पटाखों का शोर आखिर कब थमेगा?

 



नियम कागजों पर नहीं, जमीन पर लागू करे प्रशासन!


दीपावली हो, शादी समारोह, जन्मदिन या कोई अन्य उत्सव—खुशी मनाने के नाम पर पटाखे फोड़ने का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या अपनी खुशी के लिए दूसरों के स्वास्थ्य, नींद, सुरक्षा और पर्यावरण को खतरे में डालना उचित है? विशेषकर देर रात और आधी रात तक होने वाली आतिशबाजी आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।

सरकार ने रात 10 बजे के बाद पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन अनेक स्थानों पर इसका खुलेआम उल्लंघन होता है। जब नियम बनाए गए हैं, तो उनका पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी प्रशासन की है। आखिर नियमों का उद्देश्य क्या है, यदि उनका उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई ही नहीं होती?


सूखे के हालात में आग का बढ़ता खतरा-

कई क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात और पानी की कमी के बीच पटाखों से आग लगने का खतरा गंभीर चिंता का विषय है। सूखी घास, पेड़-पौधों, खेतों, गोदामों और रिहायशी इलाकों में आग की घटनाएं बड़ा नुकसान पहुंचा सकती हैं। पानी की कमी के कारण ऐसी आग पर काबू पाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में अनावश्यक आतिशबाजी से बचना बेहद जरूरी है।


बुजुर्गों, मरीजों और बच्चों की परेशानी कौन समझेगा?-

पटाखों के तेज धमाकों से बुजुर्गों की नींद प्रभावित होती है। हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और अस्थमा से पीड़ित मरीजों को परेशानी हो सकती है। नवजात शिशुओं, छोटे बच्चों और परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई और मानसिक शांति भी प्रभावित होती है। अस्पतालों, दवाखानों और वृद्धाश्रमों के आसपास विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है।


बेजुबान पशु-पक्षियों का दर्द भी समझें-

तेज आवाज से कुत्ते, बिल्लियां और अन्य पशु-पक्षी बुरी तरह घबरा जाते हैं। कई बार डर के कारण वे भागकर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। बेजुबान जानवर अपनी तकलीफ बता नहीं सकते, इसलिए उनके प्रति संवेदनशीलता दिखाना भी हमारी जिम्मेदारी है।


ध्वनि और वायु प्रदूषण पर भी लगाम जरूरी-

पटाखों से निकलने वाला धुआं, सूक्ष्म कण और रासायनिक तत्व वायु प्रदूषण बढ़ाते हैं। इससे सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष परेशानी होती है। तेज आवाज मानसिक तनाव और नींद में बाधा पैदा करती है। वहीं, उत्सव के बाद सड़कों पर फैला पटाखों का कचरा स्वच्छता के लिए अलग चुनौती बन जाता है।


प्रशासन केवल नियम न बनाए, सख्ती से पालन भी कराए-

पुलिस, महानगरपालिका और प्रदूषण नियंत्रण विभाग को संयुक्त रूप से विशेष निगरानी दल बनाकर देर रात तक गश्त करनी चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार जुर्माना और कार्रवाई होनी चाहिए। नागरिकों की शिकायतों के लिए प्रभावी हेल्पलाइन तथा स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से जनजागृति अभियान भी चलाया जाना चाहिए।


खुशियां मनाएं, लेकिन दूसरों की शांति की कीमत पर नहीं!-

त्योहार और उत्सव मनाने का सभी को अधिकार है, लेकिन किसी को भी अपनी खुशी के लिए दूसरों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन को प्रभावित करने का अधिकार नहीं है। दीप, सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पर्यावरण हितैषी गतिविधियों के माध्यम से भी उत्सव को यादगार बनाया जा सकता है।

अब सवाल प्रशासन से है—देर रात पटाखे फोड़ने वालों को रोकेगा कौन? नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई कब होगी? क्या प्रतिबंध केवल सरकारी आदेशों और कागजों तक सीमित रहेंगे?


शांतिपूर्वक जीना भी प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।- 

प्रशासन को इस अधिकार की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। अब समय आ गया है कि देर रात होने वाली अनियंत्रित पटाखेबाजी पर प्रभावी रोक लगे और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।


- दिवाकर मोहोड

   नागपुर, महाराष्ट्र 


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