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साहित्यिकी में ‘किताबें बोलती हैं’ का सफल आयोजन संपन्न


नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम साहित्यिकी में "किताबें बोलती हैं" का अत्यंत सफल आयोजन किया गया। बडी संख्या में उपस्थित रसिकजनों नें एक से बढकर एक अंश सुनाये। संयोजिका हेमलता मिश्र मानवी ने मां सरस्वती और गणेश को नमन करते हुये मंचासीन अध्यक्ष एवं अतिथि का स्वागत किया। मीरा जोगलेकर ने सुमधुर वंदना से कार्यक्रम का आरंभ किया। दीपक गुप्ता ने आनंद मठ से अंश वाचन कर साहित्य पूजन किया। दिनेश बागडे़ ने अपने वाचन से साहित्य धारा बहाई। 

रूबी दास के प्रिय लेखक मोहन माधव शास्त्री की पुस्तक देश से उत्तम वाचन से कक्ष अनुप्राणित हो गया। मीरा जोगलेकर ने हाऊ टू विन फ्रेंड्स की हिन्दी अनुवादित पुस्तक से बढ़िया अंश सुनाये। मेघा अग्रवाल ने कक्ष को जीवंत उदाहरण सहित अंश सुनाकर संपूर्ण कक्ष को प्रफुल्लित किया। सुषमा शर्मा ने रणभूमि से कुमार संभव के उत्तम अंश पढे़। यशवंत पाटील और श्री लोखंडे ने अपनी-अपनी बात सुनाई। 

माया शर्मा ने हेमंत लोढ़ा की श्रीमद्भागवत रूपकथा से कक्ष को विमोहित किया। रमेश मौंदेकर विलास मोहोरकर ,रमेश धकाते, लीलाधर सिन्हा ने   पुस्तकों पर बात की। वरिष्ठ साहित्यकार शीला भार्गव ने मीरा की समर्पण भावना पर बहुत अच्छी बातें रखीं और कृष्ण भक्ति धारा बहाई। पूनम मिश्रा ने शीला भार्गव की इकतारा की झंकार से अति-उत्तम अंश दिये। 

अतिथि तन्हा नागपुरी ने हिमांशु जोशी की अरण्य से भावभरे अंश दिये और वक्तव्य में काँवरियों पर बात की। अध्यक्षीय वक्तव्य में कल्पना बारापात्रे ने सभी की भूरि-भूरि सराहना की एवं मानवी की सूखी स्याही लघुकथा संग्रह से अंश सुनाये। आभार की परंपरा के साथ आयोजन संपन्न हुआ।
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