वरिष्ठ नागरिकों के लिए बने स्वतंत्र मंत्रालय
ज्येष्ठ नागरिक प्रतिष्ठान के प्रतिनिधी डिव्हिजन कमिशनर से मिले
प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
नागपुर। देश में वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती संख्या और उनके सामने उत्पन्न हो रही सामाजिक, आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए केंद्र सरकार स्वतंत्र 'वरिष्ठ नागरिक कल्याण मंत्रालय' गठित करें ऐसी मांग ज्येष्ठ नागरिक प्रतिष्ठान की ओर से की गयी है । ज्येष्ठ नागरिक प्रतिष्ठान के सचिव डॉ राजू मिश्रा के मार्गदर्शन में एक प्रतिनिधी मंडल ने विभागीय आयुक्त श्रीमती विजयलक्ष्मी बिदडी से भेट की तथा प्रधानमंत्री को भेजने हेतू एक मांग पत्र उन्हे सौपा.
वर्तमान में अनेक वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं, आर्थिक सुरक्षा, पर्याप्त पेंशन, सामाजिक संरक्षण एवं कानूनी सहायता जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। कई बुजुर्ग अकेलेपन, उपेक्षा, आर्थिक कठिनाइयों और दुर्व्यवहार का भी सामना कर रहे हैं। इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए एक स्वतंत्र एवं प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था आवश्यक है, ऐसा ज्येष्ठ नागरिक प्रतिष्ठान के उपरोक्त ज्ञापन में कहां गया है.
प्रस्तावित वरिष्ठ नागरिक कल्याण मंत्रालय के माध्यम से बुजुर्गों के लिए सम्मानजनक एवं पर्याप्त मासिक पेंशन की व्यवस्था की जाए। सरकारी एवं मान्यता प्राप्त अस्पतालों में सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। अकेले रहने वाले एवं निराश्रित बुजुर्गों के लिए सहायता केंद्र, वृद्धाश्रम और डे-केयर केंद्र स्थापित किए जाएं, आदी मांगें ज्येष्ठ नागरिक प्रतिष्ठान द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे गये पत्र में शामिल है.
प्रस्तावित मंत्रालय द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिये जिला स्तर पर विशेष सहायता केंद्र , परिवहन, आवास एवं कानूनी सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य करेगा. उसी प्रकार वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव, ज्ञान एवं कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने के लिए विशेष योजनाएं बनाने का कार्य करेगा, ऐसी अपेक्षा भी उपरोक्त पत्र व्यक्त की गयी है.
प्रतिनिधी मंडल में मधुकर दहिकर, गोविंद पटेल, मिलिंद वाचणेकर, सुनील अडबे, श्रीधर नहाते, बिपीन तिवारी आदी अनेक सदस्य उपस्थित थे.
