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साहित्यिकी में लघुकथा सम्मेलन


नागपुर।। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के साहित्यिकी में लघुकथा सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया, जिसमें सुधिजनों ने एक से बढ़कर एक लघुकथाएं एवं संस्मरण प्रस्तुत किये।
आयोजन का आरंभ सरस्वती वंदन से हुआ। मंचासीन अध्यक्ष शारदा मिश्र का स्वागत उत्तरीय से किया गया। सम्मेलन का आरंभ शिवानी सिंह की चूहे की कहानी से हुआ उन्होंने दो अति उत्कृष्ट लघुकथाएं सुनाईं। 

दीपक गुप्ता ने लावारिस व्यक्ति की  सच्ची कथा सुनाई जो याददाश्त खो चुका था। सुषमा शर्मा ने श्लोक सुनकर प्राण त्यागने वाली काली बिल्ली का संस्मरण सुनाया। जितेन्द्र जैन ने कहा जिंदगी एक ऐसी लघुकथा है जिसमें कई कथायें हैं साथ ही बढ़िया संस्मरण सुनाये।ओमप्रकाश कहाते ने अपनी स्कूल के बच्चों और गरीब अनाथ परिवारों के सच्चे संस्मरण सुनाकर कक्ष को सम्मोहित कर दिया। 

प्रशांत कुमार ने जवाब शीर्षक की अति सुन्दर लघुकथा दी। रमेश मौंदेकर ने अपनी बढ़िया लघुकथा से सोचने पर मजबूर कर दिया। सुधीर जवंजाल ने अभिनय के साथ बढ़िया अंदाज में संस्मरण और मिमिक्री दी। रोचक संचालन के दौरान मानवी ने अनेक लघुकथा से कक्ष को रससिक्त और अभिभूत किया।  

विजय तिवारी के साथ साथ कक्ष में उपस्थित अनेक श्रोताओं ने सभा में आनंद उठाया। अतिथि शारदा मिश्र जी ने संगीत की ताल पर बच्चों की पढाई के बारे में संस्मरण सुनाये। मातृ दिवस के उपलक्ष्य में हादसा नामक लघुकथा सुनाकर संपूर्ण कक्ष को बाँध लिया। अंत में आभार प्रदर्शन के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।
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