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जामसांवली धाम में चार ई-रिक्शा सेवा का हुआ विधिवत शुभारंभ


श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु बड़ी पहल

नागपुर। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र सहित देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर संस्थान, हनुमान लोक जामसांवली धाम में भक्तों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। संस्थान परिसर में बुधवार को विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ चार नवीन ई-रिक्शा वाहनों का लोकार्पण किया गया। यह नई सुविधा विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी जिन्हें मुख्य पार्किंग स्थल से मंदिर तक पहुँचने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। अब श्रद्धालुओं को मुख्य पार्किंग से मंदिर परिसर तक और दर्शन के उपरांत वापसी तक सुगम, सुरक्षित एवं सुविधाजनक परिवहन सेवा उपलब्ध हो सकेगी।


संस्थान अध्यक्ष गोपाल शर्मा ने जानकारी दी कि श्रद्धालुओं को यह ई-रिक्शा सेवा न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध कराई जाएगी ताकि हर वर्ग के दर्शनार्थी सहज रूप से इस सुविधा का लाभ उठा सकें। प्रतिदिन हजारों की संख्या में पहुँचने वाले भक्तों, विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांग श्रद्धालुओं को इससे बड़ी राहत मिलेगी। मंदिर संस्थान द्वारा पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इन पर्यावरण अनुकूल वाहनों को प्राथमिकता दी गई है, जिससे प्रदूषण रहित और स्वच्छ धार्मिक परिसर बनाए रखने में बड़ी सहायता मिलेगी। 
श्री हनुमान मंदिर संस्थान द्वारा समय-समय पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए अनेक नवाचार किए जा रहे हैं। पेयजल, पार्किंग, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था के कारण जामसांवली धाम निरंतर एक आदर्श एवं व्यवस्थित धार्मिक स्थल के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

ई-रिक्शा सेवा का शुभारंभ संस्थान अध्यक्ष गोपाल शर्मा, सचिव टीकाराम कारोकार, ट्रस्टी मनोहर शेलकी, अजय धवले, निलेश खंडाईत, सीईओ श्री वीरेंद्र भट्ट एवं श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। 
जामसांवली धाम में लगातार बढ़ती व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं के प्रति संस्थान की अटूट सेवा भावना को दर्शाती हैं। उल्लेखनीय है कि हनुमान लोक में प्रतिदिन दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं, ऐसे में बेहतर यातायात व्यवस्था की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इस सेवा के प्रारंभ होने से अब श्रद्धालुओं को लगभग आठ सौ मीटर की लंबी दूरी पैदल तय करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे दर्शन व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुव्यवस्थित हो जाएगी। स्थानीय भक्तों ने इस पहल को 'सेवा ही धर्म' की भावना से जुड़ी एक सराहनीय कोशिश बताते हुए संस्थान के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है।
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