वर्धमान नगर में पैंसठिया छन्द का तिसरा अनुष्ठान हुआ संपन्न
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सत्संग जीवन को निर्मल और पवित्र बनाता है : जैन साध्वी पदमावती जी म. सा.
नागपुर।
तपस्वी रत्ना तप चक्रेश्वरी प. पू. श्री. चंदनबाला जी म.सा., जिनशासन
प्रभाविका मधुर व्याख्यानी प. पू. श्री पदमावती जी म.सा. आदि ठाणा 06 के
मार्गदर्शन में आज पैंसठिया छन्द के श्रृंखला में तिसरा अनुष्ठान श्री
वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के वर्धमान नगर स्थित स्थानक के श्रीमती
रजनीदेवी खुशालचंदजी रांका प्रवचन हाल में संपन्न हुआ। जिसमें 65 से अधिक
सहजोड़ों सम्मिलित हुए।
अनुष्ठान के पश्चात महासति प. पू. श्री पदमावती जी
म.सा. ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन को समुन्नता बनाने और
संवारने के लिए सत्संग ही मुख्य आधार है। सत्संग हमारे जीवन के लिए उतना ही
आवश्यक है जितना कि शरीर के लिए भोजन। सत्संग जीवन को निर्मल और पवित्र
बनाता है। यह मन के बुरे विचारों व पापों को दूर करता है। कहां गया है कि
जैसे होगा संग वैसे चढ़ेगा रंग। हर धर्म में सत्संग का महत्व बताया है। जो
सत्य की ओर कदम बढ़ाते है वे सत्संग कर पाते हैं।
सत्संग से दुगुर्णो का
नाश होता है और सद्गुणों की वृद्धि होती है। जब मन में क्रोध रूपी आंधी उठे
और ज्ञानदीप बुझने लगे तो सत्संग प्रकाश करता है और हमें सही दिशा में ले
जाता है। सत्संग करने से हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। हमारे विचारों में
शुद्धता आती है, वाणी में मधुरता, स्वभाव में सरलता ऐसे विशेष गुणों की
प्राप्ति होती है। निरंतर सत्संग करो तो मोक्ष की राह पर आगे बढ़ सकतें
हैं।
चातुर्मास प्रारंभ हुआ तब से निरंतर
तपस्याओं का क्रम जारी है इसी में ही 65 दिनों तक एक दिन उपवास एक आयम्बिल
यह तपस्या प. पू. श्री. चंदनबाला जी म.सा. की, निरंतर पिछले ढाई वर्षो से
एकासना प. पू. श्री पदमावती जी म.सा., प. पू. श्री चारुप्रज्ञा जी म.सा. की
36 वीं आयम्बिल ओलीजी एवं प. पू. श्री सूर्यवंदना जी म.सा., प. पू. श्री
वीतराग वंदना जी म.सा. के निरंतर एकासना की तपस्या, ऐसी विभिन्न तपस्याएं
सभी महासतियाजी की चल रही है।
उपरोक्त सभी कार्यक्रमों की जानकारी श्री
ओसवाल पंचायती के महामंत्री राकेश गांधी ने दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में
चातुर्मास संयोजक प्रदीप रंका ने प्रयास किया।