नागपुर की ऐतिहासिक कुओं के संरक्षण की दिशा में प्रशासन की पहल
डॉ. प्रवीण डबली के वर्षों के प्रयासों को मिली महत्वपूर्ण सफलता
नागपुर के जलसंरक्षण मॉडल को पूरे महाराष्ट्र एवं देश में लागू करने की मांग
नागपुर। नागपुर शहर पर मंडरा रहे संभावित जलसंकट को देखते हुए नागपुर महानगरपालिका (NMC) एवं जिला प्रशासन ने शहर की पारंपरिक और ऐतिहासिक कुओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आधिकारिक आदेश जारी किए हैं। प्रशासन के इस निर्णय से पिछले कई वर्षों से कुओं के पुनरुज्जीवन और संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास कर रहे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं जलयोद्धा डॉ. प्रवीण डबली की मुहिम को महत्वपूर्ण सफलता मिली है।
डॉ. प्रवीण डबली और उनके सहयोगियों ने नागपुर शहर की ऐतिहासिक कुओं एवं बावड़ियों को कचरामुक्त करने, उनका पुनरुज्जीवन करने तथा उनके अस्तित्व को बनाए रखने के लिए विभिन्न स्तरों पर वर्षों से लगातार प्रयास किए हैं। मोतीबाग स्थित लगभग 250 वर्ष पुरानी भोसलेकालीन ऐतिहासिक कुएं के पुनरुज्जीवन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
वर्षों की मांग के बाद प्रशासन का सकारात्मक निर्णय :
प्रशासन के इस महत्वपूर्ण कदम का स्वागत करते हुए डॉ. प्रवीण डबली ने कहा, "शहर की ऐतिहासिक कुएं हमारी वास्तविक जलसंपदा हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन होना चाहिए, यह मांग हम पिछले कई वर्षों से लगातार उठा रहे थे। देर से ही सही, अब प्रशासन ने इस दिशा में कार्य शुरू किया है और सभी ऐतिहासिक कुओं के संरक्षण के आदेश जारी किए हैं। यह हमारी दीर्घकालीन मुहिम की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस जनहितकारी और संवेदनशील निर्णय के लिए मैं नागपुर महानगरपालिका तथा जिला प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।"
महाराष्ट्र सहित पूरे देश में लागू हो नागपुर का जलसंरक्षण मॉडल :
नागपुर महानगरपालिका एवं जिला प्रशासन ने 'विहिरींकडे चला' अभियान के अंतर्गत शहर की लगभग 860 पारंपरिक कुओं की सफाई तथा 400 कुओं में बोरिंग करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। डॉ. डबली ने मांग की है कि नागपुर के इस जलसंरक्षण मॉडल को आदर्श मानते हुए इसे पूरे महाराष्ट्र में लागू किया जाए। इस संबंध में उन्होंने राज्य सरकार, प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति के समक्ष भी मांग रखी है।
उन्होंने कहा कि यदि महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले में ऐतिहासिक कुओं, बावड़ियों और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों का संरक्षण एवं पुनरुज्जीवन किया जाए, तो भूजल स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ जलसंकट को कम करने में भी महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। स्थानीय जलस्रोतों का पुनर्जीवन महाराष्ट्र को जलसंकटमुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो सकता है।
डॉ. डबली ने नागपुर के नागरिकों से भी प्रशासन की इस मुहिम में सक्रिय सहभागिता निभाने तथा अपने-अपने क्षेत्रों में स्थित सार्वजनिक एवं पारंपरिक कुओं की स्वच्छता और संरक्षण के लिए श्रमदान करने की अपील की है।
- डॉ. प्रवीण डबली
जल अभ्यासक एवं जलयोद्धा
मो. 9422125656 / 7020343428
