'दीनानाथ ते हृदयनाथ' - सुरों की जादूगरी
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मंगेशकर पर्व का संगीतमय सफर हुआ उजागर
नागपुर। मंगेशकर परिवार साक्षात देवी सरस्वती के वरदहस्त से लाभान्वित परिवार है। पूरे परिवार द्वारा संगीत सेवा को समर्पित किया जाना एक दुर्लभ उदाहरण है। इस परिवार के मुखिया मास्टर दीनानाथ मंगेशकर ने नींव रखी, चुनौतीपूर्ण कठिन परिस्थितियों में लता दीदी ने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया और अन्य भाई-बहनों ने अपनी संगीत सेवा से एक-एक ईंट रखकर इतिहास रच दिया।
'मंगेशकरांची गाणी' 'दीनानाथ ते हृदयनाथ' इस सुश्राव्य कार्यक्रम के माध्यम से नागपुर के प्रतिष्ठित एवं दिग्गज गायक वादक कलाकारों ने 'दीनानाथ ते हृदयनाथ' का यह संगीतमय सफर गीतों के माध्यम से उजागर करने का दायित्व सफलतापूर्वक निभाया। स्वर साधना, लोकतंत्र सेनानी संघ एवं ज्येष्ठ नागरिक महामंडळ विदर्भ के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम शुक्रवार दिनांक 10 जुलाई 2026 को सायंटिफिक सभागृह में आयोजित किया गया था।
मंगेशकरों के कुलदेवता मंगेश की आराधना आकांक्षा चारभाई ने 'मागे उभा मंगेश पुढे उभा मंगेश' गीत से करते हुए कार्यक्रम का सुरेल शुभारंभ किया। 'संन्यस्त खड्ग' नाटक के पटदीप राग में दीनानाथ द्वारा गाया गया नाट्यगीत 'मर्मबंधातली ठेव ही' स्वर साधना अध्यक्ष श्याम देशपांडे ने अत्यंत तैयारी के साथ प्रस्तुत कर महफिल में रंग भर दिया। रसिका करमाळेकर ने 'मी मज हरपून बसले गं' एवं 'मानापमान' नाटक का 'युवती मना' पद तथा 'जीवलगा राहिले दूर घर माझे' को उत्कृष्ट रूप से गाकर श्रोताओं से खूब दाद बटोरी।
'या चिमण्यांनो परत फिरा रे' गीत छाया वानखेडे ने अत्यंत आर्तता एवं भावपूर्ण ढंग से गाकर 'वन्समोर' लिया। 'मलमली तारुण्य माझे' गीत आर्या देशपांडे ने दमदार तरीके से प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त 'धुंदी कळ्यांना', 'तू तेंव्हा तशी', 'लाजून हासणे', 'स्वप्नात साजणा येशील का', 'तुम्हावर केली मी मर्जी बहाल', 'अखेरचा दंडवत' जैसे गीत सुचित्रा कातरकर, पद्मजा सिन्हा, अश्विनी लुले, आशीष घाटे, विजय देशपांडे द्वारा अत्यंत मधुरता से प्रस्तुत किए गए।
कवयित्री सुचित्रा कातरकर ने लता दीदी पर आधारित कविता प्रस्तुत कर अपने दैवत को भावपूर्ण स्वर सुमनांजलि अर्पित की। सिंथेसायझर पर आनंद मास्टे, तबले पर मोरेश्वर दशसहस्त्र, आशीष घाटे एवं तालवाद्य पर विक्रम जोशी ने गीतों एवं कविताओं को स्वरसाज चढ़ाते हुए उत्कृष्ट साथसंगत की। प्रा. उज्ज्वला अंधारे ने कार्यक्रम का बहारदार एवं सुव्यवस्थित निवेदन किया।
कार्यक्रम के पूर्वार्ध में लेखिका सुचित्रा कातरकर की पुस्तक 'पाऊस.. काही संदर्भ' का विमोचन मान्यवरों के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंच पर सामाजिक कार्यकर्ता सुवर्णरेखा पाटील, डॉ. अविनाश तेलंग, मीनल येवले, श्याम देशपांडे, सुचित्रा कातरकर, बिंदुमाधव देव, जयंत पुराणिक, प्रदत्त तांडेकर एवं सचिन सुकळकर उपस्थित थे। दर्दी श्रोताओं से खचाखच भरे सभागृह में मधुर गीतों का स्वरानंद एवं श्रवणानंद लूटा गया।
