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13वां हेलो डायबिटीज एकेडेमिया (HDA) इंटरनेशनल कॉन्क्लेव 2026 नागपुर में हुआ प्रारंभ


नागपुर। प्रतिष्ठित 13वां हेलो डायबिटीज एकेडेमिया (HDA) इंटरनेशनल कॉन्क्लेव 2026 आज होटल सेंटर पॉइंट, रामदासपेठ, नागपुर में भव्य रूप से प्रारंभ हुआ। इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के 200 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी सदस्यों तथा सैकड़ों स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सहभागिता की।


सुनील्स डायबिटीज केयर एंड रिसर्च सेंटर (DCRC) तथा डायबिटीज केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (DCFI) द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा संगठनों के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन मधुमेह एवं मेटाबॉलिक रोगों के क्षेत्र में ज्ञान, कौशल और रोगी देखभाल को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।

सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष डॉ. सुनील गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा ही HDA का मूल आधार है। वर्ष 2014 में शुरू हुई यह पहल आज देश के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक मंचों में से एक बन चुकी है, जो मधुमेह की रोकथाम, उपचार, रिमिशन, मोटापा प्रबंधन एवं मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्टता को बढ़ावा दे रही है।

इस वर्ष के कॉन्क्लेव में 10 हैंड्स-ऑन कार्यशालाएं, 5 प्रतिष्ठित ओरेशन, 108 से अधिक वैज्ञानिक व्याख्यान तथा 170 राष्ट्रीय एवं 140 क्षेत्रीय फैकल्टी सदस्यों की सहभागिता इसे मध्य भारत के सबसे बड़े डायबिटीज अकादमिक आयोजनों में शामिल करती है।

कॉन्क्लेव का प्रमुख आकर्षण “हार्ट-टू-हार्ट” इंटरैक्टिव सत्र रहा, जिसमें Dr. Jitendra Singh, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने सम्मेलन का उद्घाटन किया और उपस्थित प्रतिनिधियों से संवाद किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने डॉ. सुनील गुप्ता द्वारा मधुमेह शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्रित एवं निवारक दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ भारत”, “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने स्वस्थ खानपान, फिट इंडिया मूवमेंट, योग एवं ध्यान, मोटापे में कमी तथा खाद्य तेलों के उपयोग में 10 प्रतिशत कमी लाने जैसे प्रयासों पर विशेष बल दिया।

सम्मेलन में मोटापा, गर्भावधि मधुमेह (गेस्टेशनल डायबिटीज), हृदय रोग जोखिम प्रबंधन तथा अन्य मेटाबॉलिक विकारों जैसी उभरती चुनौतियों पर गहन चर्चा की जा रही है। साथ ही रोगी शिक्षा, बहु-विषयक उपचार पद्धति तथा वैज्ञानिक शोध को व्यवहारिक चिकित्सा में लागू करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।

कॉन्क्लेव से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल JD-CON 2026 है, जो टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चों एवं उनके अभिभावकों के लिए समर्पित वार्षिक शैक्षणिक कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम में लगभग 250 बच्चों एवं परिवारजनों की सहभागिता अपेक्षित है। इसके माध्यम से शिक्षा, परामर्श एवं आपसी सहयोग के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

सहायक स्वास्थ्यकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए HDA 2026 में डायबिटीज एजुकेटर्स, नर्सों, डाइटिशियनों तथा बहु-विषयक स्वास्थ्य टीमों के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे समन्वित एवं प्रभावी मधुमेह देखभाल को बढ़ावा मिल सके।

सम्मेलन की एक विशेष उपलब्धि मधुमेह जागरूकता एवं शिक्षा सामग्री का 22 भारतीय भाषाओं में विकास है, जिससे देश के विविध समुदायों में स्वास्थ्य साक्षरता और रोगी सहभागिता को सुदृढ़ किया जा सके।

देश और विदेश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की सहभागिता से HDA 2026 वैज्ञानिक विचार-विमर्श, व्यावसायिक सहयोग और मधुमेह एवं मेटाबॉलिक चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मंच बन रहा है।

यह कॉन्क्लेव 21 जून 2026 तक चलेगा, जिसमें कार्यशालाएं, वैज्ञानिक सत्र, शोध प्रस्तुतियां, पुरस्कार समारोह, दीक्षांत कार्यक्रम, JD-CON गतिविधियां तथा अनेक शैक्षणिक पहलें आयोजित की जाएंगी।

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