भगवान श्रीकृष्ण ने आसूरी प्रवृत्तियों का किया नाश
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नागपुर। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म पृथ्वी के भार हरण को हुआ था और उन्होंने कंस सहित अनेक अ सूरों का वध कर तत्कालीन समाज को आसुरी प्रवृत्तियों से मुक्ति दिलाई। बहुत कम उम्र में ही भगवान कृष्ण ने न केवल ब्रह्मा, इंद्र, वरूण आदि को अपने ऐश्वर्य की अनुभूती कराई अपितु अक्रूर, उद्धव, अर्जुन, कर्ण जैसे व्यक्तियों को सद्मार्ग पर चलने के उपदेश भी दिए। मथूरा में कंस का वध करने के बाद भी उन्होंने स्वयं राजा न बन शूरसेन जी को राजगद्दी पर बिठाया और उन्होंने कारागार में बंद अपने माता-पिता वसुदेव-देवकी को मुक्त कराया और उनसे उनको दिए गए कष्टों के लिए क्षमा याचना की। बाद मंे विश्वकर्मा को आज्ञा देकर द्वारकापुरी की रचना कराई और वहा। का प्रशासन संभाला। उक्त उद्गार श्री पं. विष्णु प्रसाद शास्त्री (विदिशा) ने गीता मंदिर में जारी भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन व्यक्त किए।
कथा के दौरान रूक्मिणी मंगल के माध्यम से भगवान कृष्ण के प्रथम विवाह का वर्णन संगीतमय बधाईयों के साथ किया गया। कु. एैशनी बुटौलिया एवं कु. आशु उपाध्याय ने कृष्ण रूक्मिणी का जीवंत अभिनय किया।
संगीत की प्रस्तुति श्री ऋषि श्रीवास्तव, अमित जयस्वाल, मनीष गौर एवं निलेश आदि संगीतकारों ने एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बनाया।
प्रारंभ में डॉ. कल्पेश उपाध्याय एवं डॉ. रागिनी उपाध्याय ने व्यासपीठ का पूजन किया। सर्वश्री दिनेश पाराशर, केसरकुमार शर्मा (कन्हान), रामस्वदेश शर्मा (ग्वालियर), नेतराम शर्मा (विदिशा), संदिप उपाध्याय (पिपरिया), अभिषेक बोहरे, गायक गोपाल अग्रवाल ने पुष्पहार द्वारा आचार्य श्री का स्वागत किया।
कार्यक्रम में सर्वश्री मोहनलाल, प्रकाश आचार्य, डॉ. विनोद तिवारी, राजेश पांडे, अनुराग शुक्ला, महेंद्र भागवत, जयराम दुबे, श्रीमती उमा उपाध्याय, डॉ. अर्पिता बुटौलिया आदि की उपस्थिति रही।


