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हर युग में मंदिरों के द्वारा धार्मिक आध्यात्मिक शैक्षणिक और आर्थिक विकास हुआ है : डॉ. सौरभ शुक्ला


नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन, हिंदी मोर भवन, सीताबर्डी, नागपुर में उपक्रम चौपाल के अंतर्गत विजय तिवारी के मार्गदर्शन में 'धार्मिक परंपराओं जागरूकता और मंदिरों से होता है देश में आर्थिक विकास' इस शीर्षक के अंतर्गत पर चर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सौरभ शुक्ला, विशेष अतिथि सीए. राजू नायडू उपस्थित थे। चौपाल की परंपरा के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत विद्या की देवी, वीणा वादिनी, मां सरस्वती  की वंदना के साथ की गई। शुरुआत में मदन गोपाल बाजपेई, एड. जगत बाजपेई व पदमदेव दुबे ने मुख्य अतिथि व विशेष अतिथि का अंग वस्त्र व सम्मान चिन्ह के साथ स्वागत किया।

चर्चा के आरंभ में मदनगोपाल बाजपेई जी ने प्राचीन भारतीय सभ्यता में मंदिर समाज निर्माण आर्थिक, धार्मिक, शैक्षणिक, आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित हुए हैं, उनके अनेक उदाहरण देकर आज भी उनका महत्व उतना ही देखने को मिलता है, इस बात के उन्होंने विस्तार से चर्चा की 
धीरज दुबे ने वर्तमान में प्राचीन मंदिरों को आस्था का केंद्र बात कर उनका महत्व और इसकी वजह से जो यातायात व पर्यटन का विकास हुआ है, उसके बारे में विस्तार से बताया। लक्ष्मी नारायण केसर ने मंदिरों के द्वारा, धार्मिक, आध्यात्मिक, विकास और ज्ञान की जो गंगा बह निकली है, इसके उन्होंने अनेक उदाहरण के साथ चर्चा की। 

डॉ बच्चू पांडे ने मानव जीवन के विकास के साथ-साथ देश समाज में शैक्षणिक, आध्यात्मिक व आर्थिक विकास के द्वारा देश के निर्माण में मंदिरों के योगदान की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने यह भी बताया की किस प्रकार से एक विशेष धर्म के उदय के साथ उनके विस्तार होने, भारत में आकर हिंदुओं को समूल नष्ट करने की मंशा से उनके आध्यात्मिक केंद्र  मंदिरों को तोड़गया। नालंदा और तक्षशिला और न जाने कितने ऐसे छोटे-मोटे शिक्षा के केंद्रों को जलाकर एक प्रकार से सनातन संस्कृति व शिक्षा को समाप्त करने की जो लहर चलाई है व अनेकों वर्षों तक चलती रही, और इसे अंग्रेजी शासक काल में गुरुकुल पद्धति, मंदिरों के द्वारा चलाई जाने वाले शिक्षा के केंद्रों पर बंदी लगाकर यह प्रकार से सनातन संस्कृति व हिंदू के अस्तित्व को खत्म करने का जगन्य, अक्षम्य अपराध किया है। 

आज जो समाज में धार्मिक परंपरा, जागरूकता और मंदिरों ने जो अलख जगाया हुआ है, उसी के परिणाम स्वरूप अयोध्या के राम मंदिर, उज्जैन महाकाल कॉरिडोर, काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर, विंध्यवासिनी मंदिर कॉरिडोर ऐसे अनेक प्रकार से निर्माण व विकास किया जा रहे हैं। इससे देश में निश्चित ही रोजगार व आर्थिक विकास के दिशा में अतुलनीय अविश्वसनीय काम हुआ है। 

एडवोकेट जगत बाजपेई जी ने प्राचीन मानव सभ्यता के विकास से मंदिरों के निर्माण का एक बहुत ही सुंदर चित्र प्रस्तुत किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब भारतीय संस्कृति में प्रकृति की पूजा होती थी, तो फिर मंदिरों की आवश्यकता क्यों पड़ी। आगे उन्होंने कहा कि वास्तुकला, शिल्प कला, मूर्ति कला, के विकास और प्रोत्साहन के लिए तत्कालीन राजाओं को मंदिर निर्माण की आवश्यकता महसूस होने पर मंदिर का निर्माण होने लगा साथी उन्होंने मंदिर के साथ संस्कृत, नृत्य, संगीत के आध्यात्मिक शिक्षा के विद्यालय के साथ ही उन्होंने मानव निर्माण का केंद्र के रूप में मंदिरों की व्याख्या की और समय के साथ-साथ इस प्रकार से उनके राज्य का, देश का, शिक्षा और व्यापार के माध्यम से भारत देश का आर्थिक विकास के साथ-साथ पूरे विश्व में सम्मान हुआ है, इस बारे में उन्होंने विस्तार से चर्चा की। 

अंत में उन्होंने भारत सरकार के द्वारा हिन्दू धर्म, संस्कृत विद्या, के प्रचार- प्रसार और विकास, विस्तार पर रोक लगने के साथ साथ ऐसे मंदिर जो आस्थाओं के केंद्र हैं, उनमें श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए धन राशि को देखते हुए जो मंदिर अधिग्रहण किया गया, इसकी उन्होंने आज आलोचना की।

मुख्य अतिथि डॉ. सौरभ शुक्ला ने अनेकल में भारतीय सरकार द्वारा मंदिर अधिग्रहण, जैसे की वैष्णो माता मंदिर, वृंदावन, मथुरा के अनेक मंदिर, शिर्डी का साईं मंदिर, तिरुपति मंदिर, पद्मनाथ मंदिर, सबरी माला मंदिर, तुलजा भवानी मंदिर, ऐसे अनेक मंदिरों का उदाहरण देकर उन्होंने शासन ने जो उनका दोहन किया है, इसी वजह से देश के सामाजिक,आर्थिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक  विकास पर एक प्रकार से ग्रहण लगा दिया गया, इसकी उन्होंने खुलकर आलोचना की व शासन से निवेदन किया की, इस पर विचार कर इन मंदिरों को मुक्ति किया जाए व समाज के संस्थानों को हस्तांतरित किया जाए, ऐसा उन्होंने आवाहन किया।

विशेष अतिथि राजू नायडू ने चौपाल द्वारा चलाए जा रहे ऐसे कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए चौपाल के संयोजक सहसंयोजक व श्रोताओं को धन्यवाद दिया। साथी उन्होंने सभी वक्ताओं के ज्ञान की व उनके उत्साह की व चौपाल में निरंतर अपना सहयोग देने के लिए उनका उत्साह वर्धन किया व चौपाल के इस कार्यक्रम की सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने एक विशेष बात यह बताइए की राष्ट्रीय जीडीपी में पर्यटन और मंदिरों का 3.5% का योगदान है।

संयोजक विजय तिवारी ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया व अंत में मुख्य अतिथि, इसी प्रकार श्रोताओं और वक्ताओं का आभार प्रदर्शन  किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्वश्री हरेंद्र प्रसाद, दिनेश बागड़ी, रमेश  मौदेकर, वैभव शर्मा, सचिन शुक्ला, पद्मदेव दुबे, शत्रुघ्न तिवारी, राजीव गायकवाड, आनंद मूल, संजय शर्मा, राजीव टावरी, अजय मिश्रा, सर्व श्रीमती अंजू पांडे इत्यादि ने अपना अमूल्य योगदान दिया
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