सत्य का पथ
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'सत्य का पथ' कठिन था कांटे ही मिले,
खुद को कभी हताश-निराश नहीं किया!
लोगों ने क्या कुछ नहीं कहा पर चुप ही रहे,
पर 'संस्कार' से कभी समझौता नहीं किया!
किसी दामिनी का दामन मैला नहीं किया,
छल कपट के सहारे धन जमा नहीं किया!
हमको गलत समझता रहे जमाना मगर,
हमने कभी अनुचित का साथ नहीं किया!
तनिक लाभ मिला तो लोग खुद को बेच दिये,
हमने उस बाजार में खरीद-फरोख्त नही किया।
सत्ता, पद और सिक्कों की खनक देख कर,
निज लाभ के लिए कभी मोल-तोल नहीं किया।
हार मिली जीवन में, दिल से स्वीकार किया,
पर सत्-चरित्र का कभी सौदा नहीं किया।
इतिहास भले हमारा नाम न लिखे मगर, 'मिश्र'
हमने कभी भी गलत मसौदा नहीं किया।
- रामनारायण मिश्र
नागपुर, महाराष्ट्र