ऑनलाइन औषध बिक्री का विरोध करने वालों का दोहरा चरित्र बंद करें : डॉ. शेखर दंताळे
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नागपुर। बळीराजा पार्टी के विदर्भ महासचिव एवं नागपुर शहर प्रभारी डॉ. शेखर दंताळे ने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे इनको ई-मेल के माध्यम से पत्र भेजकर ऑनलाइन औषध विक्री पर मेडिकल दुकानदारों के और से होनेवाला विरोध का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया है।
डॉ. दंताळे ने अपने पत्र में कहा है कि आज डिजिटल युग चल रहा है। पैसे के लेन- देन भी ऑनलाइन हो रहे हैं, किराणा सामान भी ऑनलाइन सस्ता मिल रहा है, फिर केवल दवाइयों के मामले में ही मेडिकल दुकानदारों का इतना विरोध क्यों? उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह दुटप्पीपणा (दोहरा चरित्र) है। उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मुठ्ठी भर दुकानदारों के नफे के लिए हजारों गरीबों का आर्थिक शोषण न होने दें।
डिजिटल युग में दोहरा मापदंड :
आज पूरा देश डिजिटल हो रहा है। पैसे के लेन-देन युपीआय से हो रहे हैं, किराणा और अन्य सामान ऑनलाइन सस्ता मिल रहा है, लेकिन गरीबों को सस्ती दवाइयाँ उपलब्ध कराने वाली ऑनलाइन सुविधा का मेडिकल दुकानदार विरोध कर रहे हैं। डॉ. दंताळे ने इसे ‘आमची ती आपली आणि लोकांची ती कार्टी’ वाली मानसिकता बताया है। क्यूँकी यही दुकानदार अपना किराणा, कपडे, इलेक्ट्रॉनिक चीजे ऑनलाईन खरीद रहे है | इन्हे तब लोकल दुकानदार याद नही आते तब इन्हें ऑनलाईन की सारी सुविधा पसंद आती है |
किमतों में लूट :
होलसेल में २५ रुपये वाली दवा स्थानीय मेडिकल दुकानों पर एमआरपी १२० रुपये में बेची जाती है। यह आमजन और गरीबों के साथ खुली लूट है। वहीं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर वही दवा घर बैठे बहुत सस्ती और छूट के साथ उपलब्ध होती है।
गरीबों का हित :
ऑनलाइन दवाओं से बचाए गए पैसे से गरीब व्यक्ति पौष्टिक आहार, फल और सब्जियाँ खरीद सकता है, जिससे उसका स्वास्थ्य सुधरेगा और स्थानीय फल-सब्जी विक्रेताओं को भी रोजगार मिलेगा। १०० दुकानदारों के मुनाफे से ज्यादा महत्वपूर्ण हजारों गरीब परिवारों का स्वास्थ्य और आर्थिक राहत है।
पारदर्शिता :
ऑनलाइन विक्री से सही बिल, उचित कीमत और गुणवत्ता की गारंटी मिलती है। डॉ. दंताळे ने मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि किसी भी दबाव में न आते हुए इस पारदर्शी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए।
डॉ. शेखर दंताळे ने समस्त जनता की ओर से विनंती करते हुए कहा है कि सौ दुकानदारों के स्वार्थ के लिए हजारों गरीबों का नुकसान न होने दें।
