सिमेंट सड़कों का बिछता जाल - भविष्य में बरसाएगा 'आग के गोले'
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महाराष्ट्र में विकास के नाम पर बिछाई जा रही सिमेंट की सड़कें आने वाले समय में एक बड़े पर्यावरणीय संकट का कारण बनेंगी। प्रसिद्ध लेखक तथा समाजसेवी डॉ. शेखर दंताले ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार और प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इन सड़कों पर तुरंत प्रतिबंध नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में महाराष्ट्र की जनता को 'आग के गोले' जैसे तापमान का सामना करना पड़ेगा और ऑक्सिजन की कमी महसूस होगी इसके कारण जान भी जा सकती है।
मिट्टी की 'हत्या' और जल संकट डॉ. दंताळे के अनुसार, सिमेंट रोड ने जमीन की ऊपरी सतह को पूरी तरह सील कर दिया है। इससे बारिश का पानी जमीन के भीतर नहीं जा पा रहा, जिससे भूजल स्तर (Groundwater Level) खतरनाक स्तर तक गिर चुका है। उन्होंने कहा, हम कंक्रीट का जंगल बनाकर आने वाली पीढ़ी को एक प्यासी और तपती हुई धरती विरासत में दे रहे हैं।
हीट आइलैंड इफेक्ट रातें भी होंगी गर्म वैज्ञानिक तथ्यों का हवाला देते हुए बताया गया कि सिमेंट की सड़कें दिन भर सूरज की गर्मी को सोखी रखती हैं और रात में उसे वातावरण में छोड़ती हैं। इसे 'अर्बन हीट आइलैंड' कहा जाता है। डॉ. दंताळे ने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति रही, तो शहरों का तापमान सामान्य से १० डिग्री तक बढ़ जाएगा, जिससे इंसानों और पशु-पक्षियों का जीना दूभर हो जाएगा।
डॉ. शेखर दंताळे की मुख्य मांग है की सिमेंट रोड के अंधाधुंध निर्माण पर तत्काल कानूनी प्रतिबंध लगाया जाए। सड़कों के निर्माण में ऐसी तकनीक का उपयोग हो जिससे पानी जमीन में रिस सके। सड़कों के किनारे पेड़ों के लिए कम से कम १० फीट की कच्ची जगह (Green Belt) अनिवार्य हो। सोशल मीडिया पर 2015 में दी चेतावनी डॉ. दंताले ने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से नागरिकों से इस मुद्दे पर गंभीर होने की अपील की है।
उन्होंने कहा है कि इस चेतावनी का स्क्रीनशॉट लेकर रख लें, क्योंकि प्रकृति का प्रकोप जल्द ही दिखाई देगा। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि विकास की परिभाषा को 'पर्यावरण पूरक' बनाया जाए, न कि 'पर्यावरण विनाशक'। फिलहाल बारिश का पाणी नाली में नाली का पाणी नालो में नालो का पाणी नदी में और नदी का पाणी समंदर में समा रहा है इस सायकल के कारण बाढ आकर कई घर बारिश में डूब जाते है। समंदर भी अपनी सिमाये तोड देता है। विकास जरुरी है पर निसर्ग से खिलवाड ना करते हुये पर्यावरण का संतुलन रखकर।
- डॉ. शेखर दंताळे
नागपुर, महाराष्ट्र
