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नव सृजन : प्राचीन साहित्य संस्था का पुनर्जीवन


नागपुर। शहर की एक चर्चित एक प्राचीन साहित्य संस्था का पुनर्जीवन आज रवि भवन के परिषद सभागृह में संपन्न हुआ. संदर्भ था डॉ विनोद और राजेश आसुदानी के पिताश्री की पुण्यतिथि के साथ ही याद बशीर बद्र की यादों को उनके शेरों में पिरोकर उन्हें श्रद्धांजली पेश कर काव्य गोष्ठी का आगाज़ हुआ.

उपस्थिति साहित्यकारों में प्रमुखता से, डॉ सागर खादीवाला ने अपनी एक पुरानी कविता पेशकर सदन को बांध लिया. संदीप अग्रवाल ने अपने साक्षात्कार के संस्मरणों में जगजीत सिंह और गुलजार को याद किया, सरोज व्यास ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में गज़लों को तरन्नुम में पेश किया अविनाश बागड़े ने अपनी एक ताज़ा ग़ज़ल से अपनी बात रखी. 

मेघा अग्रवाल ने पानी पर अपना काव्य प्रस्तुत किया राम हबलानी राजेंद्र चान्दोंरकर ने अपनी कविता के विषय में साहित्य की व्याख्या को तरजीह दी.और सौरभ सिंह और राम हबलानी ने अपनी अपनी कवितायें प्रस्तुत की. डॉ विनोद आसुदानी और राजेश आसुदानी  की गज़लों से कार्यक्रम को पूर्णता प्राप्त हुई. ये आयोजन प्रत्येक माह के अंतिम सप्ताह में करने की बात नव सृजन मंच ने घोषित की।

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