Loading...

आई विल फाईट बैक


पिछलेकुछ दिनों से घरमें घूमते फिरते, काम करते हुए साक्षी यह पंक्तियां गुनगुनाती रहती---
“डोंट ट्राय टू चेंज मी, डोंट ट्राय टू टर्न माई सेल्फ ,
अगेंस्ट माई सेल्फ, बिकाज़ आई विल फाईट बैक।
(मुझे बदलने का प्रयत्न ना करें,अपने ही विरुद्ध बदलने का प्रयत्न ना करें, क्योंकि मैं इसके लिए लडूंगी । )
 साक्षी यह पंक्तियां दोहराती और मम्मा की ओर देखती, मुस्कुराती ।

मम्मा मन ही मन सोचती न जाने यह लड़की कहां से यह सुन, पढ़ आई है , और बार बार दोहराती है, मुझे देख मुस्कुराती है ।न जाने क्या है इस लड़की के मन में? मां बेटी को समझने की कोशिश करती । ।पर एक दिन बेटी ने खुद ही अपनी मम्मा को समझा दिया…..
“ देखो मम्मा मैं हैदराबाद जाऊंगी । कितनी मुश्किल से मिलता है उस कालेज में एडमिशन । और एक आप हैं कि इतनी आसानी से एडमीशन मिलने के बावजूद मुझे जाने देना नहीं चाहती ।आखिर मेरे करियर का सवाल है मम्मा । “
       
सो तो ठीक है बेटा ।पर अब तक तुम घर से इतनी दूर गई ही नहीं ।फिर हास्टल में रहना , वहां का खाना…..
मम्मा की बात बीच में ही काटते हुए साक्षी ने कहा…
“ सच बताएं माँ क्या केवल यही कारण है मुझे वहां ना जाने देने का ?
या फिर यू आर अफ्रेड आफ सम थिंग एल्स ।“
मम्मा ने अपने आप को सम्हालते हुए कहा “ देखो बिटिया मैं चाहती तो हूं कि तुम खुब पढो़, , खूब उन्नति करो पर…..

पर क्या मां? यही कि तुम यहीं की कालेजमें एडमीशन ले लो । ।घर की सब सुविधाएं तो रहेंगी ही साथ में कोई चिंता भी नहीं । न जाने कैसा तो जमाना आ गया है ,हर समय डर बना ही रहता है..
मम्मा की बात को बीच में ही काटते साक्षी ने कहा …
“ अचछा तो माँ अब आप सच बोल रही है , वास्तव में आप डरी हुई हैं आज के जमाने से..
हां बेटे मैं तुम पर तो पूरा विश्वास करती हूं ,पर इस ज़माने का क्या? दिन रात तो न जाने कैसी कैसी डरावनी , खौफनाक वारदातें उगलते रहते हैं ये न्यूज़ चैनल ।पेपर पढो़ तो वही, टी. वी .देखो न्यूज़ सुनो तो वही और किसी से बातें करो तो भी वही ।बलात्कार ,रेप ,गैंगरेप,छेड़खानी ।नन्ही बच्चियां बच पाती हैं इनकी काली करतूतों से न जवान और न कोई प्रौढा.स्त्री ।

सब कुछ देख सुनकर दिल दहल जाता है ,मुट्ठियां भिंच जाती हैं ,क्या करें, क्या न करें? अब तो भरोसा शब्द भी भरोसे के लायक नहीं रहा बेटा । समाज के रक्षक ,पहरेदार, जज, नेता पत्रकार, और तो क्या करोडों लोगों की श्रद्धा के केंद्र संत महात्मा भी कहां रहे भरोसे के लायक?निर्भया के हादसे के बाद से तो जैसे बाढ़ आ गई है देश में दुष्कर्मो की ।न समाज का डर, न उपर वाले का न कानून का ! रिशःतों की मर्यादा तो जैसे रह ही नहीं गई है । कौन सा रिश्ता पवित्र रह गया है बता? बाप बेटी का? भाई बहन का ? गुरु शिष्या का? बेटी मेरी तो रुह कांप जाती है । पापा होते तो….
हां माँ पापा होते तो जरूर ही जाने देते । और हां तब मैं भी… पर अब अकेले किसी मुसीबत का सामना …… ,ं नहीं बेटी…

