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शव की उपेक्षा बंद होनी चाहिए : श्रीकांत शिवणकर

 



नागपुर। कोरोना के दौरान और बाद में दुर्घटनाओं में मरने वाले व्यक्तियों का कोरोना परीक्षण सरकार के निर्देशों के अनुसार अनिवार्य किया गया है और यह समाज के हित में है। अक्सर दुर्घटना में मरने वाले व्यक्ति के शव को तुरंत पुलिस द्वारा शव परीक्षण के लिए सरकारी अस्पताल भेजा जाता है। शव अस्पताल पहुंचने के बाद, पुलिस विभाग को अस्पताल को सूचना देना  आवश्यक है, लेकिन अगर यह समय पर नहीं होता है, तो कोरोना की जांच नहीं होने के कारण शव परीक्षण में देरी होगी। इससे शव सड़ सकता है और यहां तक ​​कि डॉक्टर भी कोई कार्रवाई नहीं कर पाते हैं क्योंकि कोई दस्तावेज प्राप्त नहीं होता है।


सरकार के निर्देशों के अनुसार, शव का कोरोना परीक्षण शव परीक्षण से पहले किया जाना है। जिस समय चिकित्सा अधिकारी द्वारा शव प्राप्त किया जाता है, उस समय कोरोना परीक्षण किया जाना चाहिए ताकि पुलिस से दस्तावेज प्राप्त होने मे होने वाली देरी की वजह से कोरोना रिपोर्ट आने मे देरी ना हो ।  यदि शव को परिजनों को सौंप दिया जाता है, तो रिश्तेदारों को कोई कष्ट नहीं उठाना पड़ेगा।
 
पुलिस विभाग को तुरंत शव परीक्षण के दस्तावेज अस्पताल में जमा करवाने चाहिए। श्रीकांत शिवंकर ने पुलिस विभाग से इस संबंध मे सहयोग की अपेक्षा की है कि वही उन्होने शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय के डॉ गावंडे तथा शवविच्छेदन विभाग के डाॅ.दुधे से  वार्तालाप कर सहयोग की उम्मीद जतायी।
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