ज्ञान परंपरा के लोकव्यापी स्वरूप में पत्रकारिता और जनसंपर्क की भूमिका महत्वपूर्ण : नितिन गडकरी
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नागपुर। भारतीय ज्ञान परंपरा आदिकाल से समाज में लोकहित और जन-जागृति पर केन्द्रित रही है। समाज की उन्नति और विकास के मूल में भारतीय ज्ञान परंपरा के सम-सामयिक सूत्र निहित रहे हैं। वेदों, उपनिषदों से लेकर आधुनिक विषयों के लोकव्यापी स्वरूप की स्थापना में पत्रकारिता और जनसंपर्क की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। यह विचार केन्द्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने अपने निवास पर आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में पावर आफ वन पत्रिका के संपादक नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव के द्वारा लिखित पुस्तक 'भारतीय ज्ञान परंपरा, पत्रकारिता और जनसंपर्क' के विमोचन अवसर पर व्यक्त किए।
केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी के करकमलों से संपन्न होने वाले इस विमोचन कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रायपुर के सुविख्यात लेखक एवं साहित्कार श्री गिरीश पंकज ने कहा कि मीडिया के माध्यम से सांस्कृतिक बोध का जनजागरण जरूरी है। इस पुस्तक के माध्यम से ज्ञान परंपरा और सामाजिक समरसता के जिन महत्वपूर्ण विषयों को रेखांकित किया है वे वर्तमान समय में बहुत आवश्यक है। अपनी किताब भारतीय ज्ञान परंपरा, पत्रकारिता और जनसंपर्क के संबंध में लेखक नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि इस पुस्तक का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक पत्रकारिता-जनसंपर्क के अंतर्संबंध को समझना और यह स्पष्ट करना है कि किस प्रकार भारत की संवाद-परंपरा ने आधुनिक संचार माध्यमों की बुनियादी संरचना को दिशा दी है।
कार्यक्रम में पुस्तक के प्रकाशक, अविशा प्रकाशन के प्रमुख अविनाश बागड़े, साहित्यसेवी नरेन्द्र परिहार, पुस्तक लेखक नीरज ओमप्रकाश श्रीवस्तव की सहधर्मिणी श्वेता श्रीवास्तव, इंजी. हर्षवर्धन श्रीवास्तव, एड हर्षिता श्रीवास्तव, प्रकाशन समूह की सहायक संपादक भावना नवले और तकनीकी सहयोगी नरेन्द्र धार्मिक मौजूद रहे। इस पुस्तक के संबंध में अपने मनोगत में भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी ने लिखा है कि भारत की संचार और संवाद परंपरा के उजले पृष्ठों को उभारने में इस पुस्तक की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी, ऐसी आशा की जा सकती है। इस पुस्तक के प्रकाशन के अवसर पर अनेक मित्रों शुभचिंतकों ने शुभकामनाएं दी हैं। इनमें प्रमुख रूप से डा. सागर खादीवाला, हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय, रचानाधर्मी नीरज व्यास, अनिल मालोकर, अजीत रामटेके, डॉ. असीम पराते प्रमुख रूप से शामिल हैं।

