अस्पताल में गंभीर अव्यवस्था के विरोध में शिवसेना वैद्यकीय मदत कक्ष ने किया घेराव
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परिसर में पुलिस चौकी स्थापित करने और गश्त बढ़ाने की मांग
नागपुर। डागा स्मृति सरकारी महिला अस्पताल में व्याप्त गंभीर अव्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा में लापरवाही के विरोध में आज शिवसेना वैद्यकीय मदत कक्ष के पदाधिकारियों ने अस्पताल अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया।
घटना की पृष्ठभूमि : अस्पताल के नवजात शिशु आईसीयू में 14 मई, गुरुवार को धुआं फैलने की घटना हुई। समय रहते ध्यान दिए जाने से 38 नवजात शिशुओं की जान बच गई, लेकिन इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिवसेना वैद्यकीय मदत कक्ष की ओर से पूर्व विदर्भ प्रमुख प्रवीण लता बालमुकुंद शर्मा के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने अस्पताल के अधिष्ठाता डॉ. दिलीप मडावी को ज्ञापन सौंपा। साथ ही महाराष्ट्र राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के चिकित्सा सहायता कक्ष के ठाणे स्थित मुख्य कार्यालय से संपर्क कर महाराष्ट्र राज्य प्रमुख राम हरी राउत ने मामले का तत्काल संज्ञान लेकर छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली।
अस्पताल की प्रमुख समस्याएं :
स्वच्छता और जल आपूर्ति :
- पूरे अस्पताल में गंदगी है और नियमित सफाई नहीं होती। इससे बदबू फैलकर संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। - पीने के पानी के लिए लगाए गए आरओ प्लांट बंद पड़े हैं। पूरे अस्पताल में केवल एक ही आरओ चालू है। - वार्ड के बाहर रखे पानी के कैन खाली रहते हैं। मरीजों और परिजनों को अस्वच्छ पानी पीना पड़ रहा है। - सफाई का ठेका लेने वाली एजेंसी का ठेका तुरंत रद्द किया जाए।
दवा और उपचार व्यवस्था :
- डॉक्टरों द्वारा लिखी गई सभी दवाएं मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के परिजनों को इससे भारी परेशानी होती है। - अस्पताल में ही सभी दवाओं की उपलब्धता कराई जाए, ऐसी मांग की गई।
कर्मचारियों का व्यवहार और जनशक्ति की कमी :
- प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं से डॉक्टरों और नर्सों के दुर्व्यवहार की शिकायतें हैं। परिजनों द्वारा पूछताछ करने पर भी अभद्र व्यवहार किया जाता है। - रेडियोलॉजी विभाग में केवल एक ही तकनीशियन कार्यरत है। दूसरे तकनीशियन ने इस्तीफा दे दिया है। - डॉक्टरों, तकनीशियनों और अन्य कर्मचारियों की भारी कमी है।
सुरक्षा और आधारभूत सुविधाएं :
- मेट्रो के काम के कारण अस्पताल का पुराना प्रवेश द्वार तोड़ दिया गया, लेकिन नया गेट अब तक नहीं बनाया गया। इससे बाहरी अज्ञात लोग अस्पताल परिसर में आकर शराब, गांजा पीते हैं और गुटखा खाकर परिसर गंदा करते हैं।
- अस्पताल में पुलिस चौकी नहीं है और तहसील पुलिस स्टेशन से भी नियमित गश्त नहीं होती।
- नई इमारत के लिए शासन ने 21 करोड़ में से केवल 14 करोड़ रुपये दिए हैं। 7 करोड़ रुपये अभी तक नहीं मिले हैं। निधि के अभाव में काम अधूरा रह गया और ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है।
- मेट्रो फ्लाईओवर के लिए अस्पताल की लगभग एकड़ जमीन ली गई, लेकिन उसका मुआवजा केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को नहीं दिया है।
प्रमुख मांगें :
मरीजों को अस्पताल में ही मुफ्त दवाओं की आपूर्ति की जाए। - मरीजों और परिजनों से सभ्य और संवेदनशील व्यवहार करने के आदेश डॉक्टरों व नर्सिंग कर्मचारियों को दिए जाएं। - आरओ मशीन के जरिए शुद्ध पेयजल की सुविधा तुरंत हर वार्ड में उपलब्ध कराई जाए। - सफाई का ठेका रद्द कर जिम्मेदार एजेंसी नियुक्त की जाए। - अस्पताल को तुरंत नया प्रवेश द्वार बनाकर सुरक्षा बढ़ाई जाए। - लंबित 7 करोड़ रुपये की निधि तुरंत मंजूर की जाए।
इस अवसर पर शिवसेना चिकित्सा सहायता कक्ष के पूर्व विदर्भ प्रमुख प्रवीण लता बालमुकुंद शर्मा, शहर संपर्क प्रमुख रमेश डोके, ग्रामीण संपर्क प्रमुख महेंद्र भुरे, नागपुर शहर व ग्रामीण जिला समन्वयक सुशील हातीथेले, शहर जिला समन्वयक डॉ. वलिउन रहमान, ग्रामीण जिला समन्वयक रमेश कन्हेरे, उपजिलाप्रमुख राहुल चांडक, शहर प्रमुख विवेक दस्तुरे, जगदीश गुप्ता, कपूर सिंह, मध्य नागपुर विधानसभा संघटक निशांत वासाणी, कामठी विधानसभा संघटक संतोष समुद्रे, हिंगणा विधानसभा रुग्णसेवक सोनू कश्यप सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे। शिवसेना वैद्यकीय मदत कक्ष ने चेतावनी दी है कि मरीजों के हित की ये मांगें तुरंत पूरी न होने पर तीव्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।



