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गांधी परिवार के नन्हे मुन्ने बालकों ने पर्यूषण के दौरान की तपस्याएं


नागपुर। जैन धर्म में तपस्या का महत्व सबसे अधिक है। लेकिन कई बार अच्छे-अच्छे जेष्ठ श्रावक श्राविकाएं भी तपस्याएं करने से इसलिए कतरा जाते हैं क्योंकि जैन धर्म की कोई भी तपस्या में सूर्यास्त के पश्चात जल ग्रहण तो कर ही नहीं सकतें। कुछ तपस्या में दिन में बहुत थोड़े से समय की मर्यादा में रहकर अचिंत आहार बिना कंदमूल एवं हरी सब्जियों का अन्न ग्रहण कर सकते हैं। 

ओर ऐसी कठिन प. पू. श्री. चंदनबाला जी म.सा., प. पू. श्री पदमावती जी म.सा. आदि ठाणा 06 के सानिध्य में  प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना नागपुर अध्यक्ष तथा श्री ओसवाल पंचायती नागपुर के महामंत्री राकेश गांधी के 6 वर्षीय सुपुत्र सुपार्श्व व भांजे - 3 वर्षीय मौलिक पारख तथा 7 वर्षीय विधुत जैन ने पर्वधिराज पर्यूषण के दौरान निरंतर 8 दिनों तक की। तपस्या के साथ-साथ नन्हे-मुन्ने बालकों ने पर्यूषण पर्व के आठों दिन सभी धार्मिक क्रियाएं भी पूर्ण की।
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