नवाचार को बढ़ावा देती है राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020
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नागपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की शिक्षा व्यवस्था को युगांतरकारी दिशा देने का कार्य करेगी। यह नीति रोजगार के साथ ही व्यावहारिक जीवन से जुड़ी है । इस नीति में परंपरागत शिक्षा से लेकर विज्ञान व तकनीकी शिक्षा भी अपनी मातृभाषा में दी जा सकेगी। इस नीति से शिक्षा का राष्ट्रीयकरण होगा। यह नीति शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देती है।
यह बात दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन- योजना प्रोफेसर निरंजन कुमार ने राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय एवं महात्मा हंसराज संकाय संवर्धन केंद्र, हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संकाय संवर्धन कार्यक्रम में अतिथि वक्ता के रूप में कही। उन्होंने कहा कि यह नीति भारत को जोड़ने की बात करती है। साथ ही, विचारों को नई दिशा देने का कार्य करती है। यह कार्यक्रम शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के पं. मदनमोहन मालवीय शिक्षा मिशन के तहत महात्मा हंसराज कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किया जा रहा है।
दूसरे वक्ता भारतीय भाषा केंद्र ,जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के डीन- विद्यार्थी प्रोफेसर सुधीर प्रताप सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अनुवाद की भूमिका पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह शिक्षा नीति बदलते वैश्विक परिवेश में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की आवश्यकता की पूर्ति करती है। साथ ही शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने, नवाचार लाने का प्रयास करती हैं। यह नीति भारतीय शिक्षण व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान दिलाने में कारगर साबित होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत मात्र प्रादेशिक भारतीय भाषाओं ही नहीं, बल्कि विलुप्तप्राय भाषाओं की पांडुलिपियों तथा शब्दों का संग्रह करके अनुवाद के माध्यम से उसे पाठ्यक्रम से जोड़ने की बात करती है। जिससे हम दुनिया के किसी भी ज्ञान को अपनी मातृभाषा में समझ व लिख पायेंगे।
नागपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ मनोज पांडेय ने स्वागत उद्बोधन दिया। सूत्र संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. गजानन कदम ने किया।