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तबला वादन, नाद विज्ञान एवं ज्योतिषीय तत्त्वों के अंतर्विषयक अध्ययन हेतु डॉ. प्रशांत गायकवाड को मानद डॉक्टरेट एवं सह्याद्री रत्न सम्मान


नागपुर/पुणे। भारतीय शास्त्रीय संगीत, नाद विज्ञान,  ज्योतिष एवं सांस्कृतिक शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रख्यात तबला वादक, शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता डॉ. प्रशांत मनोहर गायकवाड को पुणे के पत्रकार भवन में आयोजित भव्य समारोह में नालंदा NIIRC यूनिवर्सिटी, बिहार द्वारा आनरेरी डॉक्टरेट अवार्ड(Honoris Causa) तथा नालंदा भारत गौरव सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर नालंदा फाउंडेशन द्वारा आयोजित राज्यस्तरीय सह्याद्री रत्न पुरस्कार सोहळा 2026 में उन्हें प्रतिष्ठित ‘सह्याद्री रत्न सम्मान’ भी प्रदान किया गया।

यह सम्मान उन्हें तबला वादन, नाद एवं ज्योतिषीय तत्त्वों का मानव जीवन पर प्रभाव : एक अंतर्विषयक (इंटरडिसिप्लीनरी) अध्ययन विषय पर किए गए उनके दीर्घकालीन शोध, सांस्कृतिक योगदान तथा समाजोपयोगी कार्यों के लिए प्रदान किया गया। यह सम्मान प्रसिद्ध अभिनेता सुनील नाना गोडबोले एवं प्रख्यात विधि विशेषज्ञ कायदेतज्ज्ञ पी. टी. गांधी के करकमलों से प्रदान किया गया।

डॉ. गायकवाड भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठित बनारस घराना परंपरा से जुड़े हैं। उन्हें संगीत की शिक्षा स्वर्गीय पं. अभिजीत कुमार मजूमदार तथा पद्मविभूषण पं. किशन महाराज जैसे महान गुरुओं से प्राप्त हुई। वे वर्तमान में भवन्स भगवानदास पुरोहित विद्या मंदिर, सिविल लाइन्स, नागपुर में संगीत शिक्षक (तबला) के रूप में कार्यरत हैं।

विशेष उल्लेखनीय है कि डॉ. गायकवाड का परिवार पीढ़ियों से वाद्ययंत्र निर्माण की परंपरा से जुड़ा रहा है। इस सांगीतिक विरासत ने उनके व्यक्तित्व एवं शोध दृष्टि को समृद्ध किया है। संगीत, नाद विज्ञान एवं ध्वनि के प्रभावों पर उनके अध्ययन को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना प्राप्त हुई है।

डॉ. गायकवाड गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर हैं। उन्होंने 324 घंटे निरंतर तबला वादन कर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने भारतीय संस्कृति एवं ज्योतिष के माध्यम से 47 देशों के प्रतिनिधियों को भारतीय कला एवं संस्कृति का प्रशिक्षण देकर एक अन्य विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया है।

शैक्षणिक रूप से वे संगीत विषय में NET उत्तीर्ण, संगीत विशारद एवं संगीत अलंकार उपाधिधारक हैं। उनके मार्गदर्शन में अनेक विद्यार्थियों ने विशारद, अलंकार एवं पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। उनके 6 विद्यार्थियों को CCRT फेलोशिप प्राप्त हुई है तथा अनेक शिष्यों ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं।

डॉ. गायकवाड अब तक 24,000 से अधिक विद्यार्थियों को निःशुल्क संगीत एवं सांस्कृतिक शिक्षा प्रदान कर चुके हैं। भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं प्रसार में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार की प्रतिष्ठित योजना “हर कंठ में भारत” हेतु भी उनका चयन किया गया है।

सम्मान प्राप्त करने के पश्चात डॉ. प्रशांत गायकवाड ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, पूज्य गुरुओं स्वर्गीय पं. अभिजीत कुमार मजूमदार एवं पद्मविभूषण पं. किशन महाराज को दिया। साथ ही उन्होंने भारतीय विद्या भवन के अध्यक्ष श्री राजेंद्र पुरोहित, निदेशक श्रीमती अन्नपूर्णी शास्त्री तथा प्राचार्या श्रीमती लीना वर्गीज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके  सहयोग से ही वे संगीत, शिक्षा, संस्कृति एवं शोध के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर पा रहे हैं।

डॉ. गायकवाड को प्राप्त यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों का गौरव है, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत, नाद विज्ञान, ज्योतिष तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणाली की वैश्विक प्रतिष्ठा का भी प्रतीक माना जा रहा है। विदर्भ सहित देशभर के संगीत एवं सांस्कृतिक जगत में इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया जा रहा है
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