नागपुर की जोशी की उड़ान ‘सीमा’ पार
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कैमरे के पीछे की वह’ ग्रंथ में फोटोग्राफर सीमा जोशी शामिल
नागपुर। महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य में भी फोटोग्राफी पारंपरिक रूप से पुरुष प्रधान क्षेत्र रहा है। लेकिन शौक के तौर पर नहीं, करियर के रूप में इस क्षेत्र में उतरकर अपनी पहचान बनाने वाली कई महिलाओं ने इस धारणा को तोड़ा है। ऐसी ही 40 सफल महिला फोटोग्राफरों की यात्रा को प्रो. डॉ. प्रवीण घोड़ेस्वार ने ‘कैमरे के पीछे की वह’ पुस्तक में दर्ज किया है। इस पुस्तक में शामिल 40 में से 23 महिलाएं महाराष्ट्र की हैं और उनमें नागपुर की सौ. सीमा मोहन जोशी का चयन हुआ है, जो नागपुरवासियों के लिए गर्व की बात है।
खानदेश के धुले में प्रसिद्ध ‘मुधोळकर आर्ट स्टूडियो’ परिवार में सीमा का जन्म हुआ। 1920 में स्थापित इस स्टूडियो में दादा, पिता, चाचा, भाई को काम करते देखकर वह बड़ी हुईं। दसवीं से ही वह पिता की मदद करते हुए फोटो रिटचिंग, लाइट सेटअप और डार्क रूम का काम सीखने लगीं।
1990 में नागपुर के सिविल इंजीनियर मोहन जोशी से विवाह के बाद भी सीमा ने अपनी रुचि नहीं छोड़ी। भाई के प्रोत्साहन और पति द्वारा दिए गए DSLR कैमरे से उन्होंने व्यावसायिक फोटोग्राफी शुरू की। शादी, मुंज, जन्मदिन, डोहाले जेवन के साथ-साथ उन्होंने अखबारों के लिए फोटोग्राफी की तकनीक भी सीखी।
आज उन्हें राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बुलाया जाता है। सुनील गावस्कर, रोहिणी हट्टंगडी, सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी, देवेंद्र फडणवीस, मोहन भागवत जैसे गणमान्य लोगों के फोटो लेने का अवसर उन्हें मिला है।
पिछले दो दशकों से सक्रिय सीमा को राम गणेश गडकरी ट्रस्ट, नवनाथ ट्रस्ट, पद्मगंधा प्रतिष्ठान जैसी संस्थाओं ने सम्मानित किया है। वह राष्ट्रीय सेविका समिति की सेविका भी हैं। नई पीढ़ी को सीमा का सुझाव है- 'फोटोग्राफी के लिए उचित प्रशिक्षण, पारिवारिक सहयोग और धैर्य, फुर्ती, सहनशीलता जरूरी है। मोबाइल फोटोग्राफी शौक के लिए ठीक है, लेकिन व्यावसायिक फोटोग्राफी की मांग गुणवत्ता के कारण हमेशा रहेगी'। गृहिणी की जिम्मेदारी निभाते हुए व्यावसायिक फोटोग्राफी में सफलता पाने वाली सीमा जोशी वास्तव में एक मनस्वी कलाकार हैं।

