श्रद्धा, निष्ठा, समर्पण और एकाग्रता से किया गया कर्म मंजिल तक ले जाता हैं : गणेश वंजारी
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उभरते सितारे मे 'भक्ति सागर'
नागपुर। आज इन बच्चों का टैलेंट देखकर बहुत अच्छा लगा। बहुत सारी चीज़ें जो हमें सोची थी, वह हो नहीं पाई। क्योंकि, हमारे समय इतना सुंदर मंच उपलब्ध नहीं था। भक्ति एक आस्था का स्वरूप है, जिसमें श्रद्धा, निष्ठा, समर्पण और एकाग्रता के साथ किया गया कर्म निहित है। जो आपको आपकी मंजिल तक ले जाता है। लेकिन भक्ति में अंधविश्वास की कहीं कोई जगह नहीं है। अंधविश्वास यानी पाखंड। आज के समय बच्चों के साथ- साथ बड़ों ने भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखना बहुत जरूरी है। यह विचार श्री गणेश वंजारी ने बच्चों और उनके अभिभावकों को के बीच रखा। दशकों से पूछे गए सवाल में किसी ने भक्ति को प्रेम, किसी ने करुणा, तो किसी ने निस्वार्थ भाव की संज्ञा दी।
विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन का नवोदित प्रतिभाओं को समर्पित उपक्रम 'उभरते सितारे' का आयोजन हिंदी मोर भवन के उत्कर्ष हॉल में किया गया। कार्यक्रम का विषय 'भक्ति सागर' पर आधारित शिक्षाप्रद, ज्ञानवर्धक और संगीतमय प्रस्तुतियों से भरा रहा। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप मे इरीगेशन विभाग के इंजीनियर गणेश वंजारी प्रमुखता से उपस्थित थे। इनका सम्मान संयोजक युवराज चौधरी ने स्वागत वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर किया।
तत्पश्चात, सभी बच्चों ने भक्ति सागर विषय पर अपने सुंदर विचार रखते हुए शानदार नृत्य और गीतों की प्रस्तुति दी। जिसमें, लव्यम श्रीवास्तव, पर्णिका श्रीवास्तव, अवनी मेश्राम, सानवी मेश्राम, राम बागल, कुंदा मेश्राम आदित मिंज और अर्चिता लखोटे ने बढ़िया गीत सुनाए। गार्गी गायकवाड के नृत्य ने सबको मंत्र मुग्ध किया।
बच्चों की प्रस्तुतियों को उनके अभिभावकों के साथ-साथ गीता सुरेश मिंज, अंजना अंकुर श्रीवास्तव, यशोधरा ब्राह्मणे, अमीना चौधरी, वंदना जनबंधु, एसपी तिवारी, चंद्रसेन पाटिल, संदेश हाडके, जवाहर राव, स्वाति गायकवाड, संदीप वानखेडे, अश्विनी अजय लखोटे, प्रीति बागल और वैशाली मदारे आदि ने बहुत सराहा। कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रशांत शंभरकर ने सहयोग दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन के साथ उपस्थित सभी दर्शकों, कलाकारों और बच्चों का आभार संयोजक युवराज चौधरी ने अपने शब्दों में व्यक्त किया ।


