भाषाप्रभु गडकरी के नाटक मराठी साहित्य की धरोहर : प्रकाश एदलाबादकर
गडकरी जयंती पर 'संगीत एकच प्याला' के नाट्य-वाचन से मुहूर्त संपन्न
नागपुर। संगीत मत्स्यगंधा’ की अभूतपूर्व सफलता के बाद नागपुरवासियों को जल्द ही ‘संगीत एकच प्याला’ नाटक देखने का अवसर मिलेगा।
भाषाप्रभु कै. राम गणेश गडकरी की १४१वीं जयंती के अवसर पर २६ मई को उनकी अजरामर कृति ‘संगीत एकच प्याला’ का मुहूर्त श्री राजेंद्र हाईस्कूल, नागपुर में वरिष्ठ समीक्षक, पत्रकार एवं वक्ता प्रकाश एदलाबादकर के करकमलों से संपन्न हुआ। नारायण जोशी की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में नाटक के निर्देशक प्रभाकर ठेंगडी तथा रंगमंच की वरिष्ठ अभिनेत्री शोभना मोहरील मंच पर उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन उज्वला अंधारे ने किया।
इस अवसर पर प्रकाश एदलाबादकर ने कहा- नाटककार राम गणेश गडकरी सरस्वती के कंठहार हैं। नाटक, कविता और हास्य लेखन तीनों क्षेत्रों में उन्होंने सिद्धहस्त लेखन किया। अत्यंत प्रतिभाशाली और कल्पनाशील गडकरी द्वारा लिखित नाटक मराठी साहित्य की धरोहर हैं। शराब के दुष्परिणामों पर आधारित ‘एकच प्याला’ एक श्रेष्ठतम शोकांतिका है। मुझे विश्वास है कि प्रभाकर ठेंगडी इस शिवधनुष को कलात्मक रूप से सफलतापूर्वक उठाएंगे। उन्होंने मराठी संगीत रंगमंच का संक्षिप्त इतिहास भी प्रस्तुत किया।
निर्देशक प्रभाकर ठेंगडी ने अपने प्रस्तावना भाषण में कहा, एकच प्याला, मूलतः पाँच अंकों का नाटक है, जिसे दो अंकों में संपादित कर प्रस्तुत किया जाएगा। पारंपरिक संगीत नाटक की तरह यह विभिन्न दृश्यों में घटित होता है। बॉक्स सेट का उपयोग न करते हुए, बहु-प्रवेशी नाटक होने के कारण इसका मंचन तकनीकी सहायता से किया जाएगा।”
कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों द्वारा नटराज पूजन एवं गडकरी के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। तत्पश्चात गुणवंत घटवाई, मनीष मोहरील, यामिनी पायघन, मुकुंद वसुले, यशवंत चोपडे और रोहिणी मोहरील ने नाटक के दो अंकों का सअभिनय नाट्य-वाचन किया। रामलाल की भूमिका में गुणवंत घटवाई ने ‘परम गहन ईशकाम’ तथा सिंधु की भूमिका में यामिनी पायघन ने ‘कशी या त्यज्यू पदाला’ ये दो नाट्यपद प्रस्तुत किए।
यह नाटक दि मध्य प्रदेश एज्युकेशन सोसायटी, नागपुर द्वारा निर्मित है और इसके निर्माता मोहन नाहातकर हैं। कलाकार : मनीष मोहरील, यामिनी पायघन, गुणवंत घटवाई, मुकुंद वसुले, यशवंत चोपडे, रोहिणी मोहरील, विनोद तुंबडे, नारायण जोशी, शेखर मंगळमूर्ती, सचिन कानडे, अभिषेक पाठक। संगीत संयोजन भास्कर पिंपळे एवं हर्षद पायघन का है।