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आज की सामाजिक स्थिति


राम श्याम में भी अब 
लोग भेद बहुत हैं करते। 
अपनी गलतियों का दोष
हैं एक दूजे पर  मड़ते।। 

इसीलिए तो मन में 
दोष भाव हैं आते। 
ईश्वर वादी न होकर वे
अवसरवादी  हो जाते।।

हर संस्था और समाज का 
अब यही हश्र हो रहा। 
अच्छे लोगों की संख्या 
कम और चापलूसों का 
इज़ाफा हो रहा।।

जिसका जितना है 
बोल बचन उसका
ही नाम चौतरफा हो रहा 
झूठ और फरेब का व्यापार,
देखो कैसे है फल फूल रहा।। 

पवित्र धरोहर धर्म की 
जिसका नाम है आर्यावर्त 
जहां जन्में  हैं राम श्याम, 
और जन्मे हैं परशुराम 
जो हैं यथावत।।

जहां जन्में हैं लाखों देवी देवता। 
हिन्द है जिसका नाम
जिसको असूर भी है पूजता।।

हम सब की अपने देश में 
है प्रबल आस्था।
इसलिए हमें तो है सिर्फ 
भारत भूमि से वास्ता।।

- रामनारायण मिश्र
   नागपुर, महाराष्ट्र 
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