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अभिनंदन मंच द्वारा ‘विरासत में मिली संस्कृति से बच्चों को सीख देना’ विषय पर परिचर्चा


नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम अभिनंदन मंच (ज्येष्ठ नागरिकों का सम्मान) के तत्वावधान मे ‘विरासत में मिली संस्कृति से अपने बच्चों को सीख देना’ विषय पर परिचर्चा विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभागार में आयोजित हुई। प्रमुख अतिथि के रूप में डॉ. शशिकांत शर्मा, साहित्यकार, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मंच पर उपस्थिति थे। अतिथियों का स्वागत, माया शर्मा, जगत बाजपेई, डॉ कृष्ण कुमार द्विवेदी ने अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह देकर किया। 

डॉ. शशिकांत शर्मा ने अपने उद्बोधन में सर्वप्रथम विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के आयोजकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि शिक्षा देना, शिक्षा लेना हमारी प्राचीन परम्परा है। परिवार मनुष्य की प्रथम पाठशाला है। बालक की पहली   गुरु माँ होती है। अपने परिवार से ही बच्चा अनुकरण करके संस्कार आत्मसात करता है और यही संस्कृति अमिट होती है जिसका बच्चों में बीजारोपण, संरक्षण, संवर्द्धन व हस्तांतरण अत्यावश्यक है। 

विजय तिवारी ने कहा कि फिल्म जगत के महानायक अमिताभ बच्चन और  प्रसिद्ध  खेल जगत के खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को परिवार से ही संस्कार मिले। आज हर माता - पिता अपने परिवार में बच्चों को अच्छे संस्कार देने की कोशिश करता है। माया शर्मा ने कहा कि बच्चों को अपने परिवार की संस्कृति से परिचय करवाना  होगा । सर्वप्रथम अपने घर - परिवार में ही अपने बुजुर्गों से आचार- विचार सीखने को मिलते हैं। 

समीर पठान  ने कहा कि आजकल लोग अपनी संस्कृति  भूलते जा रहे हैं। लोग अपनी संस्कृति को महत्व नहीं देते। बच्चू पांडेय ने कहा कि  आज हम बच्चों को अपनी भाषा नहीं सिखा रहे हैं। आधुनिकीकरण की घुड़दौड़ में हम शामिल हो रहे हैं। अपनी संस्कृति को सहेज कर रखो, औरों को बदलने से पहले स्वयं को बदलो। रमेश मौंदेकर ने समाज की संस्कृति की ओर ध्यान आकर्षित करवाया। समय के अनुसार समाज में बदलाव होता है। जगत बाजपेई ने  संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखी। मानवीय मूल्य समाप्त होते जा रहे हैं। समय के अनुसार समाज में बदलाव आया है। कार्यक्रम का संचालन संयोजक डॉ कृष्ण कुमार द्विवेदी ने किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में नंदिनी सुदामल्ला, दिनेश बागड़ी, अनिता गुप्ता, विजय तिवारी, बलदेव जुनेजा, ओमप्रकाश कहाते, संजय शर्मा, दिलीप  ढोरे, जयंत सोनटक्के ने अथक प्रयास किया।
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