क्या होगा आपके साथ : आईये जानते है मेष से मीन तक का फल
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गुरु करेंगे कर्क राशि मे गोचर..
बृहस्पति को ज्ञान, विद्या, धर्म, संतान, विवाह, गुरु- तत्व, धन- संचय, यश और मोक्ष का कारक माना गया है। जब किसी जातक की कुंडली में बृहस्पति बलवान होते हैं, तो उसे शिक्षा में सफलता, सुयोग्य जीवनसाथी, संतान- सुख, धर्मार्थ कार्यों में रुचि, और एक स्थिर जीवन- दर्शन प्राप्त होता है। आधुनिक भाषा में कहें तो बृहस्पति वह ग्रह हैं जो हमें सही और गलत का बोध देते हैं, जो किसी भी सभ्यता का आधार होता है। यही कारण है कि बृहस्पति का गोचर केवल भौतिक लाभ-हानि का प्रश्न नहीं, बल्कि जीवन की दिशा और चेतना के स्तर को प्रभावित करने वाला माना जाता है।
2 जून 2026, मंगलवार के दिन गुरुदेव बृहस्पति मिथुन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करेंगे।
यह गुरु का गोचर :
राजनीतिक रूप से इस अवधि को नीतिगत स्थिरता और दीर्घकालिक निर्णयों का काल माना गया है। न्याय- व्यवस्था में सुधार, कानून- निर्माण, और सामाजिक न्याय के प्रयास इस समय अधिक प्रबल होते हैं। आर्थिक रूप से देखें तो बृहस्पति धन-संचय और सम्पदा के कारक हैं, इसलिए इस अवधि में निवेश, बैंकिंग, और दीर्घकालिक संपत्ति-निर्माण में अनुकूलता रहती है। सबसे विशेष यह है कि कर्क स्त्री- राशि है और चंद्रमा द्वारा शासित है, इसलिए मातृ- शक्ति और स्त्री- संबंधी क्षेत्रों में विशेष उपलब्धियाँ देखी जाती हैं। यह काल केवल व्यक्तिगत कुंडलियों के लिए नहीं, अपितु सम्पूर्ण मानव- समाज के लिए एक आध्यात्मिक उत्थान का अवसर बनकर आता है।
नोट : जब बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में आते हैं, तो प्रभाव केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रहता। शास्त्रीय और ऐतिहासिक अध्ययनों के आधार पर, इस अवधि में सामाजिक, राजनीतिक, और सांस्कृतिक स्तर पर भी विशिष्ट प्रवृत्तियाँ दिखाई देती हैं। शिक्षा, ज्ञान- संस्थानों और गुरु- शिष्य परंपराओं की पुनः स्थापना का अवसर मिलता है, नए विद्यालय, शोध- केंद्र, और आध्यात्मिक संस्थान स्थापित होते हैं। धर्म- कार्य, मंदिर- निर्माण, और तीर्थ- यात्राओं में स्वाभाविक वृद्धि देखी जाती है।
मेष राशि :
जातकों के लिए बृहस्पति इस गोचर में चतुर्थ भाव में स्थित होंगे।
चतुर्थ भाव सुख, माता, गृह, वाहन और मानसिक शांति का है, और यहाँ उच्च गुरु अत्यंत शुभ संकेत दे रहे हैं।
पहले चरण (जून- अक्टूबर 2026) में नए घर की प्राप्ति, पुराने घर का नवीकरण अथवा घर में किसी शुभ कार्य का योग बनेगा। यदि कुछ अधूरा रह जाता है, तो वक्री- काल (जनवरी- अप्रैल 2027) में वह कार्य फिर से उठकर पूरा होगा।
माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा, और यदि लंबे समय से कोई पारिवारिक तनाव चल रहा था तो उसका शमन होगा। शिक्षा से जुड़े जातकों को विशेष लाभ मिलेगा और मन इन दस महीनों में अद्भुत रूप से स्थिर रहेगा। माता का सम्मान करना और उनसे आशीर्वाद लेना इस अवधि का सबसे बड़ा फल देगा।
वृषभ राशि :
वृषभ वालों के लिए गुरु का गोचर शुभ साबित होगा, आपके काम का विस्तार हो सकता है, वहीं समाज में नाम होगा. आपके यश और कीर्ति में वृद्धि की संभावना है. बिजनेस और नौकरी से लाभ होने की उम्मीद है खर्च बढ़ेंगे, लेकिन आमदनी होगी, अपने घर के बड़े लोगों और गुरु का सम्मान करें।
मिथुन राशि :
मिथुन राशि वाले जातक के लिए गुरु का यह गोचर मिथुन राशि वालों को धन लाभ दे सकता है. इस समय में आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और आप बचत करने में सफल होंगे. आय के नए स्रोत बना सकते हैं। इन 5 माह में आपको कोई बड़ी उपलब्धि मिल सकती है या फिर प्रमोशन हो सकता है. यह समय जीवन में तरक्की करने वाला है. स्वयं पर विश्वास रखें।
कर्क राशि :
चूंकि गुरु का गोचर इसी राशि में हो रहा है, इसलिए कर्क राशि वालों के लिए यह समय स्वर्णिम रहने वाला है. यदि आप लंबे समय से नई नौकरी खोज रहे हैं या वर्तमान जॉब बदलना चाहते हैं, तो 2 जून के बाद कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है.
