अभिनंदन मंच द्वारा 'भोजन उतना ही लो थाली में, व्यर्थ ना जाए नाली में' विषय पर परिचर्चा
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नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम अभिनंदन मंच (ज्येष्ठ नागरिकों का सम्मान) के अंतर्गत कार्यक्रम 'भोजन उतना ही लो थाली में, व्यर्थ ना जाए नाली में' इस विषय पर परिचर्चा की सुंदर प्रस्तुति रही। यह आयोजन हिंदी मोर भवन रानी झांसी चौक में किया गया. प्रमुख अतिथि राजेंद्र मिश्रा सेवा निवृत्त वरिष्ठ लेखा अधिकारी, महालेखाकार कार्यालय (लेखा व हकदारी) द्वितीय, नागपुर की मंच पर उपस्थिति रही। अतिथियों का स्वागत' विजय तिवारी, डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी ने अंगवस्त्र स्मृति चिन्ह से किया।
सर्वप्रथम अमिता साह ने मां सरस्वती की वंदना की। प्रमुख अथिति राजेंद्र मिश्रा ने अपने उद्बोधन में सर्वप्रथम विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के आयोजकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। आजकल की शादी में कई प्रकार के व्यंजन रखने का खूब चलन हो गया। इस दिखावे के चक्कर में पार्टियों में अन्न की बर्बादी हो रही । जब हम पार्टी में अत्यधिक भीड़ रहने पर भोजन के कतार में लगते है हमारे सामने वाला व्यक्ति पहले भोजन अपनी थाली में बड़े ही आराम से लेता है उसके पीछे वाला व्यक्ति इंतजार करने के बाद जब उसका नंबर आता तो वह पूरा प्लेट भर भोजन ले लेता है।
उसके रूचि का भोजन नहीं रहा तो वह ढेर सारा खाना अपने थाली में छोड़ देता है इस तरह से अन्न की बर्बादी होती है। भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए कैटलर वाले की और से कुछ व्यक्तियो को देख- रेख में लगा देना चाहिए। कोई भोजन थाली में तो नहीं छोड़ रहा है। इस पर ध्यान दिया जायेगा तो अन्न बर्बाद नहीं होगा । जिस स्थान पर शादी या पार्टी वहां पर स्लोगन लगाना चाहिए। 'अन्न छोड़ेंगे थाली में, तो व्यर्थ जायेगा नाली में' इससे लोगों में जनजागृति आएगी अन्न की बर्बादी होने से रोका जा सकता है।
हेमंत पांडेय ने कहा किसान कितनी मेहनत मशक्कत करके अन्न उगाता है। अन्न के महत्व को किसान ही जानता है। महाप्रसाद के समय बहुत सी महिलाएं बहुत ज्यादा भोजन घर ले जाकर बाहर नाली में फेक देती है। माया शर्मा ने कहा सबसे पहले तो अन्न का आदर करना चाहिए।अन्न को भगवान मानते है। जो गरीब तबका या मजदूर है वह अन्न की कीमत को भली भांति जानता है।
बच्चू पांडेय ने अपने स्वयं की आपबीती सुनाई। बचपन में परीक्षा के दौरान भूखे रहकर परीक्षा में अच्छे अंक लेकर उत्तीर्ण किया। अन्न के बारे में स्वयं का अध्ययन करना बहुत जरूरी है। तभी वह अन्न के महत्व को समझेगा। उन्हें अपने गुरु के द्वारा दी गई शिक्षा को हमेशा ध्यान में रखकर उसी मार्ग का अनुसरण किया। विजय तिवारी ने कहा राममंदिर में महाप्रसाद के वितरण के समय कुछ लोगों की निगरानी में प्रसाद दिया जाता है ताकि प्रसाद व्यर्थ न फेंका जाए।
माधुरी राउलकर ने अपनी बात को ग़ज़ल के अंदाज में कहा - 'जाने अनजाने लोगों की भीड़ इक्कठी करके, यूं बेवजह जश्न मनाया जाए। अनाज कीमती है उसका अपमान करके, अन्न नाली में न फेंककर उसे बचाया जाए। न शर्म न लाज, कितना फेकते अनाज। डॉ. बालकृष्ण महाजन ने बचपन में घर में मां के द्वारा दी गई सीख को अमल करना चाहिए। जितनी भूख उतनी ही रोटी बनाना चाहिए। रमेश मौदेकर ने कहा महाप्रसाद की किस तरह से बर्बादी होती है।इस ओर ध्यानाकर्षित कराया।
अमिता शाह ने कहा बचपन में घर से ही संस्कार बच्चों को देना चाहिए। गीता का श्लोक पढ़कर भोजन की शुरुवात करनी चाहिए़। अपनी परम्परा और संस्कृति को अपनाते हुए चलना चाहिए। कार्यक्रम के संयोजक व संचालन डॉ कृष्ण कुमार द्विवेदी ने किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने ओमप्रकाश कहाते, यशवंत पाटिल, अंबरीश दुबे ,समीर पठान की उपस्थिति रही।
