कविता मनुष्य को स्वार्थ के घेरे से उपर उठाती है : प्रा. रोहिणी डावरे
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नागपुर पुणे। कविता शब्दों द्वारा भावों को वाणी देने का काम करती है तथा मनुष्य को स्वार्थ के घेरे से उपर उठाती है।इस आशय का प्रतिपादन प्रा.रोहिणी बालचंद डावरे, अगस्ति महाविद्यालय, अकोले, अहमदनगर, महाराष्ट्र ने किया।विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान,प्रयागराज, उ.प्र.के तत्वावधान में आयोजित उत्तर प्रदेश राज्य स्तरीय काव्य गोष्ठी में वे विशिष्ट अतिथि के रूप में उद्बोधन दे रही थी।
विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ.प्र.के अध्यक्ष डाॅ.शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता की। प्रा. रोहिणी डावरे ने आगे कहा कि कविता प्रबल अनुभूति का सहज उद्रेक है। कवि की सर्जनात्मक अनुभूति काव्य का रूप धारण करती है।काव्य मनोगत भावों की सहज स्फूर्त अभिव्यक्ति है।
विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज,उ.प्र.के सचिव डाॅ.गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने प्रस्तावना में मनुष्य जीवन में काव्य की महत्ता प्रतिपादित की। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज,उ.प्र. के अध्यक्ष डाॅ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख,पुणे,महाराष्ट्र ने अध्यक्षीय समापन में कहा कि भाव,बुद्धि,कल्पना व शैली तत्व के योग से कविता जन्म लेती है।लेखन के साथ ही काव्य प्रस्तुति की शैली श्रोताओं को अत्यधिक मात्रा में प्रभावित करती है।
उक्त काव्य गोष्ठी में उ.प्र.के कवियों द्वारा काव्य पाठ किया गया। नूपुर मालवीय,प्रयागराज से कहती है-
'एक महिला पति से बोली-मैं बेलती हूँ,तुम सेकते जाओ,मैं धन कमा लूँगी, तुम देखते जाओ।'
सीमा वर्मा,लखनऊ ने कहा -'मुझे गर्व है मैं नारी हूँ।सोच पुरानी जब स्री कहलाई जाती थी अबला।हुई चेतना जागृत मेरी मन कोमल पर हूँ सबला।'
ओमप्रकाश त्रिपाठी,सोनभद्र अपनी कविता में कहते हैं - 'अपनी बेटियों और बेटों की रक्षा तो सभी करते हैं;गलियों में रोटी के लिए घूमती बेटियों को दरिंदों से बचाया जाए।' यशपाल सिंह,आगरा से कहते हैं-'भूख से तडपा है बच्चा, मांगता कुछ रोटियाँ। एक निवाले के लिए दर दर से मांगे रोटियाँ।'
राममूर्ति सिंह अधीर, लखनऊ ने सुनाया, 'आना जरूर,चाहे देर या सबेर। फूले पीले अमलतास,फूली पीली कनेर।'
उमा प्रसाद,लखनऊ से कहते है-'नहीं आऊँगा कौआ बन श्राद्ध खाने, शिशु रूप में तेरे घर आऊँगा धन्य,तेरे घर की खुशहाली बन जाऊँगा।'
लखनऊ से कल्पना अग्रवाल कहती है,'लफ्जों से दोस्ती हो गई, शायरी जिंदगी हो गई। इश्क में तू कान्हा मेरा,मैं तेरी बाँसुरी हो गई।'
अन्नपूर्णा मालवीय प्रयागराज से कहती है-'राष्ट्रपिता बापू है मेरे,शत् शत् नमन प्रणाम है तुम्हें।'
सतीशकुमार मिश्र 'सत्य', नैनी,प्रयागराज ने सुनाया-दहेज की प्रथा ने तो कमाल कर दिया,सारे समाज का तो बुरा हाल कर दिया।'
राकेश शरण, सोनभद्र से लिखते हैं - 'भारत के अमर शहीदों की कथा सुनाने आया हूँ,आजादी के मतवालों की व्यथा सुनाने आया हूँ।'
डाॅ. रश्मि चौबे,गाजियाबाद से कहती है-'भारत माता से ही हमारी शान है,हमको अपने देश पर अभिमान है।साहित्यकार कहते हिंदी हमारी जान है,ऐसी नागरी लिपि को प्रणाम है।'
अतुल शुक्ला,रायबरेली से लिखते हैं-'वाह रे भारत!होता है दुख देखकर तुमको बनते इंडिया, दुनिया एक दुल्हन,दुल्हन के माथे की बिंदिया,आइ लव माय इंडिया।'
लखनऊ से डाॅ.कुलदीप नारायण श्रीवास्तव कहते हैं-'शकुनि बहन के गेह में क्यों है
आँसू भी संदेह में क्यों है
शुद्ध है तो केवल छल है किन्तु
मिलावट नेह में क्यों है।'
इस अवसर पर विद्यासागर मिश्र,लखनऊ,चित्रांशी श्रीवास्तव, रायबरेली, सुरेशकुमार राजवंशी, लखनऊ, सत्येंद्र सिंह लखनऊ, डाॅ.रूचि श्रीवास्तव, लखनऊ, प्रवीण डाही आदि कवियों ने अपनी कविताएँ प्रस्तुत की।
अनामिका श्रीवास्तव, रायबरेली ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।श्रीमती पूर्णिमा कौशिक,रायपुर ने काव्य गोष्ठी का संचालन किया तथा पुष्पा श्रीवास्तव "शैली", रायबरेली ने धन्यवाद ज्ञापन किया।