सिंह राशि :
आपकी गोचर कुंडली के बारहवें भाव में गुरु बृहस्पति प्रवेश करने वाले हैं। ऐसे में इस राशि के जातक धार्मिक यात्राएं कर सकते हैं। इसके अलावा घर, वाहन या फिर संपत्ति खरीदने का सपना पूरा हो सकता है। विदेशी यात्रा और विदेश से जुड़े कार्यों में लाभ मिलेगा। घरेलू शांति बनी रहेगी। हालांकि खर्च बढ़ सकते हैं । सिंह राशि के लोगों के लिए करियर में सुनहरे अवसर लेकर आ रहा है यह गोचर। व्यापारियों को इस अवधि में तगड़ा मुनाफा हो सकता है और कोई बड़ी व्यावसायिक डील फाइनल हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों के लिए भी स्थान परिवर्तन (कैरियर ट्रांसफर) या मनचाहे प्रमोशन के योग बन रहे हैं.
कन्या राशि :
कन्या राशि जातकों के लिए बृहस्पति एकादश भाव में प्रवेश करेंगे, जो आय, मित्रता, सामाजिक संपर्क और इच्छा- पूर्ति का भाव है। एकादश भाव में उच्च गुरु एक अत्यंत शुभ योग बनाते हैं, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार जब लाभ-भाव में बृहस्पति हों, तो जातक की इच्छाएँ स्वाभाविक रूप से पूर्ण होने लगती हैं। पहले चरण में आर्थिक लाभ, करियर में पदोन्नति, नए अनुबंध और सामाजिक नेटवर्क में विस्तार के योग बनेंगे। वक्री- काल में पुराने मित्रों से पुनः संपर्क होगा, और जो संपर्क समय के साथ टूट गए थे, वे जुड़ेंगे। मार्गी काल में आपके सभी प्रयासों का ठोस फल मिलेगा। इन दस महीनों में अपने प्रोफेशनल नेटवर्क को सक्रिय करना और नए प्रोजेक्ट आरंभ करना श्रेयस्कर है।
तुला राशि :
तुला जातकों के लिए बृहस्पति दशम भाव अर्थात् कर्म भाव में आएँगे। दशम भाव करियर, यश, पिता और सामाजिक प्रतिष्ठा का है, और जब यहाँ उच्च गुरु विराजमान हों, तो यह करियर में बड़ी छलाँग का योग बनता है। पहले चरण में पदोन्नति, नई जिम्मेदारियाँ, सरकारी क्षेत्र में सफलता, अथवा सार्वजनिक मान्यता मिलने के संकेत प्रबल हैं। वक्री-काल में जो करिअर -संबंधी निर्णय अधूरे रह गए थे, वे पुनः सामने आएँगे, और कोई पुरानी पदोन्नति या नौकरी का अवसर पुनर्जीवित होगा। दशम भाव में बृहस्पति का एक विशेष रहस्य यह है कि वे पिता- तुल्य आशीर्वाद से अधिक प्रसन्न होते हैं, इसलिए इस अवधि में पिता तथा वरिष्ठ जनों का विशेष सम्मान करना चाहिए।
वृश्चिक राशि :
वृश्चिक जातकों के लिए बृहस्पति नवम भाव में प्रवेश करेंगे, जो भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा और दीर्घ-यात्रा का भाव है। शास्त्रों ने नवम भाव में बृहस्पति की स्थिति को राजयोग- तुल्य बताया है, और जब वही बृहस्पति उच्च भी हों, तो यह योग जीवन- परिवर्तक हो सकता है। पहले चरण में उच्च शिक्षा में सफलता, विदेश- यात्रा, धर्म- कार्य, और गुरुजनों से अप्रत्याशित आशीर्वाद के विशेष योग बनेंगे। वक्री- काल में पुराने आध्यात्मिक गुरु अथवा शिक्षक से पुनः संपर्क होगा, और कोई अधूरी तीर्थयात्रा संपन्न होगी। यदि आपने कभी सोचा था कि कोई बड़ा संत अथवा गुरु जीवन में आएँ जो दिशा दें, तो यही समय है। इस सम्पूर्ण काल का उपयोग दीर्घकालिक शिक्षा, पुस्तक-लेखन, शोध-कार्य अथवा किसी पवित्र तीर्थयात्रा में करना अनेक गुना फलदायी होगा।
