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साहित्यिकी में लघुकथा सम्मेलन


नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के साहित्यिकी में लघुकथा का गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। एक से बढ़कर एक लघुकथाओं ने सभी उपस्थितों का हदय जीत लिया। कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वंदना और अध्यक्ष के सत्कार के साथ हुआ। 

संयोजक हेमलता मिश्र मानवी और शादाब अंजुम ने अतिथि अध्यक्ष धृति बेडेकर का उत्तरीय से सत्कार किया। लघुकथा सम्मेलन के आरंभ में दीपक गुप्ता की अतुल्य ज्ञानदायी पाँच इंद्रियों में जंग पांच अंकीय लघुकथा से हुआ। 

माधुरी मिश्रा "मधु" ने स्वरचित उत्तम लघुकथा गरीब की सुंदर प्रस्तुति दी। शिवानी सिंह ने अकबर बीरबर से प्रभावित लघुकथा दी। विवेक असरानी ने पालक होते तो पालक नहीं बेचते मार्मिक लघुकथा साथ ही और एक लघुकथा सुनाई ।आराधना शर्मा ने सुमति नामक लघुकथा में दो बेटे ठाकुर के  कथा सुनाई। 

राजीव गायकवाड़ ने हास्य दृश्यांकन अभिनय के साथ मच्छर मच्छरी की लघुकथाएं दीं और पूरे कक्ष को आल्हादित कर दिया। मिलिंद बंसोड अनीता गायकवाड़ संजय सिरसाट के बाद आयुष मांडवकर ने मार्मिक लघुकथा और संस्मरण सुनाये। विवेक ठोंबरे ने दुनिया छोड़ जाये मगर माँ सबसे उपर है संस्मरण सुनाया। 

संतोष कुमार ने बाबा साहब की बात के साथ संस्मरण सुनाये। प्रशांत कुमार ने एक गिलास पानी बढ़िया लघुकथा दी। संचालन के दौरान मानवी ने  स्वरचित  लघुकथाएं सुनाईं और साहित्य की दुनिया में महनीय लघुकथाओं का इतिहास और महत्व बताया। मुहावरों कहावतों में समाविष्ट कथाओं को लघुकथा से जोडते हुये कक्ष को बाँधे रखा।

अध्यक्ष धृति ने लघुकथाओं की सरस और उत्तम समीक्षा की साथ ही  सत्र को अत्यंत सफल ज्ञानवर्धक और अभिनंदनीय बताया तथा अपनी स्वरचित लघुकथाएं सुनाकर कक्ष को रोमाचित कर दिया । संयोजक  हेमलता "मानवी" ने सभी उपस्थितों का आभार व्यक्त किया।
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