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दुर्घटना के बाद का आधा घंटा सर्वाधिक महत्वपूर्ण : राजेश वाघ



ग्रामायण प्रतिष्ठान की सेवा गाथा का सातवां भाग

नागपुर। किसी भी सड़क दुर्घटना में, दुर्घटना होने के बाद का आधा घंटा घायलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. इस आधे घंटे में यदि उन्हें तुरंत प्राथमिक चिकित्सा और मेडिकल सहायता मिल जाए तो उनकी जान बच सकती है. इस लक्ष्य के साथ सड़क दुर्घटना आपात व्यवस्थापन केंद्र के माध्यम से 2,000 कार्यकर्ता कार्यरत हैं. 

प्राथमिक चिकित्सा के अभाव में किसी भी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अपनी जान न गंवानी पड़े, इस उद्देश्य के साथ इस संस्था के कार्यरत रहने की जानकारी संस्थापक राजेश वाघ ने दी. वे ग्रामायण प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित सेवागाथा श्रृंखला के सातवें भाग में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे. 

कभी भी, कहीं भी और किसी का भी एक्सीडेंट होने पर दुर्घटना में घायल को शीघ्र फर्स्टएड मिले और उसकी जान बचे, उसे अस्पताल में भर्ती कराना, परिवारजनों को जानकारी देना, परिवार के  सदस्यों के आने के बाद धन्यवाद की आशा न करते हुए वहां से चले जाना, इस उद्देश्य के साथ संस्था के कार्यकर्ता कार्यरत हैं. इन कार्यकर्ताओं में सब्जी - फल विक्रेता, चाय - पान टपरी वाले, पंक्चर ठीक करने वाले, चिल्लर माल के दुकानदार इत्यादि सामान्य नागरिकों का समावेश है. 

रास्ते पर दुर्घटना होने पर सबसे पहले मदद के लिए दौड़ने वाले यही लोग होते हैं. 2001 से यह कार्य निरंतर जारी है. अब तक 6 हजार से अधिक दुर्घटनाग्रस्तों की मदद की गई है. साथ ही 500 से अधिक गंभीर रूप से घायलों की जान बचाई जा चुकी है. उन्होंने बताया कि इस प्रकार का कार्य करने वाली संभवत: यह देश की एकमात्र स्वयंसेवी संस्था है.

उन्होंने कहा कि मानवीय गलतियों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण किया जाना चाहिए. भावी पीढ़ी को यातायात के नियमों के पालन के लिए प्रेरित करने का प्रयास करना आवश्यक है. उन्होंने बताया कि ! दुर्घटनामुक्त जीवन जीने की कला सीखें’ यह उपक्रम बस्तियों, झोपड़पट्टियों सहित विभिन्न स्थानों पर चलाकर जनजागृति की जा रही है. 

हर वर्ष देश में होने वाली 5 लाख दुर्घटनाओं में डेढ़ लाख नागरिकों की मृत्यु हो जाती है.  साढ़े तीन लाख लोग हमेशा के लिए विकलांग हो जाते हैं. यह आंकड़ा धक्कादायक है. इस समस्या पर गंभीरता से विचार करके खुद में बदलाव लाना समय की आवश्यकता है.

उन्होंने बताया कि दुर्घटनामुक्त नागपुर हमारा संकल्प है और इसे पूर्ण करने के लिए 2 योजनाएं प्रस्तावित हैं. संस्था के कार्यकर्ताओं अर्थात‍् सामान्य नागरिकों को फर्स्टएड किट, मेडिकल प्रशिक्षण देने के साथ जन सहभागिता से ब्लैक स्पॉट परिसर में आपात व्यवस्थापन केंद्र शुरू किए जाएंगे.  

विभिन्न सरकारी विभागों, जन प्रतिनिधियों, व्यावसायियों के सक्रिय सहयोग से दुर्घटना के कारणों को समझते हुए आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी. उसी प्रकार कॉलोनी, फ्लैट स्कीम, बस्तियां, नगर, वार्ड, प्रभाग एवं विधानसभा क्षेत्रों को  गोद लिया जाएगा तथा उन्हें यातायात के नियमों का पालन करने के लिए प्रवृत्त किया जाएगा. 

उन्होंने बताया कि उनकी मां के नाम पर पुरस्कार देने की योजना भी वे बना रहे हैं. इस कार्य के लिए उनकी मां इंदिरा वाघ से उन्हें प्रेरणा मिली है. कोरोनापूर्व काल में महाविद्यालय में जनजागृति कार्यक्रम जारी था और इसे आगे भी जारी रखने का मानस उन्होंने व्यक्त किया. कार्यक्रम के दौरान ऑनलाइन उपस्थित लोगों ने अपने प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने अपने अनुभव से सकारात्मक उत्तर देते हुए उनकी शंकाओं का निराकरण किया.

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