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कविता कम शब्दों में बहुत कुछ कह देती है : डॉ. सुलभा कोरे


नागपुर/पुणे। साहित्य की महत्वपूर्ण विधा कविता कम शब्दों में बहुत कुछ कह देती है। इसलिए  मानव जीवन में कविता का महत्वपूर्ण स्थान है। ये विचार डॉ.सुलभा कोरे, मुख्य प्रबंधक, राजभाषा विभाग, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, मुंबई ने व्यक्त किये।

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान,प्रयागराज उ.प्र.के आभासी बाल संसद समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में वे अपना उद्बोधन दे रही थीं। कु. जिया रियाज खान, मनसुखभाई कोठारी नेशनल स्कूल, कोंढवा, पुणे महाराष्ट्र ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। डॉ. सुलभा कोरे ने  आगे कहा कि इस कार्यक्रम में  बालकों के मुख से कविताएं सुनकर मैं अभीभूत हुई हूं। बाल संसद में आकर मुझे अपना बचपन याद आया और मैंने अपना बचपन जी लिया। क्योंकि बच्चों की बाल भंगिमाएं बड़ा सुकून देती हैं। आने वाली दीपावली में  प्रेम का दीपक जला कर अपने जीवन को सफल बनाएं। 

मुख्य अतिथि रामप्रसाद यादव बलौदा, छत्तीसगढ़ ने बाल सांसद उपक्रमों की प्रशंसा की। 
विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान के सचिव डॉ. गोकुलेश्वर द्विवेदी  ने प्रस्ताविक भाषण में संस्था के  उपक्रमों की विस्तार से चर्चा करते हुए विशद किया कि, बाल संसद कार्यक्रम बच्चों के सुप्त  गुणों को विकसित करने में बड़े लाभदायक सिद्ध हो रहे हैं। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए  जिया रियाज खान, पुणे, महाराष्ट्र ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत की भाषा संबंधी समस्याओं को सुलझाने में महत्वपूर्ण योगदान किया है। वे हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं का विकास चाहते थे। नवरात्रि पर्व की महत्ता प्रतिपादित करते हुए कहा कि, मां दुर्गा की पूजा अर्चना से हमारे सभी कष्टों का नाश होता है। दीपावली का त्यौहार भारतीय जनमानस में उल्लास, भाईचारा, प्रेम का संदेश फैलाता है।

बाल संसद प्रभारी डॉ. रश्मि चौबे गाजियाबाद ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचार, नवरात्रि और दीपावली का त्योहार ये सभी हमें बुराई पर अच्छाई की विजय को दर्शाते हैं। इन के आधारभूत सिद्धांतों को जीवन में अपनाते हुए लक्ष्य प्राप्ति की ओर बढ़ते रहना चाहिए।

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने कहा कि, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश की एकता और उन्नति के लिए आवश्यक है। भारतीय संस्कृति में त्योहारों की अपनी महत्ता है इसलिए भारतीय त्यौहार भारत तथा भारत से बाहर भी मनाए जाते हैं। नवरात्रि में शक्ति के नौ रूपों की उपासना की परंपरा है। दीपोत्सव के माध्यम से दीपावली अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। 

बाल संसद में अधिकांश बच्चों ने अपनी सक्रियता दर्शायी है जिनमें कार्तिक भावे, औरंगाबाद, महाराष्ट्र, श्रद्धा नाईक, कविश्वर, चेतन्य हटोलने, आयुषी सरोदे , स्नेहल जाधव, प्रथम महाजन, शार्दुल यादव ,स्वरा कुलकर्णी, आदित्य नाईक ,  श्रद्धा नाईक, महेंद्र निध्याना, रहुल कुमार बर्मन कोरबा , आद्विका जयसवाल, सान्या पटवा, कोरबा, महेश लोखंडे, औरंगाबाद, छत्तीसगढ़ से आर्य प्रताप सिंह, आद्य तिवारी रायपुर,भक्ती शाखाबार औरंगाबाद, विदी पाराशर, भोपाल, मध्य प्रदेश, स्वरा त्रिपाठी लखनऊ, उ.प्र, अश्लेषा चक्रवर्ती, राजनंदगांव, गरिमा महतो, भुवन कश्यप, आरूषी सिंह, भव्य सिंह,  चंदेल, रिया साहू, मंत्र एवं मैत्री बुधौलिया, दतिया मध्य प्रदेश आदि की सक्रिय सहभागीता रही।

सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। स्वागत भाषण शुभ द्विवेदी, प्रयागराज ने दिया।  संचालन इशिका वही नंदनी, दुर्ग छत्तीसगढ़ ने किया। अंत में आभार ज्ञापन पूर्णिमा कौशिक, रायपुर, छ.ग. ने किया।
साहित्य 6937865234815294664
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