष्टि शर्मा मुलक ने उद्घाटन समारोह को घोषित किया, वैद्य राम आधार यादव, डॉ. मिलिंद सूर्यवंशी, डॉ. माया ताई अग्ने, डॉ. युवराज काळे, डॉ. कविता खोंड, वैद्य रमन बेलगे ( MUHS Observer) और डॉ. मुकुंद दिवे, डॉ ज्योतिषी भी प्रमुख रूप से शामिल थे।

सम्मेलन में विश्व भर से 1400+ प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसमें प्रसिद्ध आयुर्वेदिक विद्वान, चिकित्सक, स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्र शामिल थे।कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण UG एवं PG छात्रों द्वारा 600+ शोध पत्र प्रस्तुतिकाएँ  प्रस्तुत कि गयी साथ ही  जिसमे मॉडल निर्माण प्रतियोगिता, पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता भी ले गई। कार्यक्रम स्थल पैर विभिन्न आयुर्वेदिक विपणन स्टॉल लगाए गए थे और स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया गया था।
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