एचडीए इंटरनेशनल कॉन्क्लेव 2026 के अंतर्गत 13वें जेडीकॉन 2026 में टाइप-1 डायबिटीज की समग्र देखभाल पर विशेष जोर
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नागपुर। 13वें हैलो डायबिटीज अकादेमिया (HDA) इंटरनेशनल कॉन्क्लेव 2026 के तीसरे एवं समापन दिवस पर टाइप-1 डायबिटीज (T1D) से पीड़ित बच्चों, किशोरों, युवाओं और उनके परिवारों को समर्पित 13वें जुवेनाइल डायबिटीज कॉन्क्लेव (JDCON 2026) का सफल आयोजन किया गया।
डायबिटीज केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (नागपुर) एवं डायबिटीज केयर एंड रिसर्च सेंटर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए अग्रणी मधुमेह विशेषज्ञों, स्वास्थ्यकर्मियों, मधुमेह शिक्षकों, रोगियों और उनके परिजनों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा, संवाद और सशक्तिकरण के माध्यम से टाइप-1 डायबिटीज से जुड़े लोगों को बेहतर जीवन प्रबंधन के लिए सक्षम बनाना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. विंकी रुघवानी के हाथों हुआ। इस अवसर पर डॉ. अंजू माहेश्वरी, डॉ. ऋषि शुक्ला तथा डॉ. राजीव चावला सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
दिनभर आयोजित वैज्ञानिक एवं रोगी-शिक्षा सत्रों को विशेष रूप से टाइप-1 डायबिटीज से जुड़े व्यक्तियों और उनके परिवारों की व्यावहारिक समस्याओं एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।
डॉ. ऋषि शुक्ला ने “Know Your T1D… Why Me?” विषय पर व्याख्यान देते हुए टाइप-1 डायबिटीज की प्रकृति, कारणों और रोग की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाया।
डॉ. सुनील गुप्ता ने “Insulin… Insulin… Insulin – Why Basal-Bolus?” विषय पर चर्चा करते हुए इंसुलिन थेरेपी, डोज़ के स्व-समायोजन, इंजेक्शन लगाने की सही तकनीक तथा बीटा-सेल ट्रांसप्लांटेशन एवं टेप्लिज़ुमैब जैसी नई प्रगतियों की जानकारी दी।
डॉ. मनीषा गुप्ता ने हाइपोग्लाइसीमिया और डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) पर अत्यंत उपयोगी सत्र प्रस्तुत किया, जिसमें इन जटिल स्थितियों की पहचान, निगरानी, उपचार और रोकथाम के उपाय बताए गए।
डॉ. अर्चना सारडा ने मधुमेह प्रबंधन में आधुनिक तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इंसुलिन पंप को 24×7 स्मार्ट डायबिटीज प्रबंधन का प्रभावी साधन बताया।
डॉ. कविता गुप्ता ने “क्या खाएं और क्या न खाएं?” विषय पर पोषण एवं आहार प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी तथा कार्बोहाइड्रेट काउंटिंग और भोजन नियोजन के महत्व को समझाया।
डॉ. ध्रुवी हसनानी ने डायबिटीज तकनीक और कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम (CGMS) में हो रही प्रगति पर चर्चा की और बताया कि आधुनिक तकनीक किस प्रकार रक्त शर्करा नियंत्रण और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकती है।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण यात्रा, विवाह, व्यायाम और स्कूल जीवन में टाइप-1 डायबिटीज विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही, जिसमें विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने वास्तविक जीवन की चुनौतियों तथा उनके व्यावहारिक समाधानों पर विचार साझा किए।
अंत में आयोजित “Meet the Basalins with JDs” संवादात्मक सत्र ने प्रतिभागियों में आत्मविश्वास, प्रेरणा और आपसी सहयोग की भावना को और मजबूत किया।
इसी दौरान हिप्पोक्रेट्स हॉल में HDA 2026 के उन्नत वैज्ञानिक सत्र भी जारी रहे। इनमें डॉ. सुनील अंबुलकर, डॉ. एस.बी. गुप्ता, डॉ. वी.के. भारद्वाज, डॉ. शालिनी जग्गी, डॉ. विजय नेगालूर, डॉ. राजीव चावला, डॉ. आशु रस्तोगी, डॉ. राजीव कोविल, डॉ. अर्चना सारडा, डॉ. ध्रुवी हसनानी और डॉ. अरविंद जगदीशा सहित अनेक राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। विषयों में एंडोक्राइन हाइपरटेंशन, टाइप-2 डायबिटीज में छिपे हृदय रोग की जांच, बीटा-सेल संरक्षण, गर्भावस्था के बाद मधुमेह, नवीन इंसुलिन उपचार पद्धतियां, वजन प्रबंधन, प्रतिरक्षा प्रणाली से बचने वाली बीटा-सेल्स तथा दवाओं से होने वाली हाइपरग्लाइसीमिया जैसी महत्वपूर्ण चर्चाएं शामिल थीं।
इस अवसर पर आयोजकों ने कहा कि “शिक्षा ही मधुमेह प्रबंधन की आधारशिला है” और JDCON देश में टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों को ज्ञान, तकनीक और सहकर्मी सहयोग के माध्यम से सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच बन चुका है।
HDA इंटरनेशनल कॉन्क्लेव 2026 के सफल समापन के साथ तीन दिनों तक चले इस भव्य वैज्ञानिक आयोजन में 200 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी सदस्यों की सहभागिता रही। बहुविषयक शिक्षा, वैज्ञानिक आदान-प्रदान और रोगी-केंद्रित प्रशिक्षण के माध्यम से इस सम्मेलन ने एक बार फिर मधुमेह शिक्षा एवं अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में नागपुर की पहचान को मजबूत किया।