    बस यहीं तो हम गल्ती करते हैं न मम्मा । ये सच है कि मीडिया के कारण दुष्कर्म की ये घटनाएं सामने आने लगी हैं, और अब पीडि़ताओं ने भी बेखौफ इनके बारे में बताना शुरु कर दिया है । पर अब आपकी ही तरह हर मां यदि सोचना शुरू कर दे तो क्या होगा लड.कियों की पढा़ई का ?उनके करियर का? उनके भविष्य का? क्या इन सबके डर से हमें दरवाजे बंद कर घर में बैठ जाना है ? पिछले युग में जाना है ? या लड़ना है इन बुराइयों से? हमें लड़ना होगा मां ,हमें लड़ना ही होगा । माना यह बहुत ही कठिन काम है । सदियों से चली आ रही पौरूषीय मानसिकता को बदलना ,,पुरुषीय वर्चस्व को तोड़ना, देश की आजादी की लडा़ई से भी लंबी लडा़ई है माँ । पर हिम्मत व धैर्य से हमें यह लडा़ई लडंनी ही होगी । और हम लडे़गे । अब तक न जाने कितनी लड़कियों ने अपनी इज्जत आबरू खोई है, कितने माता पिता ने अपनी बेटियां खोई हैं, हम यह सब व्यर्थ नहीं जाने देंगे मां ।हम लडे़गे, लडे़ंगे ह…म।

      बेटी के विचारों को सुन माँ अंदर तक हिल गई थी , कांप गई थी ।जब बेटी ने कहा—
“ मम्मा मान लो मुझपर ही यह मौका आ गया तो मैं लडू़ंगी अपनी सुरक्षा के लिए , अपनी अस्मिता के लिए ।
 “ ओ.. ओ तु चुप कर, शुभ शुभ बोल, भगवान न करे किसी की भी बेटी के साथ ऐसा हो । और बोलते बोलते माँ ने अपना हाथ बेटी के मुख पर रख दिया । किंतु मुख पर हाथ रखकर माँ केवल बेटी का मुख ही बंद करवा पाई ।क्या बेटी के पक्के ईरादे बदल पाई ? बेटी ने तो मन ही मन पक्का निश्चय कर रखा था । अंततः माँ को मनाने में वह सफल भी हो गई । माँ स्वयं साथ जाकर बेटी के कालेज में एडमीशन , हास्टल ,खाने की व्यवस्था, वहां का वातावरण आदि का जायजा लेकर सबकुछ ठीक ठीक हो इस प्रार्थना के साथ लौट आई। ।
          अब छुट्टियों में साक्षी आती , कुछ दिन मां के पास रहती व वापस चली जाती । मां खुश थी कि सबकुछ ठीक चल रहा था । इसबार जब साक्षी आई तो अधिक समय मां के पास रही ।परीक्षा हो चुकी थी । अतः फुरसत में माँ से होस्टल , फ्रेंड्स , पढाई, अपनी टीचर्स आदि सबके बारे में खूब बातें की ।। साथ ही मां बेटी ने मिलकर खूब शापिंग भी की । इन सब में समय कहां ,कैसे बीत गया कुछ पता ही नहीं चला । और आज जाने का दिन भी आ गया ।सुबह से ही माँ ने उसकी बनाई लिस्ट के अनुसार एक एक वस्तु इकट्ठी करना शुरू कर दिया । घूम घूम कर याद कर कर माँ एक एक वस्तु रखती जा रही थी । सामान बहुत होता जा रहा था ।इसके लिए साक्षी माँ को टोकती भी जा रही थी । पर माँ तो माँ ठहरी उसने वह सब पैक किया जो वह देना चाहती थी । अंततः ट्रेन का समय हुआ व मांबेटी दोनों निश्चित ससमय पर स्टेशन
 पहुंची । गाडी़ समय से प्लेटफार्म पर लगी ।साक्षी ने रिजर्व कंपार्टमेंट के बाहर लगी लिस्ट से अपना नाम ,बर्थ आदि कन्फर्म कर सामान ठीक से अंदर रख दिया । अभी ट्रेन छूटने में कुछ समय था अतः मां भी अंदर आ गई । उन्होंने आसपास निगाह दौडा़ई । देखा आसपास कौन पैसेंजर हैं ,कैसे हैं । वहां बैठी एक बुजुर्ग महिला की ओर मुखातिब हो मां ने कहा ..।