मकर राशि :
मकर जातकों के लिए बृहस्पति सप्तम भाव में प्रवेश करेंगे, जो विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी का भाव है। उच्च गुरु यहाँ इन क्षेत्रों में अद्भुत शुभ संकेत देते हैं। पहले चरण में अविवाहित जातकों के विवाह तय होने की प्रबल संभावना है, और जो रिश्ता इस अवधि में बँधेगा, उसमें एक विशेष स्थायित्व होगा। यदि किसी कारणवश पहले चरण में विवाह की बात अधूरी रह जाती है, तो वक्री-काल में वह बात फिर से उठेगी और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ेगी। विवाहित जातकों के लिए जीवनसाथी से संबंधों में नई गर्माहट और गहराई आएगी। व्यावसायिक साझेदारी से बड़े लाभ की संभावना है।
यदि विवाह अथवा कोई महत्वपूर्ण साझेदारी करनी है, तो इन दस महीनों से अधिक उत्तम काल कोई और नहीं हो सकता।
कुंभ राशि :
कुंभ जातकों के लिए बृहस्पति षष्ठ भाव में आएँगे, जो शत्रु, रोग और ऋण का भाव है। यद्यपि कुछ ज्योतिषी इसे चुनौतीपूर्ण मानते हैं, परंतु शास्त्रीय परंपरा कहती है कि उच्च गुरु जब छठे भाव में हों, तो वे अपने प्रभाव से शत्रुओं पर विजय, रोगों से मुक्ति, और ऋण का अंत लाते हैं। पहले चरण में यदि कोई पुराना मुकदमा चल रहा है, तो जीत के योग प्रबल हैं। यदि लंबी बीमारी है, तो स्पष्ट सुधार आएगा। वक्री- काल में पुराने स्वास्थ्य- संबंधी मामले पुनः उठेंगे, परंतु इस बार उनका स्थायी समाधान निकलेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता, चिकित्सा- क्षेत्र से जुड़े जातकों को विशेष लाभ, और नौकरी में नई जिम्मेदारियों के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना और नियमित व्यायाम को दिनचर्या का अंग बनाना अत्यंत शुभ फल देगा।
मीन राशि :
मीन जातकों के लिए बृहस्पति पंचम भाव में प्रवेश करेंगे, जो विद्या, संतान, प्रेम और रचनात्मकता का भाव है। यह उनके लिए सर्वोत्तम स्थितियों में से एक है। उच्च गुरु यहाँ संतान-सुख, विद्या- प्राप्ति, प्रेम-संबंधों में सफलता और रचनात्मकता के चरमोत्कर्ष का योग बनाते हैं। पहले चरण में निःसंतान दंपतियों के लिए यह अवधि अत्यंत शुभ मानी जाती है, और शास्त्रीय अनुभव कहता है कि उच्च गुरु के पंचम भाव में आने पर अनेक दंपतियों को वर्षों के बाद संतान-सुख प्राप्त होता है। वक्री- काल में पुराने प्रेम-संबंध पुनर्जीवित होंगे, और कोई अधूरी रचनात्मक परियोजना फिर से आरंभ होगी। विद्यार्थियों को परीक्षाओं में अप्रत्याशित सफलता मिलेगी, और कलाकारों, लेखकों तथा रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े जातकों के लिए ये दस महीने स्वर्णिम काल हैं।
- पं. करण गोपाल पुरोहित (शर्मा)
अंबा ज्योतिष कार्यालय, पुराना कॉटन मार्केट
अमरावती
मो. 9049451525 / 8669165178