अंतरंग में हिंदी के साहित्यकारों की जयंती - पुण्यतिथि एवं परिचर्चा तथा पुस्तकों का आदान - प्रदान
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नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम अंतरंग महिला चेतना मंच के मासिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में हिंदी के महान साहित्यकारों की जयंती एवं पुण्यतिथि, चलती फिरती लाइब्रेरी के अंतर्गत पुस्तकों का आदान - प्रदान एवं ‘हमारा मायका - मोर भवन’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना तथा मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन से की गई। मुख्य अतिथि थीं वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार श्रीमती बरखा माथुर। उनका स्वागत अंग वस्त्र तथा स्मृति चिन्ह देकर किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन शगुफ़्ता यास्मीन ने किया।
परिचर्चा में डॉ कामिनी शुक्ला, उमा हरगन, रेशम मदान, सुमन अनेजा, जिगिशा शाह आदि ने मोर भवन को अपना मायका बताते हुए आत्मीय एवं भावुक विचार व्यक्त किए। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, शरद जोशी, सुमित्रानंदन पंत , संत कबीरदास आदि की जयंती तथा बाबू बनारसीदास चतुर्वेदी, राही मासूम रज़ा, कैफ़ी आज़मी, हबीब तनवीर आदि साहित्यकारों की पुण्यतिथि पर उनका जीवन परिचय, कालजयी साहित्य पर चर्चा, पुरस्कारों का ज़िक्र एवं कविताओं और गीतों की प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम में हेमलता मिश्र मानवी, निर्मला पांडे , पूनम मिश्रा, रूबी दास, लक्ष्मी वर्मा, सुविधि जायसवाल, माया शर्मा, किरण हटवार, सुषमा भांगे, छाया जायसवाल, संतोष बुद्धराजा, शीतल सोनी, नंदिता सोनी, विधि ग्वालानी, अनीता गुप्ता, ममता विश्वकर्मा, सुजाता दुबे, प्रतिभा भोले, सरिता त्रिवेदी, सरिता लाकुडकर, रंजना देशमुख, शशि अभिचंदानी, सुषमा शर्मा, नंदिनी सुदामल्ला आदि ने भाग लिया।
तत्पश्चात अनूठी पहल, चलती - फिरती लाइब्रेरी में पुस्तकों का आदान-प्रदान श्रृंखला के अंतर्गत सखियों ने आपस में पुस्तकों का आदान- प्रदान किया। अपने प्रभावी वक्तव्य में बरखा माथुर ने पढ़ने और लिखने को एक अच्छी आदत कहते हुए साहित्यकारों का समाज के प्रति दायित्व एवं सामाजिक बुराइयों को मिटाने तथा पवित्र भारतीय संस्कृति को संजोने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने हेतु लेखन की सलाह दी। उन्होंने कार्यक्रम की भूरी भूरी प्रशंसा की। द्वेष को दूर कर प्रेम द्वारा दुनिया को सुंदर बनाने की सलाह दी। साहित्य को समर्पित एक अच्छा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।


