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क्रांति पथ का राही बन गया हेमू कालानी : वाधनदास तलरेजा


सिंधुड़ी यूथ विंग द्वारा उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम

नागपुर। सिंध का नौजवान क्रांतिकारी हेमू कालानी जिसे सिंध का भगत सिंह कहा जाता है। शहीद भगत सिंग की देश प्रेम से ओत प्रोत बातों से बहुत प्रेरित हुआ था। शेर ए सिंध के नाम से विख्यात क्रांतिवीर शहीद हेमू कालानी को जिसने मात्र 19 वर्ष की आयु में अपने प्राणों की आहूति देकर अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी। उनका यह बलिदान दुनियां सदियों तक याद रखेगी। 

हेमू कालानी पर उनके चाचा और बुजुर्ग स्वतंत्रता सेनानी डाॅ मंघाराम कालानी का काफी प्रभाव था। उनके चाचा स्वंतंत्रता सैनानी थे। सन् 1932 में उसके चाचा डाॅ. मंघाराम कालानी ने ‘‘स्वराज सेना’’ गठित की जिसका सेना नायक उन्होंने नन्हे क्रांतिकारी हेमू को बनाया। हेमू ने खुशी खुशी इसे स्वीकार किया। क्रांति के इस वातावरण में सिंध प्रांत का यह किशोर भी क्राति पथ का राही बन गया। किसे पता था कि यह छोटा सा छात्र भारत के स्वतंत्रता संग्राम को सफल बनाने के लिए अपने दिल में शेरे पंजाब शहीद भगतसिंह की तरह सूली को श्रृंगार बनाने की इच्छा को संजोये हुए है। 

उक्त विचार प्रसिद्ध व्याख्यानकर्ता  एवं संजीवनी फाउंडेशन के अध्यक्ष दादा वाधनदास तलरेजा ने प्रकट किये। वे भारत के सपूत शहीद हेमू कालाणी के 79 वें बलिदान दिवस पर श्रद्वांजलि देने हेतु सिंधुड़ी यूथ विंग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।  सर्वप्रथम अमर शहीद हेमू कालाणी की प्रतिमा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिंधुड़ी नाट्य संस्था के अध्यक्ष हरीश माईदासाणी ने की। 

भारतीय सिन्धु सभा सांस्कृतिक मंच, नागपुर के अध्यक्ष किशोर लालवानी ने कहा कि हेमू कालाणी का जन्म 23 मार्च 1923 को अखंड भारत के सिंध प्रांत के सख्खर शहर में पिता पेसूमल कालाणी तथा माता जेठीबाई की पवित्र कोख से हुआ था। हेमू कालानी बचपन से ही कुशाग्र बुद्वि का छात्र रहा। खेल कूद में भी उसे कई मैडल मिले। हेमू कुश्ती का शौकीन था और कुशल साइकल चालक तथा कुशल तैराक भी था। विश्व प्रसिद्व सिंधू नदी पर रोहिड़ी और सख्खर को जोड़ने वाली लैंड्सडाउन पुल से नदी में छलांग लगाता तो देखने वाले उसकी दिलेरी देखकर आश्चर्यचकित हो जाते थे। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही वह पला बढ़ा। अतः राष्ट्रभक्ति उसमें कूट कूटकर भरी हुई थी। 

ऐसे वीर सपूत के जीवन पर फिल्म बननी चाहिये। सिंधी सोशल फोरम के महासचिव पी.टी.दारा ने कहा कि हेमू कालानी युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत थे। हेमू के क्रांतिकारी आव्हान से प्रभावित होकर उसके साथी भीे इस आंदोलन में उसके साथ हो लिए। अपनी माता से जलियांवाला बाग़ की दास्तां और शहीद भगत सिंग के बलिदान की दास्तां सुनकर वीर हेमू कालाणी के मन में ज्वालामुखी भड़क उठा था। वह सोचता था काश! मुझे भी ऐसा सुअवसर मिले ताकि मैं भी हज़ारों अंग्रेज सिपाहियों को एक साथ जहन्नुम तक पहुंचा सकूं। 

सिंधी सोशल फोरम के अध्यक्ष मोहन मंजाणी ने 1942 में जब महात्मा गाँधी ने भारत छोड़ो आंदोलन चलाया तो हेमू अपने साथियों के साथ बड़े जोश व खरोश के साथ उसमें कूद पड़े. आगे जब इस आंदोलन से जुड़े महात्मा गाँधी, खान अब्दुल गफ्फार जैसे क्रांतिकारियों को गिरफ्तार किया गया, तो इस आंदोलन की ज्वाला और भड़क उठी। परमानंद वीधीणी ने बताया कि शहीद भगत सिंग की देश प्रेम से ओत प्रोत बातों से बहुत प्रेरित हुआ था। देश के लिए शहीद होने वाले भगतसिंग के बारे में हर कोई जानता है। जिन्होंने देश की आजादी के लिए खुशी-खुशी मौत को गले लगा लिया। हेमू उनके बारे में पढ़कर मन ही मन बहुत प्रसन्न होता था। वो अपने चाचा से पुस्तकें लेकर वीरों के किस्से पढ़ता रहता था। उसकी माता जेठीबाई भी उसे देश प्रेम की कहानियां सुनाया करती थी।

कार्यक्रम का संचालन विजय वीधानी ने किया। विजय वीधानी  ने वाधनदास तलरेजा से निवेदन किया कि संजीवनी फाउंडेशन की ओर से शहीद हेमू कालाणी के फोटो फ्रेम करवाकर सभी स्कूल, काॅलेजे, आॅफिस एवं लाइब्रेरी में लगवाया जाए ताकि हमारी युवा पीढ़ी उनके बारे में अच्छी तरह जान सकें। सिंधुड़ी यूथ विंग के अध्यक्ष राकेश मोटवाणी ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत के नौजवान अपनी मातृभूमि के लिए कुछ भी करने के लिए तेयार हैं। कोर्ट में जब जज ने हेमू से पूछा ‘‘फिश प्लेट उखाड़ने का तुम्हारा मकसद क्या था?’’ तब हेमू ने मुस्करा कर जवाब दिया ‘‘जब मुझे पता चलो कि गांधीजी के भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल स्वतंत्रता सेनानियों को कुचलने के लिए एक विशेष रेलगाड़ी बारूद और हथियारों से लैस होकर सख्खर होती हुई बलूचस्तान के क्वेटा शहर तक जाएगी तो मेरा खून खौल उठा। मैंने तय किया कि इस गाड़ी को सख्खर से आगे नहीं जाने देंगे। चाहे इसके लिए कुछ भी क्यों न करना पड़े। 

इस पर क्षुब्ध होकर जज ने हेमू को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। सिंधुड़ी नाट्य संस्था के अध्यक्ष हरीश माईदासाणी ने बताया कि वे खुशनसीब हैं कि उन्होंने शहीद हेमू कालाणी के जीवन पर आधारित नाटक में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ है। मुझे उस नाटक की याद ताज़ा है। फांसी से पहले जब हेमू से उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई तो उसने कहा कि,'मैं फिर से भारतवर्ष में जन्म लेना चाहता हूं।' राम प्रसाद बिस्मिल की इन पंक्तियों को गुनगुनाते हुए वह फांसी के तख्ते की ओर बढ़ने लगा - सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाजुए कातिल में है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सिंधुड़ी यूथ विंग के गुरमुख मोटवाणी, परमानंद कुकरेजा, महेश चेलाणी, अशोक माखीजाणी, राजेश स्वामनाणी ने अथक प्रयास किया।

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