गज़लें हमें जीने की प्रेरणा भी देती हैं : डॉ. भोला सरवर
साहित्यिक में बहारे गजल
नागपुर। गज़लें, लिखना आसान नही ये अनुभव का पिटारा हैं। सुख-दुःख तो बयां करती ही हैं, हमें जीने की प्रेरणा भी देती हैं उक्त विचार विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम साहित्यिकी के अंतर्गत बहारे गज़ल कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. भोला सरवर ने गज़ल का महत्व व शेरों की बरीकियाँ बताते हुए गजलों की समीक्षा की।
वहीं संयोजक डॉ विनोद नायक ने कहा -
गजलें, मेघ-सी बरसती हैं अौर मन का कोना-कोना हरा-भरा कर देती हैं। जैसे बादलों से सृष्टि संवरती है वैसे ही गज़लों से जिंदगियाँ संवर जाती हैं। दो पंक्तियों के शेर जीवन भर याद रहते हैं।
अतिथि शायर तन्हा नागपुरी मंच पर मौजूद रहे। सर्वप्रथम शमशाद शाद ने गज़ल पेश कि- दर्द का एक ठिकाना थोड़ी होता है, दिल गम से बेगाना थोड़ी होता है, खुशियां और गम साथ ही पलते हैं, लेकिन दोनों में याराना थोड़ी होता है।
महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी के सदस्य अविनाश बागडे ने गजल प्रस्तुत कि- माँगने को नही थे उठे हाथ पर, पेशकश देखिए आसमानी हुई. महफिल में सुनकर 'अवि' की गजल, एक लड़की कहीं फिर दीवानी हुई। माधुरी राऊलकर ने कहा "आईने की धूल हटा के लिखती हूँ, अौर सबसे नज़र मिला के लिखती हूँ। मुझे क्या किसी को ठोकर न लगे, राहों के पत्थर उठाके लिखती हूँ। "गजल बयां की। गुलाम मोहम्मद खान आलम ने कहा" ख्वाब दिल में सजाना बुरा है, ना ही दिल लगाना बुरा है।
" गजल पेश की। शादाब अंजुम ने गजल "सख़्त बनोगे तुम जो सुपारी के मानिंद,फिर तो लाज़िम है कि सरोते निकलेंगे" पेश की। हेमलता मिश्र मानवी ने कहा "जिंदगी की बहर न बिगाडा करें, गीत गजलों की लय खुशनुमा हम करें।" गजल प्रस्तुत की। उमर अली अनवर ने "इससे पहले की बे निशाँ हो जाअो, शायरों वक्त की जबाँ हो जाअो" गजल पेश की। तन्हा नागपुरी ने गजल बयां कि "पहले ही टूटे दिल पे अौर उल्फत की मार की, खुदाई दिल पे ढ़हने की कोई नजीर तो हो।
"कृष्णकुमार द्विवेदी ने गजल "रिश्ते नाते सब टूट गए ये किस्मत का फेरा है,ये जग तेरा है न मेरा है, कुछ दिन का रैन बसेरा है।" प्रस्तुत की गजलकार डॉ मधुकर राव लारोकर, डॉ भोला सरवर, सूर्यकांत मून्नघाटे, रूबीदास, मीरा जोगलेकर, माया शर्मा 'नटखटी', मंजू कारेमोरे, शेख हफीज नागपुरी, शगुप्ता सासारामी व गुलाम मोहम्मद खान आलम ने अपनी गजलों से मंत्रमुग्ध कर दिया। आभार सहसंयोजक शादाब अंजुम ने माना।