 “ यह मेरी बेटी है , हैदराबाद जा रही है , जरा इसका ध्यान रखियेगा ।। साक्षी को मां का यह कथन पसंद नहीं आया ,पर चुप रही । बस मां से कहा .. “ देखो मम्मा अब समय हो गया है , अब आप नीचे उतर जाईये ।। और देखो ठीक से घर जाना । अपना ध्यान रखना , बाय मम्मा….. मैं पहुंचते ही फोन कर दूंगी ।और ट्रेन चल पडी़ ।
        जैसा कि हमेशा होता है, ट्रेन चलने से पूर्व तो सब एक दूसरे की ओर अजनबियों की तरह देखते हैं, और बाहरी हुलिया देखकर एक दूसरे के बारे में मन हीमन जजमेंट भी कर लेते हैं । फिर धीरे धीरे औपचारिक बातों के साथ परतें खुलती जाती हैं ।ट्रेन जैसे जैसे आगे बढ़ती जाती है पहचान भी आगे बढ़ती जाती है । कौन कहां जा रहा है ,क्या करता है से होते होते व्यक्तिगत बातों ,समस्सयाओं तक पहुंच जाती है ।। यहां भी सब महिलाएं बातों में इतनी मशगूल हो गईं थी कि समय का पता ही नहीं चला ।

बातों में कितने घंटे बीत गये कौन जान सका? ध्यान भंग तो तब हुआ जब ट्रेन अचानक बीच जंगल में ही रुक गई ।। कंपार्टमेंट में हलचल हुई। । ।सब उठ करजानने का प्रयत्न कर रहे थे आखिर क्या हुआ । पता चला कि आगे एक्सीडेंट हुआ है और नहीं कहा जा सकता गाडी़ कितने घंटे इसी जगह खडी़ रहे । कितनी भी लेट हो सकती है जानकर सब चिंतित थे । सबकी अपनी अपनी चिंताएं थीं । ड्युटी पर पहुंचने की, , छुट्टी की ,तो बच्चों की ।सबने अपने अपने चिंता निवारण यंत्र निकाले ,व आदेश, निर्देश, , रिक्वेस्ट अपने घरों तक पहुंचाए । ।और महिलाएं आराम की मुद्रा में ,तो कुछ लेट ही गईं । साक्षी ने अपनी एक नावेल निकाली और अपर बर्थ पर जाकर लेटे लेटे पढ़ने लगी । पढ़ते पढ़ते कब आंख लगी पता ही नहीं चला ।

           वहा बैठी महिलाओं का ध्यान भंग तो तब हुआ जब दो नौजवान सामने की अपर बर्थ पर आकर बैठ गये । इनमें से एक के हाथ में तो नशे की बोतल दिखाई दे रही थी ,जो बहकी बहकी ,उटपटांग सी बातें कर रहा था ,तो दूसरा उसे पीने के लिए बहकाता जा रहा था ।। दोनों का बेहुदा बैठने का ढ़ग , व अभद्र भाषा से वहां बैठी सब महिलाएं तो घबरा गईं कुछ के मुख से चीखें ही निकल गई । मारे डर के सब एक दूसरे से सट कर ,सिकुड़ कर बैठ गईं ।इनमें से एक दो महिलाओं नेउठकरर पूरे कंपार्टमेंट में घूमकर वहां नियुक्त पुलिस को ढूंढने की कोशिश की । किंतु पुलिस को वहां न पाकर आपस में बड़बडा़ने लगीं ।कंपार्टमेंट में हलचल तो हुई किंतु बहुत से लोग एक्सीडेंट की जगह देखने चले गये थे और जो कोई बैठे थे उन्हें इससे कुछ लेना देना नहीं था । नहीं उठकर स्थिति को समझने का प्रयत्न ही किया ।

संभवतः उन महिलाओं में उनकी कोई मां बहन ,बेटी नहीं थी इसीलिए ।अस्तु ।असहाय निराश ,लाचार महिलाएं ,जब पूरे कंपार्टमेंट में घूमकर वापस आई तो क्या देखती हैं किअबतक सामने की अपर बर्थ पर बैठा शराबी अब कूदकर उस बर्थ पर आ गमया है जहां साक्षी पढ़ते पढ़ते सो चुकी थी । पहले वह उसके पैरों के पास बैठा , कभी पैर उपर करता तो कभी नीचे झुलाता ।जो नीचे बेठी महिलाओं के सिरपर लग रहे थे ।। डरी ,घबराई, सहमी महिलाएंसांसें थामकर सब देख रही थीं ।अब नशे में धुत्त वह शराबी गाता भी जा रहा था ,” मैं नशे में हूं,, पिलाई गई है…. और बर्थ पर लेटी साक्षी के बाजूमें लेटकर उसे स्पर्श करने का प्रयत्न करने लगा। स्पर्श से अत्यंत घबराकर जैसे हीसाक्षी ने आंखें खोली, उसे जोर से धक्का मार वह नीचे कूद पडी़ ।तुरंत नहीं समझ पाई यह क्या हुआ? और उसे इस हालत में देख बाकी महिलाएं भी चिल्लानलगीं ।तो कोई जोर से रोने भी लगीं । अब तक पूरा कंपारँटमेंट चीखें, चिल्लाहटें रुदन ,क्रंदन से गूंज गया ।

 किंतु वहां न तो पुलिस पहुंची न आजू बाजू से कोई मर्द ! किंतु अबतक गहरे मानसिक आघात से उबर कर साक्षी ने अपनी ओढ़नी कमर में कस ली थी । और उसे इस रौद्र रूप में देखकर अब बाकी महिलाओं को जैसे एकाएक हिम्मत आ गई थी । झांसी की रानी बनी महिलाओं की इस फौज में से किसी ने लड़के के दोनों पैर ,किसी ने हाथ , जोरों से खींचे ।व घसीटते ,घसीटते उसे नीचे उतारा । इस बीच उसका दोस्त भी चिल्लाने लगा अरे रे ये आप क्या कर रही हैं ? एक साथ सब महिलाएं बोली देखो अब हम क्या करते हैं। सब महिलाए अब उसे कंपार्टमेंट के उस छोर तक ले गईं जहां टाईलेट था । जोर से धक्का मार साक्षी व अन्य महिलाओं ने उसे अंदर बंद किया । ताकि रेल्वे पुलिस को सूचित कर उसे उसे उसके हवाले किया जाय । और साथ में वहां नियुक्त पुलिस की भी जो ड्यूटी पर नहीं था ।

      साक्षी इस समय सच में झांसी की रानी का अवतार बनी थी । पूरे जोश ,व होशो हवाश में हिम्मत से वह वहां अन्य महिलाओं के साथ खडी़ थी टाईलेट के दरवाजे के पास और गुनगुना रही थी,
 “डोंट ट्राय टू चेंज मी, डोंट ट्राय टू टर्न माय सेल्फ ,
अगेंस्ट माय सेल्फ, बिकाज़ आई विल फाईट बैक

- प्रभा मेहता
   नागपुर, महाराष्ट्र 
   मो. ९४२३० ६६८२०
समाचार 8172175157693738009
मुख्यपृष्ठ item

ADS

Popular Posts

Random Posts

3/random/post-list

Flickr Photo

3/Sports/post-list